Sunday, 28 January 2018

सभी अपनाएं ये गुण विदुर द्वारा एक बुद्धिमान पुरुष के स्वभाव और गुणों को व्यक्त करने वाले इन संकेतों को यदि आज का पुरुष भी अपना ले, तो उसे आज के फास्ट जमाने में भी सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

विदुर नीति: एक बुद्धिमान पुरुष की पहचान कराते हैं ये 12 संकेत
महाभारत ग्रंथ की बातें
महाभारत’ एक महान धार्मिक ग्रंथ है। कलियुग का मनुष्य इस ग्रंथ को करीब से जानकर, जीवन की कई बातें सीख सकता है। जीवन में सफलता कैसे पाएं, किस तरह से अपने दुश्मन की पहचान करें, आपके पास बैठा व्यक्ति आपका शुभचिंतक है या आपको हानि पहुंचाएगा, ऐसी कई बातों को जानने-पहचानने की सीख देता है महाभारत ग्रंथ।

महाभारत ग्रंथ की बातें 
यह सीख हमें इस ग्रंथ में उल्लिखित कथाओं के माध्यम से प्राप्त होती है। महाभारत की हर कहानी में एक खास संदेश है, जो जीवन के किसी ना किसी पहलू को समझा जाता है। लेकिन इन कहानियों का हिस्सा रहे पात्र भी हमें कुछ संदेश देते हैं।
महाभारत ग्रंथ की कहानी
महाभारत ग्रंथ कई सारे पात्रों को मिलाकर बना है। भीष्म पितामह, सत्यवती, राजा पाण्डु, धृतराष्ट्र, पांच पाण्डव, 100 कौरव, द्रौपदी, श्रीकृष्ण, ऐसे ही कई पात्र हैं इस महान ग्रंथ में। सभी जानते हैं कि महाभारत की कहानी गंगा पुत्र देवव्रत (भीष्म) की ‘विवाह ना करने’ की प्रतिज्ञा से हुई, जिसके बाद ही राजा शांतनु का विवाह सत्यवती से हुआ।

महाभारत ग्रंथ की कहानी 
विवाह के बाद सत्यवती के चित्रांगद और विचित्रवीर्य नामक दो पुत्र हुए। दोनों पुत्रों ने बाल्यकाल में ही अपने पिता को खो दिया, जिसके कारणवश भीष्म ने ही उनका पालन-पोषण किया। बड़े होने पर भीष्म द्वारा चित्रांगद को राज्य की गद्दी पर बैठाया गया, किंतु एक युद्ध में मारे जाने के बाद वह गद्दी विचित्रवीर्य को सौंपी गई।

महाभारत ग्रंथ की कहानी
विचित्रवीर्य का विवाह दो कन्याओं अम्बिका और अम्बालिका से किया गया, किंतु दोनों ही संतान प्राप्ति हुए बिना क्षय रोग से पीड़ित होकर मृत्यु को प्राप्त हुए। अब राज्य का अगला दावेदार कौन होगा, इसका हल निकालने के लिए महारानी सत्यवती ने ‘नियोग प्रथा’ का सहारा लिया।
महाभारत ग्रंथ की कहानी 
जिसकी मदद से धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर का जन्म हुआ। विदुर का जन्म एक दासी द्वारा हुआ, इसलिए उन्हें राज्य की गद्दी का हक़ मिलना नामुमकिन माना गया। किंतु अपनी सूझबूझ के कारण वे राजा के प्रधानमंत्री जरूर बन गए।
विदुर का जन्म
कहा जाता है कि तीनों पुत्रों में से विदुर ही सबसे अधिक बुद्धिमान थे। उनमें हर तरह का गुण था। कहते हैं कि पांडव-कौरवों के बीच छिड़ने वाले युद्ध के संकेत वर्षों पहले ही विदुर द्वारा दे दिए गए थे। उन्होंने कुछ ऐसे संकेतों की बात की थी, जो राज्य के बुरे काल के बारे में बताते थे। इन्हीं संकेतों को समाहित कर ‘विदुर नीति’ ग्रंथ का जन्म हुआ।

विदुर नीति
इस महान ग्रंथ में विदुर द्वारा जीवन, मृत्यु, खुशी, दुख, युद्ध, इत्यादि विषयों से जुड़े कुछ संकेत प्रस्तुत किए गए हैं। कहते हैं इन सभी विषयों की व्याख्या विदुर द्वारा धृतराष्ट्र को की गई थी।
विदुर नीति
विदुर ने धृतराष्ट्र को एक बुद्धिमान और सूझबूझ वाले ‘पुरुष’ के बारे में 11 संकेत दिए। एक बुद्धिमान पुरुष में क्या गुण होते हैं, उसका स्वभाव और वह ऐसा क्या करता है जो उसे अन्य पुरुषों से अलग बनाता है, इसके कुछ संकेत विदुर द्वारा धृतराष्ट्र को दिए गए थे।

विदुर नीति के अनुसार बुद्धिमान व्यक्ति 
विदुर के अनुसार वह पुरुष जिसमें खास प्रकार के 11 गुण होते हैं, वही होता है बुद्धिमान पुरुष। ऐसा पुरुष ही राज्य का कार्यभार संभालने के लायक होता है। ऐसा पुरुष ही सही राजा कहलाता है।
विदुर नीति के अनुसार बुद्धिमान व्यक्ति 11
विदुर द्वारा दिए गए ये 11 संकेत आज के कलियुग पर भी लागू होते हैं। यदि आज का पुरुष भी विदुर द्वारा बताए गए इन गुणों को अपना ले, तो वह भी समाज में उत्तम पद ग्रहण कर सकता है। उसे सफल बनने से कोई नहीं रोक सकता।
1 गुण
विदुर के अनुसार वह पहली आदत या गुण जो एक पुरुष को बुद्धिमान बनाती है, वह है उसमें ‘मेहनती होने का गुण’। यदि व्यक्ति मेहनती है तभी जीवन में सफल बन सकता है। अपने कार्य के प्रति ढीलापन दिखाने वाला व्यक्ति जीवन में कभी सफल नहीं हो सकता।
2 गुण
बुद्धिमानी का दूसरा गुण जो विदुर द्वारा बताया गया वह है पुरुष का अपने आने वाले भविष्य के प्रति निष्ठावान होना। धूप, बारिश, तूफान कुछ भी आए, लेकिन अगर व्यक्ति का काम इन कारणों से नहीं रुक रहा है तो वही है एक सफल इंसान।
3 गुण
हर बात को झट से समझ जाना और दूसरों के समझने से पहले उसका प्रयोग भी कर लेना, यह एक बुद्धिमान व्यक्ति की तीसरी निशानी है।
4 गुण
जिस व्यक्ति में अपने कार्य के प्रति आदर हो, लेकिन उसे लेकर कोई घमंड ना हो वही है अच्छा और बुद्धिमान इंसान। ऐसे व्यक्ति को अगर उसके कार्य के लिए सराहना भी मिले, तब भी वह घमंड नहीं करता।
5 गुण
वह व्यक्ति जो अच्छे कर्म करता है, किसी का बुरा नहीं सोचता, पाप नहीं करता, विदुर के अनुसार वही है बुद्धिमान पुरुष।
6 गुण
अपनी बुद्धि के बल पर जो शिक्षा प्राप्त करे, अपनी शिक्षा के बल पर जो बुद्धिमान बने वही है बुद्धिमान पुरुष। जो अपनों से बड़ों का आदर और छोटों का सम्मान करे, वही है बुद्धिमान पुरुष।
7 गुण
जीवन में खुशी, ग़म, सफलता, असफलता, सभी लगा रहता है, लेकिन जो व्यक्ति हर परिस्थिति में अपने मार्ग पर डटा रहे, वही है बुद्धिमान पुरुष।
8 गुण
जो जीत के लिए संघर्ष करे लेकिन हार को भी स्वीकार करे, वह है बुद्धिमान पुरुष। जीवन में हर किसी को हर कुछ नहीं मिलता, इसलिए नामुमकिन चीजों के पीछे ना भागने वाला व्यक्ति ही बुद्धिमान कहलाता है।
9 गुण
ऐसा व्यक्ति जो अपने कार्य करना अच्छे-से जानता है। कार्य के दौरान किसी को नीचा नहीं दिखाता, वही है बुद्धिमान इंसान।
10 गुण
कार्य चाहे कैसा भी हो, समाज से संबंधित हो, धर्म संबंधी हो या अपने परिवार से जुड़ा हो। हर परिस्थिति में अपने कार्य को जिम्मेदारी पूर्वक करने वाला इंसान ही बुद्धिमान है।
11 गुण
वह पुरुष जो अपनी बात को सबके सामने व्यक्त करना जानता हो, विषय चाहे कैसा भी हो, खुद के विचार प्रकट करना जानता हो, वही बुद्धिमान है।
12 गुण
किसी भी कार्य को आरंभ करने से पहले उसपर सोच-विचार करना और उसके हर पहलू को समझकर ही आगे बढ़ने वाला पुरुष बुद्धिमान है। बिना सोचे समझे कार्य करके हानि को पाने वाला पुरुष मूर्ख कहलाता है।

सभी अपनाएं ये गुण
विदुर द्वारा एक बुद्धिमान पुरुष के स्वभाव और गुणों को व्यक्त करने वाले इन संकेतों को यदि आज का पुरुष भी अपना ले, तो उसे आज के फास्ट जमाने में भी सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

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