Wednesday, 28 February 2018

पूज्य कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी का 83 वर्ष की आयु में आज सुबह देहावसान हो गया है

कांची कामकोटि के परमपूज्य शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी ..अंतिम सांस तक लड़े विधर्म के प्रचारकों से
हिंदुओं में सबसे पूज्य कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी का 83 वर्ष की आयु में आज सुबह देहावसान हो गया है. जगद्गुरु के निधन की खबर के बाद हिन्दू समाज में शोक की लहर दौड़ गयी है. सांस लेने परेशानी होने के कारण जगद्गुरु को कांची के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां आज  बुधवार की सुबह वह देवलोकवासी हो गए. जगद्गुरु शंकराचार्य को सनातन हिन्दू धर्म में सबसे पूज्य माना जाता है। जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को हुआ था तथा 22 मार्च1954 में वह कांची मठ के 69वें शंकराचार्य बने थे.जगद्गुरु शंकराचार्य के पावन सान्निध्य में कांची मठ ने धर्म, मानवत तथा समाजसेवा के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण कार्य किये हैं. जयेंद्र सरस्वती जी ने अटल बिहारी बाजपेयी जी की सरकार के समय राम मंदिर आंदोलन का हल निकालने में भी अपनी तरफ से काफी प्रयास किया था.

हिंदुओं के धर्मगुरु जगद्गुरु शंकरचार्य जयेंद्र सरस्वती जी दक्षिण भारत में एक वो नाम थे जिन्होंने ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ कार्य किया. एक तरफ जहां दक्षिण भारत में ईसाई मिशनरियां लोगों का धर्मांतरण करा रही रहीं थी वहीं पूज्य शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी इन मिशनरियों के खिलाफ सनातन धर्म की रक्षार्थ संघर्ष रहे थे तथा धर्मांतरण के विरोध में दीवार बनकर खड़े हो गए. इसी कारण ईसाई मिशनरियां अपने मिशन में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाईं. जिसके बाद एक सोची समझी साजिश के तहत हत्या के झूठे आरोप मेंमें तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के आदेश पर 11 नवम्बर 2004 को दीपावली पूर्व सन्ध्या को त्रिकाल सन्ध्या करते समय गिरफ्तार किया गया था. उस समय जगद्गुरु ने कहा था कि अगर मुझे कुछ हुआ तो पूरा देश हिल उठेगा लेकिन मैं एक संत हूँ, उन्होंने हिंदुओं से शांति बनाए रखने की अपील की तथा पुलिस के साथ अदालत में पेश हुए जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. बाद में अदालत ने पूज्य जगद्गुरु को आरोप मुक्त कर त्रिकाल सन्ध्या करते समय गिरफ्तार किया गया था. उस समय जगद्गुरु ने कहा था कि अगर मुझे कुछ हुआ तो पूरा देश हिल उठेगा लेकिन मैं एक संत हूँ, उन्होंने हिंदुओं से शांति बनाए रखने की अपील की तथा पुलिस के साथ अदालत में पेश हुए जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. बाद में अदालत ने पूज्य जगद्गुरु को आरोप मुक्त कर