Sunday, 28 January 2018

भाजपा जहां पत्थरबाजो से मुकदमे वापस ले रही है वहीँ सेना के वीर जवानो पर 302 और 307 जैसी बेहद गम्भीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर रही है

कश्मीरी पत्थरबाजों के मुकदमे वापस लेने वाली सरकार ने सेना के मेजर और सैनिक पर दर्ज किया हत्या का मुदकमा . उबल पड़ा है राष्ट्र
अपनी छाती पर गोली खा कर देश के एक एक नागरिक की रक्षा करने वाली फ़ौज पर जब आतंकी गोली बरसा कर और पत्थरबाज पत्थर बरसा कर थक गये तो क्या अब उनके वो कार्य सरकार करेगी जो बड़े बड़े आतंकी नहीं कर सके . सेना के मनोबल पर जिस पूर्ववर्ती सरकार ने कर्नल पुरोहित, कर्नल डी के पठानिया , मेजर उपेन्द्र और मेजर उपाध्याय जैसे वीरों को अपराधी बना डाला था अब उस राह पर फिर से क्यों चल रही वर्तमान सरकार जो कहीं न कहीं कश्मीर की सत्ता में महबूबा की सहयोगी बन कर शामिल है . मेजर गोगोई के बाद अब निशाना बना है एक और जांबाज़ मेजर .

ज्ञात हो कि कश्मीर के शोपियां में सेना के काफिले पर भारी पत्थरबाजी करने वाले तमाम आतंक समर्थक पत्थरबाजो से अपना जीवन बचाने के लिए प्रतिउत्तर में गोली चलाने वाले सेना के जांबाजो पर हत्या अर्थात 302 के साथ साथ बेहद घातक 307 धारा दर्ज करवा कर एक बार फिर से देश की आन , बान और शान के रूप में राष्ट्र कीरक्षक सेना के मनोबल पर भीषण वार किया गया है.. सेना की 10 वी गढ़वाल यूनिट पर भारी पथराव के बीच में अपनी आत्मरक्षा में चलाई गयी गोली में 2 पत्थरबाज मौके पर ही मारे और 9 पत्थरबाज घायल हो गये . इस मुद्दे गढ़वाल यूनिट के एक मेजर और एक अन्य सैनिक पर हत्या और हत्या के प्रयास के तहत कश्मीर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किया गया है . इस मामले की जानकारी होते ही राष्ट्रवादी संगठनो में आक्रोश की लहर दौड़ गयी है .

राष्ट्रवादी संगठनों के सबसे बड़े असंतोष की बात ये रही कि केंद्र के साथ राज्य की सत्ता में भी सहयोगी भाजपा जहां पत्थरबाजो से मुकदमे वापस ले रही है वहीँ सेना के वीर जवानो पर 302 और 307 जैसी बेहद गम्भीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर रही है जबकि इसी मुद्दे पर सेना के प्रवक्ता का बयान है कि जो कुछ भी हुआ वो सब आत्मरक्षा के लिए किया गया है . अब सवाल यहाँ ये उठ रहा है कि क्या सेना के उन वीर बलिदानियों को पत्थरबाजो के पत्थर खाने थे ? क्या ये सम्भव नहीं था कि उन पत्थरबाजो की आड़ में कोई आतंकी उन पर प्राणघातक हमला कर देता ? क्या आत्मरक्षा भी अपराध है अब कश्मीर में और सेना का जवान केवल खुद को खत्म करने केलिए वहां तैनात है ? यकीनन आक्रोशित समाज सरकार से इसके उत्तर ले कर रहेगा .