Monday, 29 January 2018

सिद्धारमैया सरकार अल्पसंख्यकों, किसानों और प्रो-कन्नड़ समर्थकों के खिलाफ दंगों के दौरान दायर पुराने आपराधिक केस वापस लेने की तैयारी कर रही है.

अल्पसंख्यकों-किसानों से केस वापस लेंगे सिद्धारमैया!


कर्नाटक में चुनावी बिसात बिछ चुकी है. कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है. अब बीजेपी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के. सिद्धारमैया को अल्पसंख्यकों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने को मुद्दा बनाया है. बीजेपी ने सीधे तौर पर सीएम सिद्धारमैया को हिंदू विरोधी बताया है.
दरअसल, कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार अल्पसंख्यकों, किसानों और प्रो-कन्नड़ समर्थकों के खिलाफ दंगों के दौरान दायर पुराने आपराधिक केस वापस लेने की तैयारी कर रही है.
कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने इस संबंध में पुलिस को सर्कुलर जारी कर जानकारी मांगी है. सर्कुलर में ऐसे केस की डिटेल्स मांगी गई है. गुरुवार को भेजे गए इस सर्कुलर से पहले पिछले दो महीने में सिद्धारमैया सरकार तीन बार ऐसा सर्कुलर पुलिस विभाग को भेज चुकी है.
कांग्रेस सरकार के इस कदम को कर्नाटक बीजेपी ने बड़ा मुद्दा बनाया है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया सरकार दंगा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज केस वापस ले रही है. बीजेपी ने सिद्धारमैया पर हिंदुओं के खिलाफ काम करने का भी आरोप लगाया.
बीजेपी ने आरोप लगाया है कि पिछले पांच साल में अल्पसंख्यक समुदाय के जो रेडिकल लोग पिछले 5 सालों में सांप्रदायिक फसाद में शामिल रहे, कांग्रेस उनके केस वापस ले रही है. पार्टी ने ये भी दावा किया कि सिद्धारमैया ने 2015 में पीएफआई के खिलाफ दर्ज 175 से ज्यादा केस वापस कराए हैं.
हालांकि, सीएम सिद्धारमैया ने सफाई देते हुए कहा कि दंगों के दौरान दर्ज हुए ऐसे केस सिर्फ अल्पसंख्यकों के नहीं, बल्कि किसानों और कन्नड़ समर्थकों के केस वापसी पर भी जानकारी मांगी गई है.
इससे पहले 25 जनवरी को मैसूर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य की सिद्धारमैया सरकार को भ्रष्ट और दमनकारी बताया. शाह ने यहां पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर आपातकाल की तरह ही व्यवहार करने का आरोप लगाया.
शाह ने बीजेपी-आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि चार साल में बीजेपी और आरएसएस के 20 से अधिक कार्यकर्ता मारे गए हैं. कर्नाटक ने इस संबंध में एक वीडियो भी जारी किया है और राहुल गांधी से कर्नाटक आने के पहले हत्याओं पर जवाब मांगा है.
बता दें कि कर्नाटक में इसी साल मई में चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे में दोनों पार्टियां बयानबाजी के साथ हर मुमकिन हथकंडे अपनाने में लगी हैं. दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के मुख्य नेता भी राज्य के दौरे कर रहे हैं. अगले महीने की शुरुआत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर्नाटक में चुनावी हुंकार भरने जा रहे हैं.