Monday, 29 January 2018

सुदर्शन न्यूज़ की विशेष रूप से चलाई गयी खबर के बाद जनमानस की भारी मांग के चलते भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में उस जगह पर खुदाई करवाने को सहमत हो गया है

सुदर्शन न्यूज़ की खबर का सार्थक असर . बागपत स्थित महाभारत कालीन लाक्षागृह की जांच करेगा ASI
जिस खबर को सुदर्शन न्यूज़ ने बेहद प्रमुखता से उठाया और चलाया भी आख़िरकार उस पर अब सरकार की भी नीद खुली है और बेहद महत्वपूर्ण और पौराणिक स्थल जो उपेक्षा का शिकार एक लम्बे समय से था , पर अब जांच कर के उसकी असलियत दुनिया के आगे लाएगी जिस से समाज अपने गौरवशाली पूर्वजों के उस पावन इतिहास को सच्चे रूपों में  जान सके जो हमारी अमूल्य धरोहर ही और नकली व् झोलाछाप इतिहासकारों की साजिश के चलते लुप्त होने की कगार पर आ चुकी थी . विदित हो कि सुदर्शन न्यूज़ की विशेष रूप से चलाई गयी खबर के बाद जनमानस की भारी मांग के चलते भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में उस जगह पर खुदाई करवाने को सहमत हो गया है जहां के बारे में स्थानीय इतिहासकारों और लोगों का मानना है कि यहां पर महाभारतयुगीन 'लक्षगृह' के अवशेष मौजूद हैं. इस 'लक्षगृह' से बचने के लिए पांडवों ने एक सुरंग का प्रयोग किया था. एएसआई खुदाई के लिए अब वहां कैंप लगाकर खुदाई शुरू करने जा रहा है. भारत की सांस्कृतिक विरासत के के संयोजन में सुदर्शन के अथक प्रयासों को मिला ये एक बड़ा मुकाम है .एएसआई के 2 अथॉरिटीज, नई दिल्ली स्थित रेड फोर्ट के इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्कियोलॉजी और एएसआई की खुदाई टीम बागपत में एक कैंप लगाने जा रही है. एएसआई (खुदाई) के निदेशक जीतेंद्र नाथ ने कहा, "2 एएसआई अथॉरिटीज संयुक्त रूप से खुदाई का काम करेंगे और उन्हें पूरे मामले में अध्ययन करने का लाइसेंस भी दिया गया है.खुदाई  का कार्य 3 महीने तक चल सकता है, और उसकी प्रगति के आधार पर यह समय बढ़ाया जा सकता है. इंस्टीट्यूट के छात्र भी पूरी प्रक्रिया में शामिल रहेंगे. 2014 में बागपत के चंदायन गांव में तांबे से बना क्राउन पहने एक मानवीय कंकाल की खोज करने वाले बारुत स्थित शहजाद राय रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक अमित राय का का कहना है कि क्षेत्र में महाभारत युगीन की कुछ पेंटेड चीजें मिली हैं. जो चीजें मिली हैं वो 4,000 से 4,500 साल पुरानी हैं."