Friday, 23 September 2016

          राजा हरि सिंह  जिनकी बदौलत जम्मू-कश्मीर
                   बना  था भारत का हिस्सा।




राजा हरि सिंह की बदौलत J&K बना भारत का हिस्सा
हर साल की तरह इस साल भी राजा हरि सिंह का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। लेकिन पिछले दिनों कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का रवैया और भारत की आक्रामक नीति ने इस साल के जन्मदिन आयोजन को काफी अहम बना दिया।
राजा हरि सिंह का नाम देश के उन प्रगतिशील राजाओं की फेहरिस्त में शामिल है जिसने अखंड भारत की रचना में अहम योगदान दिया। जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा होगा ये सैद्धांतिक फैसला राजा हरि सिंह का जरूर था लेकिन यह निर्णय राजा हरि सिंह ने राज्य की जनता के भविष्य और भावनाओं को ध्यान में रखते हुये ही लिया।
राजा हरि सिंह ने पहले गोलमेज सम्मेलन में राजाओं के संगठन नरेश मंडल के उपाध्यक्ष की हैसियत से शिरकत की। इस सम्मेलन में अंग्रेजों की मंशा थी कि राजाओं को लालच देकर आजादी के आंदोलन को कमजोर कर दिया जाय। लेकिन राजा हरि सिंह ने देश हित को सर्वोपरि रखते हुये अंग्रेजों के मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया।
राजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर राज्य के अंतिम राजा थे। उन्होंने 1925 से लेकर 1947 तक राज्य की बागडोर संभाली। लेकिन उनके दूरदर्शी और लोकप्रिय फैसले आज भी शासकों को लिये मिसाल हैं। वे पहले राजा थे जिन्होंने अपने राज्य में सभी के लिये अनिवार्य शिक्षा, बाल विवाह पर रोक का कानून बनाया। उन्होंने मंदिर में दलितों के प्रवेश को लेकर अपने राज्य में सख्त रूख अपनाकर एक मिसाल रखी।
आज जबकि पाकिस्तान कश्मीर को लेकर पूरे विश्व में राज अलाप रहा है। राजा हरि सिंह ने कश्मीर को भारत में शामिल करने की पहल अपनी ओर से करके पाकिस्तान को आइना दिखाया था। जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत के लोग हरि सिंह जैसे प्रगतिशील और देशभक्त शासक को सदियों तक याद करेंगे।

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