Monday, 12 March 2018

आज भारत जैसे देश में जहां हिन्दुओं की एक बड़ी आबादी रहती है वे ही इस भाषा व संस्कृति को भूलते जा रहे हैं तथा पश्चिमी भाषा, संस्कृति व सभ्यता को अपनाने की ओर अपना झुकाव बढ़ा रहे हैं।

हिंदू धर्म के इन तथ्यों से अनजान हैं अधिकांश भारतीय


पूर्ण जानकारी का महत्व

जब हमें किसी विषय की पर्याप्त जानकारी नहीं होती तो हम कही-सुनी बातों पर भी विश्वास करने लगते हैं। उसी जानकारी के आधार पर विभिन्न निष्कर्षों पर भी आते हैं लेकिन किसी विषय का सार निकालने से पहले हमें उसकी पूर्ण नहीं तो पर्याप्त जानकारी होनी बेहद जरूरी है।

धर्म

धर्म एक ऐसा विषय है जिसकी अधूरी जानकारी के आधार पर लोग छोटी सी बात को भी बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। एक झूठ को सच साबित करने में लगे रहते हैं और विभिन्न अंधविश्वासों को धार्मिक विश्वास की मान्यता देते हैं।

अनजाने तथ्य

इस आर्टिकल में हिन्दू धर्म से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्य हैं जिनसे आज भी मनुष्य अनजान है। और अगर जानकारी रखता भी है तो अधूरी या फिर गलत, जो इस धर्म को गलत राह पर ले जाने के लिए प्रेरित कर रही है।


हिन्दू धर्म का सिद्धांत

किसी का कहना है कि हिन्दू धर्म बहुदेववादी तरीके का पालन करता है, तो किसी का मानना है कि यह धर्म एकेश्वरवादी सिद्धांत से बना है। लेकिन तथ्यों की मानें तो हिन्दू धर्म इन सभी सिद्धातों से पूरित है।

मार्ग अनेक

यह एक ऐसा धर्म है जो किसी को एक सिद्धांत में नहीं बांधता। हिन्दू धर्म का मानना है कि ईश्वर तक पहुंचने के साधन काफी सारे हैं लेकिन परिणाम एक ही है। इसलिए दुनिया को ‘भगवान’ का नाम देने वाले इस धर्म में अनेक देवी-देवताओं को पूजा जाता है।



चार वेद

हिन्दू धर्म के चार वेद – ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद तथा यजुर्वेद, सभी वेद अपने आप में आज भी मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं। हिन्दू धर्म के अनुयायी इन सभी वेदों एवं पौराणिक ग्रंथों को अपना गुरु रूप मानकर अपनी कठिनाइयों का समाधान पाते हैं।


महान ग्रंथ

हिन्दू धर्म के दो महान ग्रंथ- रामायण एवं महाभारत, स्वयं मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। परन्तु आज का आधुनिक मनुष्य इन सिद्धांतों को खुद पर कितना लागू करता है यह एक अलग बात है।

शक्ति की प्रतीक देवी

आजकल लोग स्त्री को अपने बराबर समझें या ना समझें, लेकिन हिन्दू धर्म ने हमेशा से ही स्त्री रूपी ‘शक्ति’ को देवों के समान महान माना है। हिन्दू धर्म की त्रिमूर्ति हैं ब्र्ह्मा, विष्णु एवं महेश (शिव)। भगवान ब्रह्मा जहां सृष्टि की संरचना के लिए पुराणों में उल्लिखित हैं वहीं विष्णुजी को इस संसार का पालनहार माना गया है।

हिन्दू धर्म की त्रिमूर्ति

तथा भगवान शिव भक्तों की इच्छाओं को पूरित करने एवं अपने रौद्र रूप से बुरे प्रभाव को नष्ट करने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म ने एक देवी को हमेशा ही शक्ति का प्रतीक माना है।

प्रत्येक देवी का शक्ति रूप

वह देवी चाहे कोई भी हो, मां लक्ष्मी, माता पार्वती, मां दुर्गा या इनका कोई स्वरूप। प्रत्येक देवी को एक शक्ति के रूप में प्रकट किया गया है जो पापियों का संहार करने के लिए हमेशा ही मौजूद हैं।

सबसे पुराना धर्म

यदि हिन्दू धर्म को अन्य विश्व प्रसिद्ध धर्मों से तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो यह दुनिया के सबसे पुराने धर्म में गिना जाता है। लेकिन यदि आप हिन्दू धर्म के किसी अनुयायी से ऐसा ही कोई प्रश्न करें कि हिन्दू धर्म कितना पुराना है तो वह इसकी गणना लाखों या करोड़ों वर्ष पुरानी भी दे सकता है।

हिन्दू धर्म का समय चक्र

क्योंकि हिन्दू धर्म में समय का चक्र अन्य धर्मों के समय चक्र से काफी भिन्न है। भगवान ब्रह्मा ने समय को ‘कल्प’ के रूप में प्रदर्शित किया था और इस प्रत्येक कल्प में 14 ‘मनवंतरों’ को शामिल किया गया है।

कल्प से बना मनवंतर

इस गणना के अनुसार हम युगों के जाल को पार करते हुए आज केवल सातवें मनवंतर (वैवस्वत) तक ही पहुंच पाए हैं। लेकिन आम मनुष्य केवल युगों को चार विभाजन में पाता है – सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग एवं कलियुग।

चार युगों में विभाजन

और खुद को आज का मनुष्य कलियुग का भाग मानता है, जो कि धार्मिक संरचना के अनुसार दैत्यों का संसार कहा जाता है। केवल यही नहीं, ऐसे कई तथ्य हैं जो हिन्दू धर्म को अन्य धर्म से काफी भिन्न बताते हैं।

धन एक पाप?

कुछ धर्मों के अनुसार ‘पैसे’ को पाप के रूप में परिवर्तित किया जाता है। धन के पीछे पड़ना पाप के समान माना जाता है लेकिन दूसरी ओर हिन्दू धर्म स्वयं में ही धर्म को धन से भी जोड़ता है।

धन तथा समृद्धि की देवी

धन तथा स्मृद्धि के देवी-देवता इस बात का उदाहरण है कि हिन्दू धर्म में धन एवं सम्पदा की रवायत वर्षों पुरानी है। धन की देवी लक्ष्मी तथा धनकुबेर को लोग धन पाने के लिए रोज़ाना पूजते हैं।

धन के देवी-देवताओं का पूजन

विधि पूर्वक उनकी पूजा करते हैं तथा उनके मंत्रों का जाप करते हैं ताकि यह देव उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर उनके जीवन पर छायी कंगाली के प्रभाव को दूर कर सकने में सहायक साबित हों।

तीसरा सबसे विशाल धर्म

हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जो विश्व भर में सबसे बड़े धर्मों में से तीसरे स्थान पर आता है लेकिन इसी धर्म की 95 प्रतिशत जनसंख्या एक देश, एक राष्ट्र ‘भारत’ को बनाती है।

संस्कृत का महत्व

इसके बावजूद भी विश्व भर में इस धर्म को जाना जाता है। ना केवल धार्मिक कथनों बल्कि हिन्दू धर्म को दुनिया भर में प्रस्तुत करने वाली भाषा ‘संस्कृत’ ने भी विश्व भर की अन्य भाषाओं को विकसित करने या फिर कुछ भाषाओं की प्रसिद्ध नामावलियों को रचने का प्रेरणात्मक श्रेय पाया है।

परंतु हिन्दू ही बन रहा पाश्चात्य सभ्यता का पुजारी


लेकिन इसके बावजूद भी आज भारत जैसे देश में जहां हिन्दुओं की एक बड़ी आबादी रहती है वे ही इस भाषा व संस्कृति को भूलते जा रहे हैं तथा पश्चिमी भाषा, संस्कृति व सभ्यता को अपनाने की ओर अपना झुकाव बढ़ा रहे हैं।