Monday, 30 May 2016

रहस्य : इस झील के अंदर रहती है बूढ़ी नागिन, खाती है मक्खन
************************************************************



हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है। यहां कई प्राचीन रहस्य दबे हुए हैं। इन दिनों सबसे बड़ा रहस्य है बना है हिमाचल के मंडी में स्थित सरयोल सर सरोवर और यहां बसने वाली बूढ़ी नागिन। इस नागिन के कारनामे अजीबो-गरीब हैं और अजीब है इससे जुड़ी लोगों की मान्यता। ये कोई जादुई कहानी नहीं बल्कि सच है।>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>
हिमाचल प्रदेश के जिले मंड़ी में स्थित सरयोल सर सरोवर से लोगों की कई मान्यताएं जुड़ी हैं। सरोवर में रहने वाली इस बूढ़ी नागिन को लोग देवी मानते हैं, नागिन की पूजा करते हैं। लोगों का ये मानना है बूढ़ी नागिन देवताओं को शक्ति प्रदान करती है।
^^^^^^^^^^^^
चिड़िया करती हैं झील की सफाई :
======================
सरयोल सर सरोवर के बारे में कहा जाता है कि यहां के पानी पर तिनका और पेड़ों का पत्ता तक नहीं ठहरता। इसके पानी की सफाई कोई और नहीं बल्कि चिड़िया करती हैं। आबी नाम की एक चिड़िया यहां से तिनके और पत्ते उठाकर ले जाती है और झील का पानी साफ रहता है।
और तो और इस झील का रंग भी बदलता है। बादल आने पर झील का पानी काला दिखाई देता है। मगर जैसे ही धूप चमकती है यह पानी नीला पारदर्शी हो जाता है।
झील में है बूढ़ी नागिन की आरामगाह :
========================
सरयोल सर के बारे में कहा जाता है कि यह माता बूढ़ी नागिन की आरामगाह है। लोग कहते हैं कि ये नागिन मक्खन खाती है और उसी पर जिंदा है। लोग तो यहां तक मानते हैं कि झील में एक महल हैं जिसमें बूढ़ी नागिन निवास करती है। कहते हैं कि इस झील में नागिन के अलावा और कोई प्रवेश नहीं कर पाया है। कोई जाता है तो डूबकर मर जाता है। यहां पर नहाने से रोक है।
झील के चारों ओर दी जाती है घी की धार :
===========================
सरयोल सर के चारों ओर देसी घी की धार देने की पंरपरा आज भी है। लोग अपनी गाय के घी का तब तक सेवन नहीं करते हैं, जब तक कि सरयोल सर के चारों ओर धार देकर बूढ़ी नागिन को अर्पित न किया जाए।
मंदिर के पुजारी डागू राम का कहना है कि एक साल में यहां पर बीस से पचीस क्विंटल घी माता की पिंडी और झील के किनारे चढ़ा दिया जाता है। जिससे झील के पानी में भी चिकनाहट आ जाती है।
बीस भादों को पहुंचता है बूढ़ी नागिन का रथ :
=============================
सरयोल सर समुद्रतल से दस हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है। इसलिए चैत नवरात्रों से अक्टूबर-नवंबर तक ही यहां जाया जा सकता है। कहा जाता है कि बीस भदों को माता बूढ़ी नागिन का रथ यहां आता है, इस दौरान अन्य देवी-देवताओं के रथ भी यहां आते हैं। उस दौरान यहां भीड़ बढ़ जाती है।
पुजारी डागू राम के अनुसार पहले शाम के समय यहां पर काले रंग की चिडिय़ा जिसे स्थानीय बोली में आबी कहा जाता है झील पर बिखरे तिनके और पत्ते उठा ले जाती थी। उसने स्वयं कई बार उसे देख है। मगर अब वह किसी को दिखाई नहीं देती है। 

No comments:

Post a Comment