Monday, 25 September 2017

हर गम दूर करती हैं 'मां कात्यायनी'

नवरात्र छठा दिन: देवी कात्यायनी की पूजा विधि, प्रसाद में इन्हें शामिल जरूर करें



नवरात्र के छठे दिन देवी के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। मां के इस रूप के प्रगट होने की बड़ी ही अद्भुत कथा। माना जाता है कि देवी के इसी स्वरूप ने महिषासुर का मर्दन किया था। देवीभाग्वत पुराण के अनुसार देवी के इस स्वरूप की पूजा गृहस्थों और विवाह के इच्छुक लोगों के लिए बहुत ही फलदायी है।

इस तरह देवी का छठा स्वरूप कहलाया कात्यायनी 
महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया। महर्षि कात्यायन के नाम पर ही देवी का नाम कात्यायनी हुआ। मां कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं। यह दानवों, असुरों और पापी जीवधारियों का नाश करने वाली देवी कहलाती हैं।
चार भुजाधारी और सिंह पर सवार हैं मां
सांसारिक स्वरूप में मां कात्यायनी शेर पर सवार रहती हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। सुसज्जित आभा मंडल युक्त देवी मां का स्वरूप मन मोहक है। इनके बांए हाथ में कमल व तलवार और दाहिने हाथ में स्वस्तिक और आशीर्वाद की मुद्रा अंकित है। नवरात्र की षष्ठी तिथि के दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा होती है। क्योंकि इसी तिथि में देवी ने जन्म लिया था और महर्षि ने इनकी पूजा की थी।
मां के इस स्वरूप को पूजने वाले में होती है यह खूबी
मान्यता के अनुसार, नवरात्र के छठे दिन साधक का मन 'आज्ञा चक्र' में स्थित रहता है। योग साधना में आज्ञा चक्र का महत्वपूर्ण स्थान है। आज्ञाचक्र मानव शरीर में उपस्थित 7 चक्रों में सर्वाधिक शक्तिशाली है। इस दिन ध्यान का प्रयास करने से भक्त को सहजभाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं। जो भी भक्त मां के इस स्वरूप का पूजन करते हैं, उनके चेहरे पर एक अलग कांति रहती है। वह इस लोक में रहते हुए भी अलौकिक सुख का अनुभव करता है। उसका तेज देखते ही बनता है।

आज इस मंत्र से करें मां का पूजन, मिलेगा लाभ
चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

यह है शुभ रंगनवरात्र के छठे दिन लाल रंग के वस्त्र पहनें। यह रंग शक्ति का प्रतीक होता है। मां कात्यायी को मधु यानी शहद युक्त पान बहुत पसंद है। इसे प्रसाद स्वरूप अर्पण करने से देवी अति प्रसन्न होती हैं।