Saturday, 3 February 2018

कुर्म पुराण में एक श्लोक का उल्लेख है: नाभिप्रसारयेद् देवं ब्राह्मणान् गामथापि वा। वाय्वग्निगुरुविप्रान् वा सूर्यं वा शशिनं प्रति।।

इन 7 की तरफ नहीं करने चाहिए पांव, बनेंगे पाप के भागी

धार्मिक स्थान

बचपन से हम सुनते आ रहे हैं कि हमें मंदिर या अन्य धार्मिक स्थानों की तरफ पांव नहीं करने चाहिए। भगवान की मूर्ति या फिर अन्य पवित्र वस्तुओं की ओर पांव करना उनका अपमान होता है इसलिए हमें ऐसा करने से बचना चाहिए।

नकारात्मक प्रभाव

लेकिन इसके अलावा भी बहुत सी बहुत कुछ ऐसा है जिनका जिक्र कुर्म पुराण में किया गया है। कुर्म पुराण के भीतर 8 ऐसे वस्तुओं का उल्लेख है, जिनकी ओर पांव करना व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

श्लोक

कुर्म पुराण में एक श्लोक का उल्लेख है: नाभिप्रसारयेद् देवं ब्राह्मणान् गामथापि वा। वाय्वग्निगुरुविप्रान् वा सूर्यं वा शशिनं प्रति।। इस श्लोक का अर्थ है कि व्यक्ति को देवता, ब्राह्मण, गाय, अग्नि, गुरु, विप्र, सूर्य, चंद्र की तरफ पांव नहीं करने चाहिए। लेकिन ऐसा क्यों? चलिए जानते हैं।

देवता

हर स्थिति में देवता पूजनीय हैं और इनकी ओर पांव करना अपमान माना जाएगा। जातक को कभी भी उस स्थान की तरफ पांव नहीं करने चाहिए जहां इनकी मूर्ति स्थापित हो।

ब्राह्मण

ऋगवेद के अनुसार ब्राह्मणों की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मुख से हुई है, इसलिए ब्राह्मण की ओर पांव करना उनका और स्वयं भगवान विष्णु का अपमान है।

गाय

गाय के भीतर सभी देवताओं का वास है, हिन्दू धर्म के सभी देवता गाय में वास करते हैं, इसलिए उनकी ओर पांव करना समस्त देवताओं का अपमान माना जाता है।


अग्नि

अग्नि को देवताओं का मुख स्वरूप माना गया है, जहां से अग्नि प्रज्वलित होती है वहां कभी पांव करके नहीं बैठना चाहिए।

विप्र

वेदों की पढ़ाई करने वाले ब्राह्मण बालकों को विप्र कहा जाता है। कुर्म पुराण के अनुसार जो लोग इनकी ओर पांव करते हैं उन्हें पाप का भागी बनना पड़ता है, इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए।

सूर्य

सूर्य सिर्फ पंचदेवताओं में से एक ही नहीं, ऊर्जा और अग्नि का स्त्रोत भी हैं। हिन्दू धर्म में कोई भी पूजा-पाठ हो, सूर्य देव की अराधना अवश्य की जाती है। इसलिए उनकी ओर पांव करना पापकर्म माना जाता है।

चंद्रमा

चंद्रमा को प्रत्यक्ष देवता महा गया है, वह वनस्पति के स्वामी हैं। इसलिए उनकी ओर कभी बेहे पांव नहीं करने चाहिए।