Monday, 5 February 2018

मोदी सरकार के असल दुश्मन कौन है ...

भाजपा को जितना खतरा खान ग्रेस या अन्य दल दल से नहीं उतना इन महान ' न्यायप्रिय हिन्दुत्व वादियों ' से है .ये अपने आप को सर्वोत्कृष्ट हिन्दुत्व वादी समझते हैं ,

याद कीजिए कुछ आरोप और शब्द -- ' जुमले वाली सरकार , सूटबूट की सरकार , साम्प्रदायिक सरकार , आर एस एस का हाथ , गरीब ,दलित , आदिवासी , अल्पसंख्यक , महिला , असहिष्णुता , भगवा आतंक , भगवाकरण ' क्या ये सब वास्तव में देश में हाहाकार उत्पन्न करते हैं , प्रत्यक्षतः तो नहीं पर अवचेतन में जो नकारात्मकता उत्पन्न होती है वह हिन्दुओं के सर्वनाश के लिए काफ़ी है .
हो सकता है हो भी पर ये महाशय यह नहीं समझ पा रहे हैं कि प्रतिबद्ध मतदाता बहुत कम होते हैं , आस पास के वातावरण से प्रभावित हो कर अपना मन बदल लेने वाले मतदाताओं का वर्ग काफ़ी बड़ा होता है , यह समूह अपनी बुद्धि का प्रयोग कम करता है और तात्कालिक वातावरण से प्रभावित हो कर वोट करता है , छोटे छोटे मुद्दे जिन का जन जीवन पर कोई असर नहीं होता को भी बड़ा और ज्वलंत बना कर खान ग्रेस और अन्य दलदल अब तक ऐश मनाते आए हैं .
जैसे खान ग्रेसी , बसपाई , आपिए , तृणमूलिए या अन्य दलदलिए वैसे ही आप भी हैं आप भी प्रत्यक्ष नहीं तो परोक्ष रूप से हिन्दू द्रोही ही हैं , मत मानिए खुद को हिन्दू द्रोही , मान लीजिए खुद को कट्टर राष्ट्रवादी .पर आप अपरिपक्व मानसिकता वाले नित्य ' धणी ' बदलने वाली गणिका के समान हैं .आप किसी के नाम का चूड़ा जीवन पर्यंत नहीं पहन सकते , जहाँ आप के मन से रंच मात्र भी इधर उधर हुआ आप पिल पड़े अपने ही लोगों पे . आप में न तो संयम हैं न आप में धैर्य है ,
आप मुस्लिमों से तो कुछ सीख लें भले ही उन के नेतृत्व ने उन को बाबा जी का ठुल्लू ही पकड़ाया लेकिन वे कभी उन के विरोध में एक शब्द न तो लिखते हैं न प्रकट करते हैं ,क्या आप यह समझते हैं कि वे अपने नेताओं से नाराज नहीं होते ? होते हैं , बेशक होते हैं लेकिन वे आप की तरह अपने पायजामे फाड़ फाड़ कर नंगे नहीं होते , वे अपने घर की बात घर में सुलझाना जानते हैं . आप हवा के झोंके मात्र से बांके हो जाते हैं और अपने ही नेताओं को जो लाख मजबूरियों के बीच कुछ रास्ता बनाने का प्रयास करते हैं उन पर वक्रोक्तियां करते हैं ,लेखनी से विष बुझे तीर पे तीर चलाते हो और फिर कहते हो हम राष्ट्रवादी हैं , हिन्दुत्ववादी हैं . आप की लेखनी लाख परिष्कृत होगी , आप संघ के महा झाड़ रहे होंगे , आजीवन प्रचारक रहे होंगे ,भागवत जी , तोगड़िया जी , आडवानी जी आप से निर्देश प्राप्त कर के ही सांस ले रहे होंगे , स्वर्गस्थ अशोक सिंघल आप के तेज से ही स्वर्ग में सुख से रह रहे होंगे लेकिन मेरी दृष्टि में आप निरे मूर्ख ,अधीर और बौद्धिक रूप से अपाहिज हैं .


लेखक 
दिनेश कुमार बिस्सा आकिल