Tuesday, 13 March 2018

2018 में रामनवमी कब है ?जानिए रामनवमी का शुभ मुहूर्त

आदि राम तपोवनादि गमनंहत्वा मृगं कांचनम्।
वैदीहीहरणं जटायुमरणंसुग्रीवसंभाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणंलंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्एतद्धि रामायणम्।।

रामनवमी का मुहूर्त
रामनवमी मुहूर्त : 11:14:04 से 13:41:03 तक
अवधि : 2 घंटे 26 मिनट रामनवमी,मध्याह्न समय : 12:27:33 मिनट तक
जय श्री राम,हमारे देश में रामनवमी का पावन और पवित्र त्योहार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।जैसा कि हम सब जानते हैं कि भगवान विष्णु के 7वें अवतार प्रभु श्रीराम थे।हर वर्ष हिन्दू कैंलेडर के अनुसार चैत्र मास की नवमी तिथि को श्रीराम नवमी देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है और चैत्र मास की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक शक्ति की आराधना और सादना का महापर्व नवरात्रि भी मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर भक्त श्रद्धालु व्रत रखते हुए जागरण और मां दुर्गा की पूजा करते हैं ।

रामनवमी उत्सव का हर्षोल्लास
हमारे देश में हिन्दू मतावलम्बी श्री रामनवमी का त्योहार सच्ची श्रद्धा के साथ मनाते हैं वहीं वैष्णव संप्रदाय और संत समाज इस खास अवसर पर विशेष पूजा अर्चना और साधना में समय व्यतित करता है ।
रामनवमी के विशेष अवसर पर भक्तगण श्रीरामचरितमानस का पाठ,  रामरक्षा स्त्रोत का पाठ, भजन-कीर्तन के साथ ही भगवान राम की मूर्ति को फूल-माला से सजाते हैं और घर में स्थापित करते हैं। सात ही  भगवान राम की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं

जानिए राम नवमी की सरल पूजा विधि
रामनवमी के विशेष अवसर पर प्रात: सबसे पहले स्नान करके पवित्र होकर पूजा स्थल पर पूजन सामग्री के साथ हमें बैठना चाहिए,  पूजा में तुलसी दल और कमल का फूल अवश्य रखना चाहिए,और फिर श्रीराम नवमी की पूजा षोडशोपचार विधि से करें, सात ही खीर और फल-मूल को प्रसाद के रूप में तैयार करें।  पूजा संपन्न होने के बाद घर की सबसे छोटी महिला परिवार कुटुंब के सभी लोगों के माथे पर तिलक लगाए और प्रसाद ग्रहण करें।

श्रीरामनवमी के संबंध में हिन्दू धार्मिक पौराणिक मान्यताएँ
जैसा कि हमारे धर्मशास्त्रों में वर्णित है,उसके अनुसार श्री रामनवमी की कहानी लंकापति रावण से शुरू होती है।राक्षसराज रावण के राज में जब आम जन और संत त्राहिमाम करने लगे,देवगण परेशान हो गए तब प्रार्थना करने के लिए भगवान विष्णु के पास गए।और फिर राक्षसों का विनाश और संहार करने के लिए,मानव जाति,धर्म की रक्षा करने के लिए चक्रवर्ती नरेश, महान प्रतापी महाराज दशरथ और मैया कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया। तभी से चैत्र नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाने की परंपरा प्रारंभ। ऐसा कहा जाता है कि नवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने श्रीरामचरित मानस की रचना भी प्रारंभ की थी।