Tuesday, 13 February 2018

यदि आपसे कोई यह सवाल करे तो आप फटाक से जवाब में कहेंगे कि ‘2 पुत्र थे’

भगवान शिव के 2 नहीं, 6 पुत्र थे!!
शिव जी की संतान
भगवान शिव के कितने पुत्र थे? यदि आपसे कोई यह सवाल करे तो आप फटाक से जवाब में कहेंगे कि ‘2 पुत्र थे’। एक का नाम गणेश और दूसरे पुत्र हैं कार्तिकेय। लेकिन अगर हम ये कहें कि भगवान शिव के 2 नहीं 6 पुत्र थे तो क्या आप यकीन करेंगे?
शिव जी की संतान
शायद नहीं... लेकिन सत्य यही है कि शिवजी के 2 नहीं, बल्कि 6 पुत्र थे। ये बात अलग है कि अन्य 4 पुत्रों के बारे में कभी जाना नहीं गया, लेकिन अगर पौराणिक घटनाओं को करीब से जाना जाए, तो शिवजी के अन्य 4 पुत्रों का उल्लेख मिल जाता है।

शिव जी की संतान
तो क्या ये पुत्र गणेश जी और कार्तिकेय जी से बड़े थे? या फिर उम्र में छोटे थे? इनका जन्म कब हुआ और कहां हुआ? क्या शिवजी ने इन पुत्रों को कभी अपनाया था? इन सभी सवालों के जवाब हम यहां प्रस्तुत करने जा रहे हैं। भगवान शिव
हिन्दू धर्म में आप त्रिमूर्ति का उल्लेख पा सकते हैं – ब्रह्मा, विष्णु, महेश। एक ने सृष्टि को रचा है, तो दूसरे देव उसका पालन कर रहे हैं। लेकिन जब कोई बड़ा संकट आए या महापाप फैल जाए, तो सृष्टि का सर्वनाश करने के लिए तीसरे देव ‘महेश’ हैं।
भगवान शिव
शिवजी को हिन्दू मान्यताओं में “रौद्र” बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि उन्हें गुस्सा दिलाने वाले का भविष्य संकट में पड़ जाता है। लेकिन अगर दिल से उनकी आराधना की जाए, तो भोले भंडारी जल्द से जल्द मनोकामना पूरी करते हैं।
पहला विवाह
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का विवाह दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। लेकिन सती ने आग में कूद कर स्वयं को भस्म कर लिया था। सती की मृत्यु के बाद सती ने अपना दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय के यहां उमा के रूप में लिया था।
दूसरा विवाह
कठोर तपस्या और व्रत का पालन करने के बाद पार्वती को भगवान शिव वर के रूप में प्राप्त हुए थे। शिव पार्वती के विवाह के बाद उनका गृहस्थ जीवन शुरू हुआ और उन्हें पुत्र प्राप्त हुए।
कार्तिकेय
यह सभी जानते हैं कि माता पार्वती से शिव जी को दो पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। पहले थे कार्तिकेय, जिन्हें भगवान कार्तिकेय के नाम से पुकारा जाता है।कार्तिकेय
कहते हैं कि सती की मृत्यु के बाद भगवान् शिव दुखी हो कर लम्बी तपस्या में बैठ गए थे, जिससे विश्व में दैत्यों का अत्याचार बढ़ गया था। सभी देवता इससे परेशान होकर भगवान् ब्रह्मा के पास उपाय मांगने गए। उसी वक़्त ब्रह्म देव ने कहा था कि शिव और पार्वती से जन्मा पुत्र इस समस्या का समाधान करेगा और शिव पार्वती के विवाह के बाद कार्तिकेय का जन्म हुआ था।
गणेश
भगवान् गणेश के जन्म के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन इन्हीं में से एक कहानी के अनुसार माता पार्वती स्नान करने के लिए जाने लगी थीं कि उन्होंने देखा कि बाहर पहरा देने के लिए कोई नहीं है। तभी उन्होंने उबटन और चन्दन के मिश्रण से गणेश की उत्पत्ति की और उसके बाद स्नान करने गयी थीं।गणेश
माता पार्वती ने गणेश को यह आदेश दिया था कि स्नान करते तक वह किसी को घर में प्रवेश न करने दें। कुछ देर बाद भगवान शिव वहां पहुंचे, जिन्हें गणेश ने घर के भीतर जाने से रोक दिया। इस बात से क्रोधित भगवान शिव ने गणेश का सर धड़ से अलग कर दिया।गणेशजब पार्वती जी ने यह दृश्य देखा तो वे बेहद नाराज़ हुईं। माता पार्वती के गुस्से को शांत करने के लिए भगवान शिव ने कटे धड़ की जगह, हाथी के बच्चे का सर लगा कर गणेश को पुनःजीवित किया।
अयप्पा
ये हैं शिवजी के तीसरे पुत्र, जिन्हें दक्षिण भारत में पूजा जाता है। इन्हें तमिलनाडु में भगवान अयप्पा या फिर भगवान अय्यनर के नाम से भी पुकारा जाता है। ये शिवजी और मोहिनी के पुत्र थे, मोहिनी भगवान विष्णु का ही स्त्री अवतार थीं। पुराणों के अनुसार अयप्पा ने भगवान परशुराम से शस्त्र विद्या प्राप्त की थी, वे एक शक्तिशाली योद्धा थे।
अंधक
शिवजी के अंधक पुत्र का जन्म कैसे हुआ, इसका पुराणों में कोई पुख्ता उल्लेख नहीं है। कहते हैं हिरनयक्ष, जो कि संतान सुख से वंचित था उसकी इच्छा पूर्ण करने के लिए शिवजी यह पुत्र वरदान में दिया था।
अंधक
परंतु वह पुत्र देख नहीं सकता था, इसलिए उसका नाम अंधक रखा गया। कहते हैं स्वयं शिवजी ने ही अंधक का संहार किया था, क्योंकि उसने माता पार्वती को अपमानित करने जैसा पाप किया था।
भौमा
शिवजी के ‘पसीने’ से उतपन्न हुआ था यह पुत्र। एक पौराणिक कथा के अनुसार कठोर तपस्या में लीन शिवजी के पसीने का एक कतरा भूमि देवी पर जाकर गिरा। उस समय शिव जी तपस्या में लीन थे, इसलिए भूमि देवी ने स्वयं ही इस पुत्र के पालन-पोषण की जिम्मेदारी ली।
भौमा
लेकिन कुछ समय के पश्चात जब शिवजी को यह ज्ञात हुआ कि यह उन्हीं का पुत्र है, तो भूमि देवी को सम्मान देते हुए उन्होंने अपने पुत्र का नाम ‘भौमा’ ही रखा। पुराणों में भगवान भौमा के नाम का उल्लेख मिलता है, जिनका रंग-रूप लाल था और उनके चार हाथ थे।
खुजा
पौराणिक वर्णन के अनुसार खुजा धरती से तेज किरणों की तरह निकले थे और सीधा आकाश की ओर निकल गए थे।
अशोक सुंदरी
शिव जी के 6 पुत्रों के अलावा, एक पुत्री भी थी। इस पुत्री का नाम अशोक सुंदरी था। कहते हैं माता पार्वती ने अपने अकेलेपन को खत्म करने के लिए ही इस पुत्री का निर्माण किया था।

अशोक सुंदरी

जी हां... अशोक सुंदरी को माता पार्वती ने एक पेड़ से निर्मित किया था। इन्होंने पार्वती जी का ‘शोक’ समाप्त किया था, इसीलिए उन्होंने अपनी पुत्री का नाम अशोक सुंदरी रखा।