Friday, 25 August 2017

26 अगस्त- पवित्रता की सर्वोच्च पराकाष्ठा माँ पद्मावती "जौहर दिवस"

26 अगस्त- पवित्रता की सर्वोच्च पराकाष्ठा माँ पद्मावती "जौहर दिवस"



भारत की नारियों का वो स्वरूप और पवित्रता की वो पराकाष्ठा ही ये जो संसार में हर सर को भारत की नारियों के सम्मान में झुका गया था . वो सर आज भी झुका है भले ही अपना ईमान और कलम एक ही परिवार में बेच चुके चाटुकार इतिहासकार कुछ भी लिख लें और कुछ भी कह लें पर क्रूरतम इस्लामिक आतंक से लड़ कर तन और धन के भूखे 

जौहर की गाथाओं से भरे पृष्ठ भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे अवसर एक नहीं, कई बार आये हैं, जब हिन्दू ललनाओं ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए 'जय हर-जय हर' कहते हुए हजारों की संख्या में सामूहिक अग्नि प्रवेश किया था। यही उद्घोष आगे चलकर 'जौहर' बन गया। जौहर की गाथाओं में सर्वाधिक चर्चित प्रसंग चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का है, जिन्होंने 26 अगस्त, 1303 को 16,000 क्षत्राणियों के साथ जौहर किया था। माँ पद्मिनी का मूल नाम पद्मावती था। वह सिंहलद्वीप के राजा रतनसेन की पुत्री थी। एक बार चित्तौड़ के चित्रकार चेतन राघव ने सिंहलद्वीप से लौटकर राजा रतनसिंह को उसका एक सुंदर चित्र बनाकर दिया। इससे प्रेरित होकर राजा रतनसिंह सिंहलद्वीप गया और वहां स्वयंवर में विजयी होकर उन्हें अपनी पत्नी बनाकर ले आया। इस प्रकार माँ पद्मिनी चित्तौड़ की रानी बन गयी। वो रानी जिनके चरित्र और शौर्य के आस पास भी सोचने की क्षमता ना रखने वाले तथाकथित स्टार उनके जीवन पर फिल्म बनाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं .

पद्मिनी की सुंदरता की ख्याति अलाउद्दीन खिलजी ने भी सुनी थी। वह उसे किसी भी तरह अपने हरम में डालना चाहता था। उसने इसके लिए चित्तौड़ के राजा के पास धमकी भरा संदेश भेजा; पर राव रतनसिंह ने उसे ठुकरा दिया। अब वह धोखे पर उतर आया। उसने रतनसिंह को कहा कि वह तो बस पद्मिनी को केवल एक बार देखना चाहता है। रतनसि उसे छोड़ने द्वार पर आये। इसी समय उसके सैनिकों ने धोखे से रतनसिंह को बंदी बनाया और अपने शिविर में ले गये। अब यह शर्त रखी गयी कि यदि पद्मिनी अलाउद्दीन के पास आ जाए, तो रतनसिंह को छोड़ दिया जाएगा। यह समाचार पाते ही चित्तौड़ में हाहाकार मच गया; पर पद्मिनी ने हिम्मत नहीं हारी। उसने कांटे से ही कांटा निकालने की योजना बनाई। अलाउद्दीन के पास समाचार भेजा गया कि पद्मिनी रानी हैं। अतः वह अकेले नहीं आएंगी। उनके साथ पालकियों में 800 सखियां और सेविकाएं भी आएंगी।अलाउद्दीन और उसके साथी यह सुनकर बहुत प्रसन हुए। उन्हें पद्मिनी के साथ 800 हिन्दू युवतियां अपने आप ही मिल रही थीं; पर उधर पालकियों में पद्मिनी और उसकी सखियों के बदले सशस्त्र हिन्दू वीर बैठाये गये। हर पालकी को चार कहारों ने उठा रखा था। वे भी सैनिक ही थे। पहली पालकी के मुगल शिविर में पहुंचते ही रतनसिंह को उसमें बैठाकर वापस भेज दिया गया और फिर  सब योद्धा अपने शस्त्र निकालकर शत्रुओं पर टूट पड़े। कुछ ही देर में शत्रु शिविर में हजारों सैनिकों की लाशें बिछ गयीं। इससे बौखलाकर अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला बोल दिया। इस युद्ध में राव रतनसिंह तथा हजारों सैनिक मारे गये। जब रानी पद्मिनी ने देखा कि अब हिन्दुओं के जीतने की आशा नहीं है, तो उसने  जौहर का निर्णय किया। रानी और किले में उपस्थित सभी नारियों ने सम्पूर्ण शृंगार किया। हजारों बड़ी चिताएं सजाई गयीं। 'जय हर-जय हर' का उद्घोष करते हुए सर्वप्रथम वीरांगना महारानी पद्मिनी ने चिता में छलांग लगाई और फिर क्रमशः सभी हिन्दू वीरांगनाएं अग्नि प्रवेश कर गयीं। जब युद्ध में जीत कर वो क्रूर लुटेरा अलाउद्दीन पद्मिनी को पाने की आशा से किले में घुसा, तो वहां जलती चिताएं उसे मुंह चिढ़ा रही थीं। 
पवित्रता की उस चरम पराकाष्ठा , त्याग की उस सर्वोच्च प्रतिमूर्ति महारानी पद्मावती को आज उनके बलिदान अर्थात जौहर दिवस पर सम्पूर्ण सुदर्शन परिवार का बारम्बार नमन , वन्दन और अभिनन्दन है साथ ही ऐसी देवीस्वरूपा महारानियों की गौरवगाथा को सदा सही रूपों में जन मानस के आगे लाने के लिए अपने पुराने संकल्प को भी दोहराता है .. 

शौर्य , त्याग और पवित्रता का स्वरूप महारानी पद्मावती अमर रहें ..

Anandnagshankar
Ph-9448487317





















मुझे वेश्या बना दिया है : अटल बिहारी वाजपेयी को बलात्कार पीड़िता ने बताया था राम रहीम का सच

आज  हरियाणा  के पंचकुला  में सीबीआई  के  स्पेशल  कोर्ट  ने डेरा  सच्चा  सौदा  के  स्वयंभू  बाबा  को  15  साल  पुराने  बलात्कार  के  मुकदमे  का  दोषी  सिद्ध  कर  दिया . उसके  बाद  पूरे  हरियाणा  में  जबरदस्त तोड़-फोड़  और  हिंसा  हुई , उसकी  आग  दिल्ली  तक पहुँची . ऐसा  लगा  कि  हरियाणा  सरकार  की  शह  पर उपद्रवी  इकट्ठे  हुए  और  उन्होंने  आगजनी  की.  15  साल  तक बलात्कार की  पीडिताओं   ने  संघर्ष  किया. 2002 में  भारतीय  जनता  पार्टी  की  सरकार  थी . तब  प्रधानमंत्री  अटल  बिहारी  वाजपेयी  को  उन्होंने  खत  लिखा . हालांकि  वाजपेयी  ने  उस  ख़त  को  नजरअंदाज  कर  दिया  था . पढ़ें  किन शब्दों  में  अपनी  पीड़ा , खौफ  और संघर्ष  और  अपने  यौन  शोषण  की  दास्तान लिखी थी   तब  गुमनाम  पीडिता  ने . 

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 मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा (हरियाणा, धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में कार्य कर रही हूं. सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 16 से 18 घंटे सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं, जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी.साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की प्रमाशया साधु गुरजोत ने रात के 10 बजे मुझे बताया कि महाराज ने गुफा (महाराज के रहने के स्थान) में बुलाया है.मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी. यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुझे बुलाया है.गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं. हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है. बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है.
मैं ये सब देख कर हैरान रह गई… मेरे पांव के नीचे की ज़मीन खिसक गई. यह क्या हो रहा है. महाराज ऐसे होंगे, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. महाराज ने टीवी बंद किया व मुझे साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है. मैं ये सब देख कर हैरान रह गई… मेरे पांव के नीचे की ज़मीन खिसक गई.

यह क्या हो रहा है. महाराज ऐसे होंगे, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. महाराज ने टीवी बंद किया व मुझे साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है. मेरा ये पहला दिन था. महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन मन धन सतगुरु को अर्पण करने को कहा था. सो अब ये तन मन हमारा है.

मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि कोई शक नहीं, हम ही खुदा हैं. जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है, तो उन्होंने कहाः श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं. जिनसे वह हर रोज़ प्रेम लीला करते थे. फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं. यह कोई नई बात नहीं है.यह कि हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं. तु्म्हारे घर वाले हर प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं. वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते, यह बात आपको अच्छी तरह पता है.

यह कि हमारी सरकार में बहुत चलती है. हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं. नेता हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे. हम तुम्हारे परिवार से नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे.

पीडिता का पत्र 

सभी सदस्यों को मरवा देंगे और सबूत भी नहीं छोड़ेंगे, ये तुझे अच्छी तरह पता है कि हमने पहले भी डेरे के प्रबंधक को खत्म करवा दिया था, जिनका आज तक अता-पता ना है. ना ही कोई सबूत बकाया है. जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे. इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन माह में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है.

हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख ना उठाकर देखना, आदमी से पांच-दस फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है. हम दिखाने में देवी हैं, मगर हमारी हालत वेश्या जैसी है.मैंने एक बार अपने परिवार वालों को बताया कि यहां डेरे में सब कुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है, तो ठीक कहां है.

तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं. सतगुरु का सिमरन किया कर. मैं मजबूर हूं. यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है. यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकती, घर वालों को टेलीफोन मिलाकर बात नहीं कर सकती. पिछले दिनों जब बठिण्डा की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने खुलासा किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा.

कुरूक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है. उसका भाई बड़ा सेवादार था. जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है. संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आ कर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए. घर के अंदर कुण्डी लगाकर धमकी दी।

अतः आप से अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुझे भी मेरे परिवार के साथ मार दिया जाएगा, अगर मैं इसमें अपना नाम लिखूंगी….हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों को व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधू हैं या नहीं. अगर नहीं तो किसके द्वारा बर्बाद हुई हैं.”

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गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां.

बाबा राम रहीम की असली कहानी

गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां. एक शख्स जो भारत के दो राज्यों – पंजाब और हरियाणा में निर्विवाद रूप से सबसे पोलराइज़िंग फिगर. कुछ लोगों के लिए वो ‘पिताजी’ हैं. उन पर कोई आंच आने पर वो ‘कुछ भी करने’ को तैयार रहते हैं, और दूसरे वो, जिनके लिए बाबा एक विवादित धर्मगुरु हैं, जो हास्यास्पद फिल्में बनाते हैं, जिन पर बने मीम वो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं.
इसलिए ज़रूरी है कि राम रहीम की कहानी दोनों ढंग से कही जाए. शुरूआत हम पहले पक्ष से करेंगे.
गुरमीत सिंह राम रहीम इंसां कैसे बने?
सिरसा वाले बताते हैं कि उनका शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ है – एक वो जहां आम लोग रहते हैं, और दूसरा वो जहां डेरा सच्चा सौदा के कट्टर समर्थक रहते हैं. ज़्यादातर डेरा 700 एकड़ के कैंपस के आसपास. डेरा आज सिरसा की पहचान है. लेकिन खुद राम रहीम सिरसा से नहीं हैं. उनकी पैदाइश राजस्थान के श्रीगंगानगर की है, तारीख थी 15 अगस्त 1967. जमींदार मगहर सिंह और नसीब कौर की इकलौती औलाद गुरमीत सिंह (जन्म के समय उनका नाम यही था) की ज़ाती ज़िंदगी में ऐसा कुछ नहीं जो डेरा से हट कर हो, और उसका ज़िक्र किया जाए. हो भी नहीं सकता था क्योंकि गुरमीत सिंह सात साल के ही थे जब उन्हें डेरा सच्चा सौदा के तब के प्रमुख शाह सतनाम सिंह ने अपनी शरण में ले लिया था.
सतनाम ने ही उन्हें वो नाम दिया जिससे वो आज जाने जाते हैं – गुरमीत राम रहीम सिंह. इसलिए आज से पलट कर पीछे देखने पर हम यही पाते हैं कि राम रहीम की कहानी डेरा सच्चा सौदा की कहानी है.
डेरा सच्चा सौदा काफी पुराना है. आज़ादी के अगले ही साल 29 अप्रैल 1948 को शाह मस्ताना जी महाराज ने डेरा की स्थापना सिरसा में की. मस्ताना के बाद आए राम रहीम के सिर पर हाथ रखने वाले शाह सतनाम सिंह. सतनाम सिंह के ज़माने में डेरा में देशी के साथ-साथ विदेशी अनुयायी भी आने लगे. 23 सितंबर 1990 को एक जलसे में सतनाम सिंह ने ऐलान किया कि उनके बाद डेरा प्रमुख होंगे गुरमीत राम रहीम. राम रहीम उस वक्त 23 बरस के बांके नौजवान थे. इस चीज़ ने लोगों का ध्यान खींचा. डेरा सच्चा सौदा (और दूसरे डेरों में भी) परंपरा ये थी कि एक प्रमुख के जाने के बाद उनकी वसीयत पढ़ी जाती थी, जिसमें उनके उत्तराधिकारी का नाम होता था. राम रहीम अपने गुरु के रहते उत्तराधिकारी बना दिए गए थे. इसके बाद गुरमीत राम रहीम ने अपने नाम के आगे इंसां लगाना शुरू किया.
संत हैं गृहस्थ हैं
राम रहीम को मानने वालों के लिए राम रहीम संत हैं. लेकिन राम रहीम की अपनी गृहस्थी भी है. उनकी दो बेटियां हैं – चरणप्रीत और अमरप्रीत. एक बेटा भी है जिसकी शादी भटिंडा के विधायक रहे हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी से हुई है. इनके अलावा रामरहीम की एक गोद ली बेटी हैं हनीप्रीत. चरणप्रीत और अमरप्रीत के पति डॉक्टर शान ए मीत इंसां और रूह ए मीत इंसां डेरे से ही जुड़े हुए हैं.
 राम रहीम और राजनीति
अपने यहां लोगों में धर्म और आध्यात्म की भूख इतनी है कि बाबाओं का पनपना आम है. लेकिन राम रहीम जहां पहुंचे हैं, वो कम ही लोग कर पाते हैं. कम ही बाबा होंगे जिनके अनुयायी उन्हें ‘पिताजी’ कहते हों. ये बात कहने भर की नहीं है. रेप केस में फैसला आने को था तो उनके अनुयायियों ने साफ कहा कि राम रहीम को ‘कुछ हुआ’ तो वो कुछ भी कर गुज़रेंगे. इन कट्टर अनुयायियों की संख्या लाखों में है. डेरा अपनी ओर से इनकी संख्या करोड़ों में बताता है.
इतने कट्टर समर्थकों का एक बड़ा बेस राजनेताओं को भी खींचता है. और राम रहीम राजनेताओं से दूर रहने का कोई प्रयास नहीं करते. हरियाणा विधानसभा चुनावों से पहले अमित शाह राम रहीम से मिलने गए थे. इसके हफ्ते भर के अंदर भाजपा के 90 में से 44 उम्मीदवार राम रहीम से मिलने सिरसा गए थे. इस बार के हरियाणा और पंजाब विधानसभा चुनावों में डेरा सच्चा सौदा ने भाजपा और अकाली दल के लिए खुलकर समर्थन का ऐलान किया था. लगभग ढाई दशक में ये पहली बार था कि डेरा ने खुल कर किसी राजनैतिक दल का समर्थक किया था. राम रहीम की ‘गुफा’ के अंदर जाने वाले बताते हैं कि वहां कई बड़े नेताओं के राम रहीम के चरण छूते कई फोटो हैं. इसमें लगभग साभी पार्टियों के नेता हैं.
 डेरा और उसकी सल्तनत
डेरा सच्चा सौदा का सिरसा का कैंपस 700 एकड़ में फैला है. इसके अलावा डेरा के देशभर में 50 के लगभग और आश्रम हैं. कुछ आश्रम अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कैनेडा में भी हैं. डेरा का एक स्कूल है जहां से राम रहीम के बच्चे भी पढ़े हैं. सिरसा में एक अस्पताल है जहां गरीबों का सस्ता इलाज किया जाता है. 175 बिस्तरों वाला एक अस्पताल श्रीगंगानगर में भी है. न्यूज़ वेबसाइट फर्सटपोस्ट के मुताबिक डेरा का एक मार्केट कॉम्प्लेक्स और गैस स्टेशन भी है. इस पूरी जायदाद का रख-रखाव एक ट्रस्ट के ज़रिए होता है जिसके प्रमुख राम रहीम हैं.
डेरा सच्चा सौदा की फिलॉसफी कुछ-कुछ ‘सबका मालिक एक’ जैसी है. डेरा कहता है कि वो सभी धर्मों को एक करने की ओर काम कर रहा हैं. लेकिन बावजूद इसके डेरा अपने आप में एक पंथ चला रहा है. डेरा से जुड़ने वाले अनुयायी ‘प्रेमी’ कहलाते हैं. प्रेमी बनने की एक पूरी प्रक्रिया है. इसमें पहले ‘जाम’ पिलाया जाता है. ये एक तरह का पानी होता है. इसके बाद होता है ‘नामदान’. ये वैसा ही होता है जैसे हम गुरुमंत्र लेते हैं. हर अनुयायी को चार-पांच शब्दों का एक कॉम्बिनेशन मिलता है जिसका उसे मंत्र की तरह जाप करना होता है. ये उस अनुयायी के लिए सिमरन होता है. इसके बाद एक ‘1’ लिखा एक लॉकेट पहनाया जाता है. इस लॉकेट में 1 के आंकड़े में हर धर्म का चिह्न बना होता है. इसके बाद अनुयायी से उसका सरनेम छोड़कर उसकी जगह ‘इंसा’ लगाने को कहा जाता है. इसके बाद अनुयायी डेरा का प्रेमी बन जाता है.
बाकी आध्यात्मिक संस्थानों की तरह डेरा भी समाजसेवा के छोटे-मोटे काम जैसे ब्लड डोनेशन वगैरह करवाता रहता है. अलग-अलग जगह होने वाले राम रहीम के प्रवचनों (जिन्हें ‘नामचर्चा’ कहा जाता है) में काफी भीड़ जुटती है.
राम रहीम के कल्ट को नकारना मुश्किल है. क्योंकि इस कल्ट में लाखों लोग मानते हैं. लेकिन एक दूसरी जमात भी है जो राम रहीम को संशय की नज़र से देखती है. गॉडफादर नॉवेल लिखने वाले मारियो पुज़ो ने लिखा था, Behind every great fortune, there is a crime. डेरा सच्चा सौदा के बारे में ये कई लोगों को ये बात सही लगती है. डेरा एक के बाद एक विवादों से जुड़ा रहा है और कई संगीन अपराधों में डेरे के लोगों पर आरोप भी लगे हैं-
# 1998 में डेरा की जीप से कुचलकर गांव बेगू के एक बच्चे की मौत हो गई थी. गांव वालों से डेरा वालों का विवाद हो गया था. इसकी खबरें छापने पर एक स्थानीय अखबार के स्टाफ को डेरा के लोग धमकाने चले गए थे.
# इसके बाद 2002 में गुरमीत राम रहीम पर आश्रम में साध्वियों के रेप का इल्ज़ाम लगा. इसी साल आश्रम के एक मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या हुई और फिर साध्वियों के रेप की खबर छापने वाले एक अखबार के संपादक रामचंद्र छत्रपति की हत्या हो गई. हत्या के इन दोनों मामलों में राम रहीम आरोपी हैं.मई 2007 में बठिंडा के डेरा सलावतपुरा में राम रहीम ने सिख गुरु गोबिंद सिंह जैसे कपड़े पहनकर तस्वीरें खिंचवाई. इन तस्वीरों के अखबारों में छपने से सिख आहत हुए. पंजाब और दूसरी जगहों पर सिखों और डेरे के अनुयायियों में टकराव हुआ. डेरे के एक प्रेमी की चलाई गोली से एक सिख लड़के कोमल सिंह की मौत हो गई. इसके बाद पंजाब में राम रहीम की गिरफ्तारी के लिए काफी प्रदर्शन हुए थे.
# 2010 में डेरा के ही पूर्व साधु राम कुमार बिश्नोई ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डेरा के पूर्व मैनेजर फकीर चंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग की. बिश्नोई का आरोप था कि डेरा प्रमुख के आदेश पर फकीरचंद की हत्या कर दी गई. इस मामले में भी उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. बौखलाए डेरा प्रेमियों ने हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में एक साथ सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाया. सीबीआई जांच के दौरान मामले में सुबूत नहीं जुटा पाई और क्लोज़र रिपोर्ट फाइल कर दी. बिश्नोई ने उच्च न्यायालय में क्लोज़र को चुनौती दे रखी है.17 जुलाई, 2010 को फतेहाबाद के रहने वाले हंसराज चौहान (पूर्व डेरा साधु) ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राम रहीम पर पर डेरा के 400 साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया. चौहान का कहना था कि राम रहीम के कहने पर डेरा के चिकित्कों की टीम द्वारा साधुओं को नपुंसक बनाया जाता है. इन साधुओं को नपुंसक बनाने के बाद भगवान के दर्शन होने की बात कही जाती है.
चौहान ने कोर्ट में इसके शिकार बने 166 साधुओं के नाम भी पेश किए थे. चौहान ने अपनी याचिका में बताया था कि रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में आरोपी निर्मल और कुलदीप भी डेरा सच्चा सौदा के नपुंसक साधु थे. कोर्ट के आदेश पर छत्रपति मर्डर केस में जेल में बंद डेरा के साधुओं से पूछताछ हुई जिसमें उन्होंने भी स्वीकार किया कि वे नपुंसक हैं लेकिन वे अपनी मर्जी से बने हैं. चौहान ने ये भी बताया गया था कि डेरा के एक साधु विनोद नरूला ने राम रहीम की पेशी के समय सिरसा न्यायालय में स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या की थी. वह साधु भी नपुंसक ही था.ऊपर लिखी चीज़ों के चलते राम रहीम के चर्चे थे. लेकिन वो इंटरनेट पर सेलेब्रेटी तब बने जब 2015 में उनकी पहली फिल्म एमएसजीः मैसेंजर ऑफ गॉड आई. बाबा के भौकाल के इर्द गिर्द बनी इस फिल्म पर खूब मीम बने. इसी साल एमएसजी-2 द मैसेंजर आई. 2016 में आई एमएसजीः द वारियर लायन हार्ट. 2017 में अब तक राम रहीम की दो फिल्में आ चुकी हैं – ‘हिंद का नापाक को जवाब- एमएसजी लायन हार्ट-2’ और जट्टू इंजीनियर.
राम रहीम इन फिल्म में लीड एक्टर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, लिरिसिस्ट, कंपोज़र सब कुछ होते हैं. ये फिल्में किसी आम दर्शक के लिए वाहियात से कम कुछ नहीं होतीं. लेकिन बाबा के अनुयायी इन्हें देखते हैं और कुछ फिल्मों का कलेक्शन 100 करोड़ के ऊपर भी गया है. फिल्मों से पहले 2012 से 2014 तक राम रहीम ने छह म्यूज़िक एल्बम बनाए जो यूनिवर्सल ने रिलीज़ किए थे.

बाबा राम रहीम की गाड़ियों से जुड़ी ये बातें

बाबा राम रहीम की गाड़ियों से जुड़ी ये बातें नहीं जानते होंगे आप

डेरा सच्चा सौदाडेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरमीत राम रहीम से जुड़े यौन शोषण के मामले को लेकर पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट आज अपना फैसला सुना सकती है. के बाबा गुरमी
 
विवादों में फंसे बाबा राम रहीम अपनी लाइफस्टाइल को लेकर अक्सर सुर्ख़ियों में तो रहते ही हैं, लेकिन उनकी दूसरी पहचान है मॉडिफाइड गाड़ियां.











  • राम रहीम से जुड़े यौन शोषण के मामले को 

    पंजाब-हरियाणा में तैनात अर्धसैनिक बलों पर रोज 3.5 करोड़ खर्च

    राम रहीम केस: पंजाब-हरियाणा में तैनात अर्धसैनिक बलों पर रोज 3.5 करोड़ खर्च

    रेप मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर फैसले से पहले पंजाब और हरियाणा में बिगड़े हालात के चलते भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. राम रहीम के अनुयायी सड़कों पर उतर आए हैं. लिहाजा दोनों राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की ओर से अर्धसैनिक बलों की 180 कंपनियां भेजी गई हैं.
    पंचकूला के आस-पास काफी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनात की गई है. साथ ही हेलिकॉप्टर और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है. अर्धसैनिक बलों की तैनाती समेत अन्य में राज्य सरकारों को भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है.
    सूत्रों के मुताबिक कुछ राज्यों को छोड़कर जब भी केंद्रीय गृह मंत्रालय किसी राज्य को उसके यहां कानून व्यवस्था को कंट्रोल करने के लिए अर्धसैनिक बल भेजता है, तो उस राज्य को एक अर्धसैनिक बल की कंपनी के लिए एक लाख 95 हजार 300 रुपये प्रति दिन के हिसाब से भुगतान करना पडता है.
    राम रहीम के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा में लगभग 180 अर्द्धसैनिक बलों की कंपनियां भेजी हैं. इस हिसाब से पंजाब और हरियाणा सरकार को अर्धसैनिक बलों की 180 कंपनी के लिए प्रतिदिन करीब 3 करोड़ 51 लाख 54 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं.

    जानें कौन हैं वह जज, जिन्होंने राम रहीम को करार दिया रेप का दोषी

    यौन शोषण के मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया है. इस फैसले पर देश भर की नजर लगी हुई है. राम रहीम के इस हाई प्रोफाइल मामले में फैसला सुनाने वाले हरियाणा के जींद के रहने वाले न्यायिक सेवा अधिकारी (जज) जगदीप सिंह हैं.  वह काफी सख्त मिजाज के जज माने जाते हैं. इसीलिए उन्होंने किसी दबाव में आए बिना उन्होंने सजा सुनाई और उन्हें यौन शोषण मामले में दोषी माना.

    जज से पहले क्रिमनल लॉयर थे

    डेरा प्रमुख राम रहीम की जिंदगी का फैसला सुनाने वाले जज जगदीप सिंह एडीजी स्तर के न्यायिक अधिकारी है. जगदीप सिंह  2012 में न्यायिक सेवा में आए थे. इससे पहले वह पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में क्रिमनल मामलों के वकील के रूप से सक्रिय थे. उन्होंने 2000 से लेकर 2012 तक अपराधिक मामलों के मुकदमे लड़ रहे थे.

    2002 में मामला सामने आया

    गौरतलब है कि 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान एक गुमनाम पत्र लिखकर डेरा प्रमुख राम रहीम पर एक साध्वी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था. ये पत्र प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और हाईकोर्ट को भेजा गया था. हाईकोर्ट ने इसे संज्ञान में लेकर कार्यवाही शुरू की और उसके बाद सीबीआई जांच शुरू हुई जिसकी परिणति आज फैसले के रूप में हो रही है.

     

    पुलिस की राम रहीम सर्मथकों को चेतावनी, चड़ीगढ़ में घुसने की कोशिश की तो होगी कार्रवाई

    पुलिस की राम रहीम सर्मथकों को चेतावनी, चड़ीगढ़ में घुसने की कोशिश की तो होगी कार्रवाई

    चंडीगढ़ : चंडीगढ़ पुलिस ने डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में घुसने की कोशिश की तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. पुरुषों, महिलाओं और बच्चों समेत डेरा के करीब 1.5 लाख अनुयायी पंचकूला में इक्ट्ठा हुए हैं, जहां सीबीआई की अदालत डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ बलात्कार के मामले में आज अपना फैसला सुनाएगी. सुरक्षा बल डेरा अनुयायियों से पंचकूला से जाने की अपील भी कर रहे हैं. पुलिस ने दोहराया है कि वह हाई अलर्ट पर है. 
     
    चंडीगढ़ में निषेधाज्ञा लागू 
    पुलिस ने गुरूवार रात एक बयान में कहा, ‘‘किसी भी डेरा अनुयायी को चंडीगढ़ में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.’’ अधिकारियों ने कहा, ‘‘यदि वे (डेरा अनुयायी) चंडीगढ़ में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.’’ उन्होंने बताया कि शहर में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है. बड़ी संख्या में डेरा अनुयायी पंचकूला में इक्ट्ठा हो गए हैं जिसके मद्देनजर चंडीगढ़ को पहले ही संवेदनशील घोषित कर दिया गया है.
    राम रहीम की अपील के बावजूद अनुयायियों ने किया जाने से इनकार
    डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने भी ने अपने अनुयायियों से पंचकूला से जाने की अपील की है. इसके बावजूद कई अनुयायियों ने जाने से इनकार कर दिया और वे यहां पार्कों एवं सड़कों के किनारे बैठे रहे. हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में मोबाइल इंटरनेट एवं डेटा सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं. डेरा के अनुयायियों ने शिकायत की है कि वह उस वीडियो को नहीं देख पाए जिसमें डेरा प्रमुख ने उनसे अपने घर लौटने की अपील की है. कई अनुयायियों ने यहां से जाने से इनकार कर दिया, ऐसे में सुरक्षा बलों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. अनुयायियों को कहना है कि वह अपनी मर्जी से शहर आए हैं और डेरा प्रमुख के ‘‘दर्शन’’ करने के बाद ही यहां से जाएंगे. 
    2002 में राम रहीम के खिलाफ उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया था
    डेरा प्रमुख के खिलाफ सीबीआई ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश पर 2002 में यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया था. राम रहीम सिंह द्वारा कथित तौर पर दो साध्वियों के यौन उत्पीड़न को लेकर अनाम चिट्ठियों के सामने आने के बाद अदालत ने यह निर्देश दिया था. डेरा प्रमुख ने इन आरोपों का खंडन किया है.

    7 साल की उम्र में ही डेरा सच्चा सौदा से जुड़ गए थे राम रहीम, दसवीं तक की है पढ़ाई

    7 साल की उम्र में ही डेरा सच्चा सौदा से जुड़ गए थे राम रहीम, दसवीं तक की है पढ़ाई

    हरियाणा: पंचकुला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार (25 अगस्त) को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया है. अदालत सजा पर फैसला 28 अगस्त को सुनाएगी. डेरा प्रमुख पर उनकी एक पूर्व शिष्या ने 2002 में दुष्कर्म का आरोप लगाया था.
    सात वर्ष की आयु में सिरसा में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख शाह सतनाम सिंह ने उन्हें अपना शागिर्द बना लिया और उन्हें राम रहीम नाम दिया. इसके 16 वर्ष बाद 1990 में सतनाम सिंह ने देश भर से अपने अनुयायियों को विशाल सत्संग के लिए आमंत्रित किया और उसमें 23 वर्षीय गुरमीत राम रहीम को उनका वारिस चुना गया.
    लाखों समर्थकों और अनुयायियों के बीच ‘पिताजी’ कह कर पुकारे जाने वाले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम का संबंध राजस्थान के एक गांव से हैं जहां वह अपने पिता के साथ खेतों में काम करते थे. डेरा प्रमुख का जन्म राजस्थान के श्री गंगानगर जिले के श्री गुरुसार मोदिया गांव में 15 अगस्त 1967 में एक जमींदार परिवार में हुआ था और बचपन में गुरमीत खेतों में अपने पिता की सहायता करते थे.
    दसवीं तक पढ़ाई करने वाले गुरमीत की पत्नी का नाम हरजीत कौर है और चरणप्रीत तथा अमनप्रीत नाम की उनकी दो बेटियां और एक बेटा जसमीत है. इसके अलावा उन्होंने एक बेटी गोद भी ली है. डेरा प्रमुख बनने के साथ ही राम रहीम ने दो वर्ष पहले ‘स्वदेशी और ऑर्गेनिक’ वस्तुओं की ‘एमजीआर’ रेंज शुरू की थी. उनका यह व्यवसाय उनके बच्चे संभाल रहे हैं जो कि यहां से 260 किलोमीटर दूर सिरसा में डेरा में ही रहते हैं.
    फिल्मों में आजमाए हाथ:
    राम रहीम ने 2014 में ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ नाम से फिल्म बनाई और उसमें प्रमुख भूमिका भी निभाई. अब तक वह तीन फिल्मों में काम कर चुके हैं जिसमें उन्हें बॉलीवुड के किसी सुपर स्टार की तरह खतरनाक स्टंट्स करते और नाचते गाते देखा जा सकता है.

    सीबीआई कोर्ट में रेप केस के अलावा बाबा राम रहीम पर एक पत्रकार राम चंदेर छत्रपति की हत्या से जुड़ा मामला भी चला

    राम रहीम के खिलाफ खबरें छापने पर कथित तौर पर हो गई थी इस पत्रकार की हत्या!


    मीडिया सूत्रों के मुताबिक सीबीआई कोर्ट में रेप केस के अलावा बाबा राम रहीम पर एक पत्रकार राम चंदेर छत्रपति की हत्या से जुड़ा मामला भी चला. यह वही पत्रकार है, जिसने सिरसा में हुए दो साध्वियों के साथ रेप की खबर अपने नई दिल्ली: साध्वी से यौन शोषण के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को शुक्रवार को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दे दिया है. राम रहीम के खिलाफ सजा का ऐलान 28 अगस्त को किया जाएगा. लेकिन यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी राम रहीम पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं. यौन शोषण के अलावा राम रहीम द्वारा कथित तौर पर की गई पत्रकार कि हत्या का आरोप भी लग चुका है. पत्रकार ने रहीम के करतूतों की पोल खोली थी. मीडिया सूत्रों के मुताबिक सीबीआई कोर्ट में रेप केस के अलावा राम रहीम पर एक पत्रकार राम चंदेर छत्रपति की हत्या से जुड़ा मामला भी चला. यह वही पत्रकार है, जिसने सिरसा में हुए दो साध्वियों के साथ रेप की खबर अपने अखबार 'पूरा सच' में छापी थी.
    मीडिया सूत्रों के मुताबिक इस खबर के प्रकाशित होने के बाद  24 अक्टूबर 2002 में छत्रपति के घर के बाहर कुछ अज्ञात लोगों ने गोलियों से छलनी कर उनकी हत्या कर दी गई. छत्रपति को घर से बुलाकर उन्हें पांच गोलियां मारी गई थीं. छत्रपति सच्चाई लिखने से नहीं चूकते थे, उनकी धारदार पत्रकारिता की तूती बोलती थी जिसके चलते वे काफी लोकप्रिय थे.
    और पढ़ें: रॉकस्टार, रॉबिनहुड और 'मैसेंजर ऑफ गॉड': बलात्कार के दोषी राम रहीम के कई चेहरे
    पत्रकार की हत्या के बाद बंद रहा शहर
    पत्रकार छत्रपति की हत्या के बाद 25 अक्टूबर 2002 को घटना के विरोध में सिरसा शहर बंद रहा. तब से लेकर आज तक पत्रकार के परिजन इस मामले में टकटकी लगाए बैठे हैं कि आखिर कब उन्हें न्याय मिलेगा. छत्रपति का बेटा अंशुल अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए लंबे वक्त तक संघर्ष करता रहा.
    तीन पेज की चिट्ठी में महिलाओं के शोषण की कहानी
    जिस गुमनाम चिट्ठी को पत्रकार छत्रपति ने अपने अखबार में छापा था, वह चिट्ठी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, चीफ जस्टिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, समेत कई संस्थानों में भेजी थी. तीन पेज की चिट्ठी में अज्ञात महिला ने गुरमीत राम रहीम के सिरसा आश्रम में चल रहे महिलाओं के शोषण की कहानी को बयां किया था.
    हाईकोर्ट ने लिया चिट्ठी का संज्ञान
    इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए सिरसा के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को इस गंभीर मामले की जांच कराने का आदेश दिया था.

    Friday, 18 August 2017

    भगवान विष्णु के वराह अवतार


    भगवान विष्णु के वराह अवतार


    वराह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से तृतीय अवतार हैं जो भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया को अवतरित हुए।

    हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु ने जब दिति के गर्भ से जुड़वां रूप में जन्म लिया, तो पृथ्वी कांप उठी। हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दोनों पैदा होते ही बड़े हो गए। और अपने अत्याचारों से धरती को कपांने लगते हैं। यद्यपि हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दोनों बलवान थे, किंतु फिर भी उन्हें संतोष नहीं था। वे संसार में अजेयता और अमरता प्राप्त करना चाहते थे।

    हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दोनों ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए बहुत बड़ा तप किया। उनके तप से ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए ,ब्रह्मा जी से अजेयता और अमरता का वरदान पाकर हिरण्याक्ष उद्दंड और स्वेच्छाचारी बन गया। वह तीनों लोकों में अपने को सर्वश्रेष्ठ मानने लगा।

    हिरण्याक्ष ने गर्वित होकर तीनों लोकों को जीतने का विचार किया। वह हाथ में गदा लेकर इन्द्रलोक में जा पहुंचा। देवताओं को जब उसके पहुंचने की ख़बर मिली, तो वे भयभीत होकर इन्द्रलोक से भाग गए। देखते ही देखते समस्त इन्द्रलोक पर हिरण्याक्ष का अधिकार स्थापित हो गया।

    जब इन्द्रलोक में युद्ध करने के लिए कोई नहीं मिला, तो हिरण्याक्ष वरुण की राजधानी विभावरी नगरी में जा पहुंचा। वरुण ने बड़े शांत भाव से कहा - तुम महान योद्धा और शूरवीर हो। तुमसे युद्ध करने के लिए मेरे पास शौर्य कहां? तीनों लोकों में भगवान विष्णु को छोड़कर कोई भी ऐसा नहीं है, जो तुमसे युद्ध कर सके। अतः उन्हीं के पास जाओ। वे ही तुम्हारी युद्ध पिपासा शांत करेंगे। 

    वरुण का कथन सुनकर हिरण्याक्ष भगवान विष्णु की खोज में समुद्र के नीचे रसातल में जा पजुंचा। रसातल में पहुंचकर उसने एक विस्मयजनक दृश्य देखा। उसने देखा, एक वराह अपने दांतों के ऊपर धरती को उठाए हुए चला जा रहा है।
    हिरण्याक्ष वराह को लक्ष्य करके बोल उठा,तुम अवश्य ही भगवान विष्णु हो। धरती को रसातल से कहां लिए जा रहे हो? यह धरती तो दैत्यों के उपभोग की वस्तु है। इसे रख दो। तुम अनेक बार देवताओं के कल्याण के लिए दैत्यों को छल चुके हो। आज तुम मुझे छल नहीं सकोगे। फिर भी भगवान विष्णु शांत ही रहे। उनके मन में रंचमात्र भी क्रोध पैदा नहीं हुआ। वे वराह के रूप में अपने दांतों पर धरती को लिए हुए आगे बढ़ते रहे।

    हिरण्याक्ष भगवान वराह रूपी विष्णु के पीछे लग गया। उन्होंने रसातल से बाहर निकलकर धरती को समुद्र के ऊपर स्थापित कर दिया। हिरण्याक्ष उनके पीछे लगा हुआ था। अपने वचन-बाणों से उनके हृदय को बेध रहा था।

    भगवान विष्णु ने धरती को स्थापित करने के पश्चात हिरण्याक्ष की ओर ध्यान दिया। उन्होंने हिरण्याक्ष की ओर देखते हुए कहा,तुम तो बड़े बलवान हो। बलवान लोग कहते नहीं हैं, करके दिखाते हैं। तुम तो केवल प्रलाप कर रहे हो। मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूं। तुम क्यों नहीं मुझ पर आक्रमण करते? बढ़ो आगे, मुझ पर आक्रमण करो।

    हिरण्याक्ष की रगों में बिजली दौड़ गई। वह हाथ में गदा लेकर भगवान विष्णु पर टूट पड़ा। भगवान के हाथों में कोई अस्त्र शस्त्र नहीं था। उन्होंने दूसरे ही क्षण हिरण्याक्ष के हाथ से गदा छीनकर दूर फेंक दी। हिरण्याक्ष क्रोध से उन्मत्त हो उठा। वह हाथ में त्रिशूल लेकर भगवान विष्णु की ओर झपटा।

    भगवान विष्णु ने शीघ्र ही सुदर्शन का आह्वान किया, चक्र उनके हाथों में आ गया। उन्होंने अपने चक्र से हिरण्याक्ष के टुकड़े-टुकड़े कर दिये। भगवान विष्णु के हाथों मारे जाने के कारण हिरण्याक्ष बैकुंठ लोक में चला गया।

    Sunday, 13 August 2017

    चाणक्य नीति : हिंदू धर्म का सही अर्थ,

    चाणक्य नीति : हिंदू धर्म का सही अर्थ, जीव मात्र पर दया है, पूरा प्रसंग पढ़कर आपको शाकाहारी होने पर गर्व होगा

    बहुत पुराणी बात है, एक बार मगध साम्राज्य में अकाल पद गया। मनुष्य तो मनुष्य पशु और पक्षी भी दो समय के भोजन के लिए तरसने लगे, राज्य में चरों ओर त्राहि त्राहि मच गया।  मगध सम्राट बिंन्दुसार ने एक आपात बैठक बुलाई  जिसमे राज्य के सभी गणमान्य लोगों के साथ समस्त मंत्रिमंडल भी उपस्थित था। 

    महाराज बिन्दुसार ने अपनी सभा मे पूछा- "देश की खाद्य समस्या को कैसे हल किया जाये तथा खाद्यान्न के विकल्प के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है, जो तुरंत उपलब्ध हो सके ?"

    समस्त मंत्री तथा अन्य गणमान्य प्रजाजन गहरी सोच में पड़ गये। चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि तो बहुत श्रम के बाद मिलते हैं और वह भी तब, जब प्रकृति का प्रकोप न हो, ऎसी परिस्थिति में अन्न तो सस्ता और सुलभ हो ही नहीं सकता। तभी शिकार में रूचि रखने वाले एक सामंत ने कहा -"सम्राट यदि आपकी आज्ञा हो तो मेरी सबसे सस्ता खाद्य है जो तुरंत उपलब्ध भी हो सकता है। सम्राट बिन्दुसार ने टपक से आज्ञा दी और पूछा- "हे सामंत वर ! बताइये क्या है वह खाद्य ?" तभी सामंत ने कहा कि- "महाराज वह पदार्थ है मांस, जो सर्व सुलभ और सबसे सस्ता विकल्प है, इसे पाने मे परिश्रम भी कम लगता है और पौष्टिक भोजन भी खाने को मिल जाता है ।" सभी ने सामंत के इस सुझाव का ध्वनिमत से समर्थन किया, किन्तु प्रधानमंत्री चाणक्य चुप थे । तब सम्राट ने उनसे पूछा -" आपका इस बारे में क्या मत है? प्रधानमंत्री जी !

    चाणक्य ने कहा - "मैं अपने विचार कल आप सबके समक्ष रखूंगा।  

    रात्रि होने पर प्रधानमंत्री चाणक्य उस सामंत के महल पहुंचे, सामन्त ने द्वार खोला तथा इतनी रात्रि में प्रधानमंत्री को अपने द्वार पर आया देखकर घबरा गया । प्रधानमंत्री ने कहा - आज सांयकाल के भ्रमण के पश्चात महाराज बिन्दुसार एकाएक अस्वस्थ हो गये हैं, राजवैद्य ने कहा है कि किसी बड़े गणमान्य के हृदय का दो तोला मांस मिल जाए तो राजा के प्राण बच सकते हैं।" इसलिए मैं आपके पास आपके हृदय का सिर्फ दो तोला मांस लेने आया हूं। इसके लिए आप एक लाख स्वर्ण मुद्रायें ले लें।

    यह सुनते ही सामंत के चेहरे का रंग उड़ गया, उसने प्रधानमंत्री के पैर पकड़ कर माफी मांगी और उल्टे एक लाख स्वर्ण मुद्रायें देकर कहा कि इस धन से वह किसी और सामन्त के हृदय का मांस खरीद लें । प्रधानमंत्री बारी-बारी सभी सामंतों, सेनाधिकारियों के यहां पहुंचे और सभी से उनके हृदय का दो तोला मांस मांगा, लेकिन कोई भी सहमत न हुआ, उल्टे सभी ने अपने बचाव के लिये प्रधानमंत्री को एक लाख, दो लाख, पांच लाख तक स्वर्ण मुद्रायें दीं ।

    इस प्रकार करीब दो करोड़ स्वर्ण मुद्राओं का संग्रह कर प्रधानमंत्री चाणक्य सवेरा होने से पहले वापस अपने महल पहुंचे और निर्धारित समय पर राजसभा में प्रधानमंत्री ने राजा के समक्ष दो करोड़ स्वर्ण मुद्रायें रख दीं ।

    सम्राट ने पूछा : यह सब क्या है? तब प्रधानमंत्री चाणक्य ने बताया कि दो तोला मांस खरीदने के लिए इतनी धनराशि इकट्ठी हो गई फिर भी दो तोला मांस नही मिला राजन ! अब आप स्वयं ही विचार करें कि मांस कितना सस्ता है?

    "जीवन अमूल्य है, हम यह न भूलें कि जिस तरह हमें अपना जीवन प्यारा  है, उसी तरह सभी जीवों को भी अपना जीवन प्यारा है । किंतु अंतर बस इतना है कि मनुष्य अपने प्राण बचाने हेतु हर सम्भव प्रयास कर सकता है । बोलकर, रिझाकर, डराकर, रिश्वत देकर, अन्याय करके आदि आदि । पशु न तो बोल सकते हैं, न ही अपनी व्यथा बता सकते हैं । तो क्या बस इसी कारण उनसे जीने का अधिकार छीन लिया जाय ? हिन्दू धर्म के अनुसार हर किसी को स्वेच्छा से जीने का अधिकार है, प्राणी मात्र की रक्षा हमारा धर्म है।"  

                                                   "शुद्ध आहार, शाकाहार,मानव आहार, शाकाहार।"  

                                       तभी पूरा दरबार प्रधानमन्त्री चाणक्य की जयकार से गूंज उठा। 

    -- 
    हिन्दू परिवार संघटन संस्था
     Cont No-08088080870

    Thursday, 10 August 2017

    Shri Krishna Janmashtami 2017 : जानें तिथि, मुहूर्त, नियम और महत्व

     जानें तिथि, मुहूर्त, नियम और महत्व

    श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्स्व है. जन्माष्टमी भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं.
    जानिये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और नियम ?
    - शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस दिन वृष राशि में चंद्रमा व सिंह राशि में सूर्य था. इसलिए श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव भी इसी काल में ही मनाया जाता है. लोग रातभर मंगल गीत गाते हैं और भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाते हैं.
    - इस बार अष्टमी 14 अगस्त को सायं 07.45 पर आरम्भ होगी और यह 15 अगस्त को सायं 05.40 पर समाप्त होगी.
    - रात्रि में अष्टमी तिथि 14 अगस्त को होगी. इसलिए इस बार जन्माष्टमी 14 अगस्त को मनाना उत्तम होगा.
    - मध्य रात्रि में श्रीकृष्ण का जन्म होगा और तभी जन्मोत्सव मनाया जाएगा.
    जानिये कृष्ण जन्माष्टमी का क्या है अर्थ और क्या है इसका महत्व
    - भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को होने के कारण इसको कृष्णजन्माष्टमी कहते हैं.
    - भगवान कृष्ण का रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी के निर्धारण में रोहिणी नक्षत्र का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं.
    - इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से संतान प्राप्ति ,आयु तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है.
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाकर हर मनोकामना पूरी की जा सकती है.
    - जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर हो वे आज विशेष पूजा से लाभ पा सकते हैं.
    'व्रतराज' का अनूठा अवसर
    जन्माष्टमी के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके व्रत को 'व्रतराज' कहा जाता है. मान्यता है कि इस एक दिन व्रत रखने से कई व्रतों का फल मिल जाता है. अगर भक्त पालने में भगवान को झुला दें, तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.
    Anand Nagshankar
    9448487317