Friday, 12 January 2018

ममता बनर्जी का आरोप - न्यायपालिका में केंद्र के दखल से देश का लोकतंत्र खतरे में

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा, कहा- देश का लोकतंत्र खतरे में है.

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने और सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने की खबर पर राजनीति होने लगी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. ममता ने कई ट्वीट करके कहा कि देश का लोकतंत्र खतरे में है. ममता ने लिखा, "हम आज सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के उठाए गए सवाल से दुखी हैं. सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाए गए सवालों से एक नागरिक के तौर पर मैं बहुत दुखी हूं. न्यायपालिका और मीडिया लोकतंत्र के स्तंभ हैं. केंद्र सरकार का न्यायपालिका में बहुत ज्यादा दखल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है." उधर, बीजेपी ने कहा है कि ममता बनर्जी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है. बीजेपी ने उन्हें लोकतंत्र की दुश्मन करार दिया है.
कांग्रेस ने भी कहा लोकतंत्र खतरे में 
उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशें द्वारा खुलेआम शीर्ष न्यायालय में स्थिति ठीक नहीं बताये जाने के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार (12 जनवरी) को कहा कि ‘लोकतंत्र खतरे में है.’ कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया, ‘‘हम यह सुनकर बहुत चिंतित हैं कि उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों ने शीर्ष न्यायालय के कामकाज पर चिंता जतायी है. लोकतंत्र खतरे में है.’’ एक अप्रत्याशित कदम में उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन बुलवाया और कि उच्चतम न्यायालय में स्थिति ठीक नहीं है तथा कई ऐसी चीजें हुईं जिनकी जरूरत नहीं थी. चारों न्यायाधीशों ने कहा कि जब तक संस्थानों ने कहा कि जब तक संस्थानों का संरक्षण नहीं होता, देश में लोकतंत्र नहीं चल पाएगा. उधर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज शाम पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं.


सरकार नहीं देखी मामले में दखल
इसी बीच, सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने अप्रत्याशित संवाददाता सम्मेलन में जो मुद्दे उठाए हैं, वे न्यायपालिका का ‘‘आंतरिक’’ मामला हैं. सूत्रों ने इशारा किया कि इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप करने की संभावना बहुत कम है. सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सरकार कुछ नहीं कह सकती और वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहती. उन्होंने कहा कि यह न्यायपालिका का आंतरिक मामला है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत को इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए क्योंकि लोगों का न्यायपालिका में भरोसा दांव पर है.
आज सुबह की थी चार जजों ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस
न्यायालय ने चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार (12 जनवरी) को एक संवाददाता सम्मेलन किया और कहा कि शीर्ष अदालत में हालात ‘‘सही नहीं हैं’’ और कई ऐसी बातें हैं जो ‘‘अपेक्षा से कहीं कम’’ थीं. प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘‘... कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई चीजें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं कम थीं.’’ संवादाता सम्मेलन में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के अलावा न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ मौजूद थे. कानून मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में बातचीत के लिए अभी तक मुलाकात नहीं की है.