Saturday, 17 February 2018

इस घोटाले की नौबत ही नहीं आती. इस घोटाले में 7 बड़ी गलतियां सामने दिखी हैं.

PNB घोटाला: बैंकों की वे 7 बड़ी गलतियां जो पकड़ लेते तो बच जाते हजारों करोड़


पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले ने पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस नीरव मोदी फ्रॉड का जिम्मा एक दूसरे पर फोड़ने पर टिके हुए हैं. लेकिन इसके बावजूद जिन बातों पर ध्यान नहीं जा रहा है, वह हैं कुछ सामान्य गलतियां जो इस फ्रॉड के दौरान हुईं. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाता तो शायद इस घोटाले की नौबत ही नहीं आती. इस घोटाले में 7 बड़ी गलतियां सामने दिखी हैं.
1. जब लेटर ऑफ अंडरटेकिंग को जारी किया जाता है, तो हमेशा ही उस बैंक को भेजा जाता है जो उस प्रक्रिया की भूमिका में प्रमुख है. इस केस में 2010 से लगातार कई बार LoU जारी किए गए थे, लेकिन सवाल यह है कि हर बार इनको विदेशी ब्रांच से भी मंजूरी कौन दे रहा था.
2. LoU जारी होने के बाद दो बैंकों के बीच में संधि की प्रक्रिया होती है जो लोन देने की प्रक्रिया की जांच करती है. सवाल है कि क्या इस केस में इस प्रकार की कोई प्रक्रिया का पालन किया गया था. क्योंकि अगर किया जाता तो नीरव मोदी के सभी बैंक अकाउंट्स और पिछले रिकॉर्ड की जांच होती.
3. अगर लोन चुकाने में तय समय से 2 साल से अधिक का समय बीत जाता है, तो बैंक की तरफ से ऑडिट किया जाता है. ऐसे में क्या किसी भी बैंक ऑडिटर ने इस प्रकार की चिंता की तरफ ध्यान नहीं दिया.
4. जब भी LoU जारी होता है, तो वह लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरता है. यानी जूनियर लेवल से लेकर बड़े लेवल तक प्रक्रिया की जांच होती है. लेकिन इस केस में बार-बार छोटे लेवल के अधिकारियों का नाम आ रहा है, ऐसे में क्या इस प्रक्रिया पालन भी नहीं हो पाया.
5. एलओयू के बाद बैंक खातों की ब्रांच और हेड ऑफिस लेवल पर इंटरनल जांच लगातार जारी रहती है. इसी प्रकार की जांच आरबीआई लेवल पर भी होती है. अगर इस मामले में लगातार गड़बड़ी दिखाई दे रही थी, तो क्या किसी भी लेवल की जांच में ऐसा नहीं पाया गया.
6. चीफ विजिलेंस ऑफिसर जो भी जांच करता है वह बैंक के एमडी को नहीं बल्कि सीधा चीफ विजिलेंस कमिश्नर को रिपोर्ट करता है. अगर कोई गड़बड़ी होती है तो वो सीधा चीफ विजिलेंस कमिश्नर की नज़र में आती है. लेकिन अगर ये घोटाला 7 साल से चल रहा था, तो क्या किसी भी अफसर ने कोई गड़बड़ी महसूस ही नहीं की.
punjab an हर बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में एक आरबीआई का अफसर जरूर शामिल रहता है. ऐसा इसलिए किया जाता है कि बैंक की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके. लेकिन लगता है कि इस केस में ऐसा नहीं हुआ है, ना तो पीएनबी और ना ही आरबीआई के लेवल पर किसी को इस घोटाले की भनक पड़ी.