Wednesday, 3 January 2018

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में राष्ट्र स्तरीय ‘तृतीय अधिवक्ता अधिवेशन’ संपन्न

गंगा नदी की रक्षा हेतु सभी को संघटित होना आवश्यक – ज्येष्ठ अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता, अलाहाबाद उच्च न्यायालय


रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में राष्ट्र स्तरीय ‘तृतीय अधिवक्ता अधिवेशन’ संपन्न


रामनाथी (गोवा) : रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में २६ से २८ दिसम्बर की कालावधी में ‘तृतीय अधिवक्ता अधिवेशन’ आयोजित किया गया था। इस अधिवेशन में अलाहाबाद उच्च न्यायालय के ज्येष्ठ अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता ने संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने ऐसा प्रतिपादित किया कि, ‘गंगा नदी का पानी विश्व में सर्वोत्कृष्ट है तथा अद्भुत भी है ! गंगा नदी को हिन्दू संस्कृति में विशेष स्थान है। केवल इतना ही नहीं, तो उसका वैज्ञानिक दृष्टि से भी अतिशय महत्त्व है। अतः गंगा नदी के संदर्भ में अधिक संशोधन करने की आवश्यकता है। ऐसा होते हुए भी भारत में कहीं भी ‘रिव्हर सायन्स इंजिनीयरिंग’ का विद्यालय नहीं है अथवा कहीं भी उस संदर्भ का शिक्षण प्राप्त नहीं होता। ऐसी परिस्थिति में गंगा नदी की रक्षा हेतु सभी को संघटित होने की आवश्यकता है !’
इस अधिवेशन के लिए हिन्दू विधीज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर, हिन्दू विधीज्ञ परिषद के राष्ट्रीय सचिव श्री. संजीव पुनाळेकर, बेंगलुरु उच्च न्यायालय के ज्येष्ठ अधिवक्ता श्री. अमृतेश एन.पी., हिन्दू जनजागृति समिति के केंद्रीय समन्वयक श्री. नागेश गाडे, हिन्दू विधीज्ञ परिषद के संस्थापक-सदस्य श्री. सुरेश कुलकर्णी, केंद्र सरकार के भूतपूर्व सांस्कृतिक सलाहगार प्रा. रामेश्वर मिश्र, धर्मपाल शोधपिठ की भूतपूर्व संचालिका प्रा. कुसुमलता केडिया, सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस आदि उपस्थित थे।
अधिवक्ता श्री. गुप्ता ने आगे ऐसा कहा कि, ‘‘जब गंगा नदी की सुरक्षा का कार्य प्रारंभ किया, उस समय नदी के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त होने के लिए मैने सभी को आवाहन किया। तदनुसार मुझे बताया गया कि, ‘गंगा नदी के पानी के संदर्भ में बनारस विश्व हिन्दू विद्यापीठ में अधिक जानकारी प्राप्त होगी !’ तत्पश्चात मैंने गंगा नदी के पानी का अभ्यास किया। इस अभ्यास के पश्चात मुझे अत्यंत वैशिष्ट्यपूर्ण ऐसी जानकारी प्राप्त हुई ! गंगा नदी विश्व की सर्वाधिक ऊंचाई से नीचे आती है। अतः उसमें ‘गतिजन्य (कायनेटिक) ऊर्जा’ सर्वाधिक रहती है। गंगा नदी के पानी में अन्य नदियों के पानी की अपेक्षा सर्वाधिक ऑक्सिजन (प्राणवायु) रहता है। इस पानी से स्नान करने के पश्चात व्यक्ति को अधिक सुखद अनुभव प्राप्त होता है। गंगा नदी का पानी हमारे शरीर में होनेवाली हानिकारक बॅक्टेरिया नष्ट करता है। गंगा नदी सर्वाधिक मोड लेते लेते बहती है। अतः उसका सर्वाधिक संपर्क वनस्पति, सूक्ष्म जंतु, विविध प्रकार की भूमि तथा ऑक्सिजन के साथ आता है। अतः गंगा नदी के पानी को संयुक्त राष्ट्रद्वारा सर्वोच्च स्तर प्राप्त हुआ है। गंगा नदी की विशेषता यह है कि, उसे अलग अलग स्थानों पर ३०० नदियां आकर मिलती हैं, फिर भी उसका स्वरूप अथवा गुणधर्म में परिवर्तन नहीं होता है ! वो सब कुछ अपने में समां कर आगे-आगे बहती रहती है। ऐसी गंगा नदी की रक्षा हमें करनी ही चाहिए !’’

अधिवक्ताओं के लिए ‘ब्राह्मतेज एवं क्षात्रतेज’ का होना आवश्यक ! – अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर

राष्ट्र एवं धर्म हेतु कार्य करते समय संख्यात्मकता को नहीं, तो अपनी धैर्यशीलता को महत्त्व है तथा वह साधना से प्राप्त होती है। ईश्वर ने हमें हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु चुना है। हिन्दू राष्ट्र के लिए कार्य करना, यह ईश्वर की सेवा है। अधिवक्ताओं के लिए ‘ब्राह्मतेज एवं क्षात्रतेज’ दोनों का होना आवश्यक है। उसके लिए अधिवक्ताओं ने साधना भी अधिक मात्रा में करने की आवश्यकता है !

आगामी तीव्र आपत्काल में सुरक्षा हेतु साधना करना आवश्यक ! – श्री. नागेश गाडे

‘साधना एवं सनातन प्रभात की आवश्यकता’ इस विषय पर संबोधित करते हुए श्री. नागेश गाडे ने कहा कि, ‘‘यज्ञ में कितनी आहुति डालनी है, इसकी अपेक्षा उसके पीछे होनेवाला भाव महत्त्वपूर्ण है। एक छोटीसी गिलहरी ने रामसेतु के कार्य में अपनी शक्ति के अनुसार कार्य कर केवल भाव के कारण श्रीराम कृपा संपादन की ! अतः धर्मकार्य करते समय यदि गिलहरी के अनुसार हम भाव रखेंगे, तो हम पर भी ईश्वर की कृपा होगी। आगामी कुछ वर्षों में तीव्र आपत्काल आएगा। उस समय ईश्वर केवल अपने भक्तों की ही रक्षा करेगा; इसलिए ईश्वर का भक्त होने के लिए साधना करना आवश्यक है !’’

तृतीय अधिवक्ता अधिवेशन में विविध विषयों पर किया गया मार्गदर्शन . . .

१. अधिवक्ता श्री. संजीव पुनाळेकर तथा अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने ‘सामाजिक दुष्प्रवृतियों के विरोध में अधिवक्ताओं का योगदान’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया।
२. अधिवक्ता श्री. अमृतेश एन.पी ने ‘न्याययंत्रणा में स्थित भ्रष्टाचार’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया।
३. अधिवक्ता श्री. नीलेश सांगोलकर ने ‘सुराज्य अभियान के अंतर्गत आयोजित उपक्रम, प्राप्त फलनिष्पत्ति तथा आगामी दिशा’ इस संदर्भ में जानकारी दी।
४. अधिवक्ता श्री. सुरेश कुलकर्णी ने ‘अधिवक्ता संघटन तथा हिन्दू विधीज्ञ परिषद की आगामी दिशा’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया।
५. अधिवक्ता श्री. संजीव पुनाळेकर तथा अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने ‘हिन्दू विधीज्ञ परिषदद्वारा न्यायालयों में प्रविष्ट की गई जनहित याचिका तथा प्राप्त फलनिष्पत्ति’ के संदर्भ में जानकारी दी।
६. प्रा. रामेश्वर मिश्र तथा प्रा. कुसुमलता केडिया ने ‘भारत का धर्म, भारत का संविधान’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया।
७. प्रा. कुसुमलता केडिया ने ‘वैधानिक दृष्टि से पूर्व भारत का इतिहास’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया।
८. कु. स्वाती गायकवाड तथा कु. वैष्णवी येळेगांवकर ने ‘स्वभावदोष तथा अहं निर्मूलन’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया।
क्षणिकाएं
१. इस अधिवेशन के लिए सनातन की सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की वंदनीय उपस्थिती रही।
२. हिन्दू जनजागृति समिति के केंद्रीय समन्वयक श्री. नागेश गाडे ने हिन्दू विधीज्ञ परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर को शाल देकर सम्मानित किया।
३. बेंगलुरु उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री. अमृतेश एन.पी. ने हिन्दू विधीज्ञ परिषद के राष्ट्रीय सचिव अधिवक्ता श्री. संजीव पुनाळेकर को सम्मानित किया।
४. इस अधिवेशन में अधिवक्ता श्री. अमृतेश एन.पी. ने वर्ष २०१८ की दिनदर्शिका का प्रकाशन किया। अधिवक्ता श्री. अमृतेश एन.पी.द्वारा यह दिनदर्शिका अधिवक्ता श्री. सुरेश कुलकर्णी के हाथों अधिवक्ता श्री. संजीव पुनाळेकर को भेंट देकर उन्हें सम्मानित किया गया।

अधिवक्ता अधिवेशन में ज्येष्ठ अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता का सम्मान


इस अधिवेशन में ज्येष्ठ अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता को हिन्दू विधीज्ञ परिषद के संस्थापक-सदस्य अधिवक्ता श्री. सुरेश कुलकर्णी के हाथों पुष्पहार अर्पण कर, साथ ही शाल, श्रीफळ तथा भेंटवस्तु देकर सम्मानित किया गया।
अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता का परिचय
अखिल हिन्दुओं की मानबिंदू पवित्र गंगा नदी की रक्षा हेतु अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता सर्वोच्च योगदान दे रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया है। गंगा नदी के संदर्भ में उन्होंने आजतक २० से अधिक जनहित याचिका न्यायालय में प्रविष्ट की हैं। साथ ही गंगा नदी के संदर्भ मे १५० से अधिक आदेश न्यायालय से प्राप्त किए हैं। गंगा नदी के संदर्भ में अधिवक्ता श्री. गुप्ता को अलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ‘अ‍ॅमिकस क्युरी’ (न्यायालय मित्र) के नाम से नियुक्त किया है। गंगा नदी के संदर्भ में केंद्र सरकारद्वारा ‘गंगा प्रोटेक्शन अ‍ॅण्ड रिझुवेनेशन अ‍ॅक्ट’ इस नाम का अधिनियम पारित किया गया है। इस अधिनियम के समिति के प्रमुखपद पर सरकार ने उनकी नियुक्ति की है !

सनातन आश्रम कल्पना से भी अधिक अच्छा है ! – अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता

अधिवक्ता श्री. अरुणकुमार गुप्ता ने रामनाथी के सनातन के आश्रम में ‘राष्ट्र एवं धर्म’ के संदर्भ में किए जानेवाले कार्य का परिचय करा लिया। आश्रम के संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते समय उन्होंने कहा कि, ‘आश्रम कल्पना से भी अधिक सुंदर है ! यहां की व्यवस्था अत्यंत अच्छी है। आश्रम आनंददायी है। अगले समय मैं मेरे परिवार के साथ आश्रम में आऊंगा। ईश्वर की कृपा से मुझे गंगामाता की सेवा करने की संधी प्राप्त हुई है। मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि, गुरुदेवजी ने इतनी सुंदर(सनातन) संस्था निर्माण की है !