Friday, 13 April 2018

भारत की धर्मनिरपेक्षता यकीनन दुनिया के लिए एक मिसाल हो सकती है

हज सब्सिडी पर रोक लगते ही दहाड़ उठा सेकुलर वकील वकील गौरव बंसल और लड़ गया मोदी सरकार से मुस्लिमों को हज सब्सिडी वापस दिलाने के लिए


भारत की धर्मनिरपेक्षता यकीनन दुनिया के लिए एक मिसाल हो सकती है . ये सेकुलर शब्द पहले भले ही भारत में कभी न रहा हो लेकिन वर्तमान समय में ये कईयों की आत्मा तक में बस गया है और उसको कायम रखने के लिए ख़ास तौर पर हिन्दू समाज हर कुर्बानी देने के लिए तैयार है . सहिष्णुता कि
अंतिम पराकाष्ठ पर खड़ा हिन्दू कश्मीर तक से भगाए जाने के बाद अपनी मूल थाती सेकुलरिज्म को साथ ले कर चल रहा है . ऐसे ही सेकुलरों में जम्मू में जिस मुकदमे में हिन्दू खुद को प्रताड़ित करने आ आरोप लगा रहे , हिन्दुओ के खिलाफ वही मुकदमा लड़ रही दीपिका हैं , भारत के वो तमाम तथाकथित फिल्म स्टार जो केवल हिन्दुओ के खिलाफ बोलते हैं , गुजरात दंगों में हिन्दुओ के खिलाफ छाती ठोंक कर खड़े हो गये बर्खास्त IPS संजीव भट्ट , मस्जिद बचाने के लिए हिन्दुओ पर गोलियां बरसा देने वाले मुलायम सिंह यादव आदि प्रमुख हैं . अब उन्ही में एक नया नाम जुड़ा है अधिवक्ता गौरव बंसल . एडवोकेट गौरव बंसल ने नई हज नीति में दिव्यांगों को हज के लिए अयोग्य ठहराने को असंवैधानिक बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी  ये एक वकील हैं जो पहले तो साधारण मुकदमों के लिए जाने जाते थे लेकिन जब से इन्होने सुना कि मोदी सरकार ने हज यात्रा में जाने वाले मुस्लिमों में दिव्यांगो का कोटा खत्म कर दिया है अब से इन्होने एक मिनट भी बिना देर गंवाए मोदी सरकार को सबक सिखाने की ठान ली और दायर कर दिया मोदी सरकार के खिलाफ अपनी तरफ से एक मुकदमा जिसमे इन्होने मोदी सरकार के दिव्यांग मुस्लिमों की हज सब्सिडी खत्म करने को चुनौती दे डाली गयी . इनकी याचिका पर मोदी सरकार के प्रतिनिधि को अदालत में हाजिर भी होना पडा और सफाई भी देनी पड़ी . गौरव बंसल नाम के इन धर्मनिरपेक्ष वकील के चलते ही मुस्लिमों में आशा जगी है अपनी सब्सिडी वापस पाने की और इन्होने अचानक ही संजीव भट्ट , तीस्ता सीतलवाड़ जैसा एक बड़ा नाम कमा लय है मुस्लिम समाज के बीच में .. गौरव बंसल की याचिका पर अभी अदालत का फैसला आना बाकी है लेकिन उसके पहले ही इन्होने अपनी एक अलग पहिचान एक बड़े सेकुलर के रूप में बना ली है .