Sunday, 4 February 2018

हैदराबादी निजाम ने आज ही टेके थे घुटने हिन्दू योद्धा सदाशिवराव भाऊ के आगे उदागीर के युद्ध में

3 फरवरी- विजय दिवस. हैदराबादी निजाम ने आज ही 
टेके थे घुटने हिन्दू योद्धा सदाशिवराव भाऊ के आगे 
उदागीर के युद्ध में
सदाशिव राव भाऊ जी पेशवा के बलिदान के बाद ही अब्दाली के पाँव हिलने शुरू हो गए थे और उसने अपनी मरी हुई अंतरात्मा में ये मान लिया था की भारत भूमि को जीतना इतना आसान नहीं जितना वो समझ रहा था .. महावीर का सदाशिवराव भाऊ महान योद्धा पेशवा बालाजी बाजीराव के चचेरे भाई थे .. अपने शासन प्रशासन में बेहद निपुण व् कुशल होने के कारण मराठा साम्राज्य का समस्त शासन भार पेशवा ने उन्ही पर छोड़ दिया था. प्रसिद्ध वीर योद्धा सदाशिवराव की व्यूह रचना ऐसी हुआ करती थी जिस से सीख ले कर यूरोपीय शासकों ने अपनी सेना और व्यूह रचना करनी शुरू कर दी थी ... इनके पास सैन्य बल के अतिरिक्त एक विशाल तोपख़ाना भी था।इस महायोद्धा का इतिहास उस तथाकथित मजहबी ठेकदार को भी याद रखने की जरूरत है जो आये दिन किसी ना किसी को हैदराबाद आने की चुनौती दिया करता है . क्योंकि इस महावीर के नाम अपनी इसी सैन्य शक्ति व् अपने पराक्रम के बलबूते हैदराबाद के निज़ाम सलावतजंग को भी उदयगिरि के प्रसिद्ध युद्ध में हारने का गौरव प्राप्त है .

इस युद्ध में हैदराबाद का वो निज़ाम घुटनो के बल बैठ गया था इन योद्धाओ का पराक्रम देख कर ...अपनी दौलत और ताकत के अहंकार में तानाशाही पर उतारू उस हैदराबादी निजाम को अपने घुटनों पर बैठ कर जान की भीख मांगने पर मजबूर कर देने वाले उस महान योद्धा ने आज ही के दिन अर्थात3 फ़रवरी को ये जंग जीती थी और भारत के शत्रुओं के कलेजे में अपने नाम का खौफ पैदा किया था . इस पावन दिवस को एक धरोहर के रूप में जान कर इस विजय पर्व की तमाम राष्ट्रभक्तों और धर्मरक्षको को बारम्बार बधाई देने के साथ ऐसे पावन दिनों की स्मृति सदा सदा बनाये रखने का संकल्प भी   परिवार लेता है .भारत के प्रसिद्ध गद्दारों में से एक ओवैसी जैसो को कम से कम इस इतिहास को दिन में एक बार जरूर पढ़ना चाहिए इतिहास में अपने पूर्वजों का हश्र देखने के लिए .