Friday, 16 February 2018

मान्यता है कि फुलैरा दूज के दिन सच्चे मन से भगवान कृष्ण और राधा की पूजा-अर्चना करने से जीवन में प्रेम और आनंद की कभी कमी नहीं होती

कल है कृष्ण-राधा का विशेष दिन, इस प्रकार पूजा करने से जीवन में कभी नहीं होगी प्रेम की कमी

हिंदू धर्म में राधा-कृष्ण की जोड़ी प्रेम की मिसाल मानी जाती है। राधा और कृष्ण के प्रेम की कई कथाएं प्रचलित हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाने आदि में राधा-कृष्ण के कई मंदिर बने हैं। इन मंदिरों में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां फाल्गुन मास में एक विशेष दिन को राधा-कृष्ण के प्रेम-दिवस के रूप में मनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन कान्हा और राधा रानी की पूजा करने से प्रेम की प्राप्ति होती है?


मान्यता है कि द्वापर युग में फाल्गुन ही वो माह था जब कृष्ण-राधा का प्रेम चरम पर था। इसी महीने में गोपियों ने दोनों के प्रेम को सहर्ष स्वीकार कर उनपर फूलों की वर्षा की थी। गोकुल की गोपिकाओं ने कृष्ण-राधा के प्रेम पर मोहित होकर फूलों की होली खेली थी। यही वजह है कि इस दिन को यहां विशेष रूप से “फुलैरा दूज” के रूप में मनाया जाता है।
कब मनाई जाती है फुलैरा दूज?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय को “फुलैरा दूज” पर्व मनाया जाता है। इस साल यह 17 फरवरी को मनाई जाएगी जो इस दिन (17 फरवरी को) सुबह 3 बजकर 56 मिनट पर शुरु होगा और अगले दिन यानि 18 फरवरी शाम 4 बजकर 50 मिनट तक चलेगा।
फुलैरा दूज का महत्व
मान्यता है कि फुलैरा दूज के दिन सच्चे मन से भगवान कृष्ण और राधा की पूजा-अर्चना करने से जीवन में प्रेम और आनंद की कभी कमी नहीं होती। प्रेमी जोड़ों को एक-दूसरे का साथ मिलता है। भगवान कृष्ण और देवी राधा भक्तों के जीवन को प्रेम और खुशियों से भर देते हैं।

मनाने का तरीका
यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं। यह बसंत पंचमी के बाद और होली के पहले पड़ता है इसलिए होली की तरह इस दिन भी लोग एक दूसरे के साथ फूलों की होली खेलते हैं और होली का त्यौहार आने तक हर दिन घर को फूलों से सजाते हैं। कह सकते हैं इसी दिन से एक प्रकार से होली की शुरुआत हो जाती है।
मथुरा, वृंदावन में ‘फुलैरा दूज’ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की पूजा करने वाले भक्त इस दिन उनपर जितने फूल बरसाते हैं कान्हा उन भक्तों पर उससे कहीं अधिक प्रेम लुटाते हैं। इस दिन फूलों से सजे कन्हैया लाल को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त मथुरा वृंदावन के मदिरों में आते हैं।
पूजा करने से मिलेगा फल
ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं के अनुसार ‘फुलैरा दूज’ को फाल्गुन माह का सबसे शुभ दिन माना जाता है। अगर आप कोई भी नया काम करने का सोच रहे हैं तो इस दिन बिना सोचे-विचारे उस काम को कर सकते हैं, आपको सफलता मिलेगी।
वैवाहिक जीवन को मधुर बनाने तथा नए प्रेम-संबंध शुरु करने के लिए यह एक शुभ दिन माना जाता है। जिनकी कुंडली में प्रेम का अभाव है उन्हें इस दिन कृष्ण-राधा की पूजा जरूर करनी चाहिए।
विवाह के लिए अति उत्तम दिन
फुलैरा दूज को विवाह के लिए उत्तम दिन माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन विवाह के लिए किसी भी मुहूर्त की जरूरत नहीं होती। ब्रजमंडल में फुलैरा दूज के दिन सबसे ज्यादा विवाह होते हैं।

क्या करें इस दिन?
घर में फूलों की रंगोली बनाएं।
श्रीकृष्ण और राधा की मूर्ति को फूलों से सजाएं।
पूजा करते वक्त मुरली वाले कान्हा को मीठे पकवान का भोग लगाएं।
मीठे पकवानों को भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में बांटें।