Sunday, 7 January 2018

सरकार को संदेह है कि, गांव के मदरसों में रखे गए शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाडा किया गया है



मदरसे में जो शिक्षक भर रखे थे, उसमे से तमाम तो उसके पात्र थे ही नहीं. फिर किसे भर्ती किया था अखिलेश यादव ने ?

सरकार को संदेह है कि, गांव के मदरसों में रखे गए शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाडा किया गया है ! उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों में गडबड है। सरकार ने मदरसों में तैनात शिक्षकों की असलियत का पता लगाने की ठानी है ! जिसके चलते अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने आधुनिकीकरण योजना के तहत मदरसों में नियुक्त सभी शिक्षकों शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कर दी। इसी के साथ सरकार के कहने के बाद भी ऑनलाइन जानकारी नहीं देनेवाले कई सौ मदरसे इस बार अपनी परीक्षा नहीं करा सकेंगे।

दरअसल, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने आधुनिकीकरण योजना के तहत मदरसों में शिक्षकों को नियुक्त किया था। उनको वेतन के दौर पर मोटी राशि भी सरकार देती है। सरकार के पास लगातार शिकायत जा रही है कि मदरसों में रखे गए शिक्षकों की भर्ती में प्रबंधकों, अधिकारीयों और दलालों का गठजोड बनकर बडा फर्जीवाडा हुआ हैं। काफी शिक्षक ऐसे हैं जिनको सही से ऊर्दू पढना भी नहीं आता और उनके फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर भर्ती कर दिया गया। जिसके बाद पूरे सूबे में जांच शुरू हो गई हैं। आधुनिकीकरण योजना के तहत मदरसों में नियुक्त सभी शिक्षकों को उनके मूल शैक्षिक प्रमाण पत्रों के साथ बुलाया गया। शिक्षकों से उनके मूल शैक्षिक प्रमाण देख
और फोटो स्टेट प्रतियां ली गई। सत्यापित करने का काम किया गया। अब शिक्षकों के सभी प्रमाण पत्रों का मिलान शिक्षा विभाग से कराया जाएगा।
आधुनिकीकरण योजना के तहत मान्यता प्राप्त मदरसों की अभी तक की जांच में पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कई जिलों में बडे प्रमाण पर गडबडी मिली है। मेरठ में ही १५ मदरसों में गडबडी मिली हैं ! इन मदरसा संचालकों को नोटिस जारी कर दिए हैं। एक महीने में स्थिति सुधारने को कहा है। उसके बाद होनेवाले निरीक्षण में फिर गडबडी मिलने पर मदरसा संचालकों पर कार्रवाई होगी और मदरसों की मान्यता खत्म कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की तरफ से फर्जीवाडा रोकने के लिए सरकार ने सभी मदरसों को ऑनलाइन अपना डेटा लोड करने को कहा था। अब वेबसाइट पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं करनेवाले मदरसों में इस बार परीक्षा कराने पर रोक लगाई जा रही हैं।

दरअसल, आलिया (कक्षा ८ से ऊपर के) स्तर के मदरसों में से सूबे में ८३६ में अपना डाटा सरकार की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया हैं। वेस्ट यूपी के हर जिले से सरकार के आदेश की नाफरमानी करनेवाले काफी मदरसे हैं। इसलिए सरकार भी इन पर अब सख्त कदम उठा रही हैं। डेटा लोड नहीं करनेवाले कुल २६८२ मदरसों की मान्यता पर तलवार लटक गई है !दरअसल, मदरसा बोर्ड के वेब पोर्टल पर इस बार २६८२ मदरसों ने अपना विवारण (डेटा) अपलोड नहीं किया। बोर्ड ने आलिया स्तर से ८३६ मदरसों को परीक्षा फार्म भरने की इजाजात नहीं दी हैं। आलिया स्तर के मदरसों में मुंशी मौलवी, आमिल, कामिल, फाजिल की परीक्षा होती है !