Monday, 12 September 2016

केरल का खास पर्व है ओणम


ओणम महोत्सव पर आकर्षक रंगोली की रंगत

उत्सवों की श्रृंखला के बीच रविवार को ओणम महोत्सव की शुरुआत हुई। उत्सव का विभिन्न स्थानों पर फूलों की आकर्षक रंगोली बनाकर स्वागत किया गया। लोगों का विश्वास है कि तिरुओणम वह अवसर है जब सम्राट महाबली की आत्मा केरल की यात्रा करती है। इस उपलक्ष्य में स्थान-स्थान पर सहभोज और उत्सव का आयोजन होता है। केरल में बड़े पैमाने पर इस पर्व को मनाते हैं।

केरल के प्रसिद्ध त्योहार 'ओणम' के माध्यम से नई संस्कृति को जानने का मौका मिलता है। इस अवसर पर महिलाओं द्वारा आकर्षक 'ओणमपुक्कलम' (फूलों की रंगोली) बनाई जाती है। और केरल की प्रसिद्ध 'आडाप्रधावन' (खीर) का वितरण किया जाता है। ओणम के उपलक्ष्य में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इन प्रतियोगिताओं में लोकनृत्य, शेरनृत्य, कुचीपु़ड़ी, ओडि़सी, कथक नृत्य प्रतियोगिताएँ प्रमुख हैं।

इतिहास की नजर में : माना जाता है कि ओणम पर्व का प्रारंभ संगम काल के दौरान हुआ था। उत्सव से संबंधित अभिलेख कुलसेकरा पेरुमल (800 ईस्वी) के समय से मिलते हैं। उस समय ओणम पर्व पूरे माह चलता था।



ओणम केरल का महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार फसलों की कटाई से संबंधित है। शहर में इस त्योहार को सभी समुदाय के लोग हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। ओणम मलयालम कैलेंडर के पहले माह 'चिंगम' के प्रारंभ में मनाया जाता है। यह पर्व चार से दस दिनों तक चलता है जिसमें पहला और दसवाँ दिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है।

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