Thursday, 20 December 2018

जो अंसारी पाकिस्तान की जेल से बाहर आया उस पर नजर है खुफिया एजेंसियों की… सवाल ये कि यही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं ?

जासूसी के मामलों में पकड़े गए कुछ अन्य भारतीय कैदियों के नाम व सजा
— गोपाल दास आरोप जासूसी, सजा हुई 24 वर्ष
— सुरजीत सिंह उर्फ मक्खन सिंह आरोप जासूसी, सजा हुई 22 वर्ष
— किरपाल सिंह आरोप जासूसी, पाकिस्तान की जेल में हुई मौत
— भानूदास काराले आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष
— रामराज आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष


हामिद अंसारी, ये पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी नहीं है बल्कि वो हामिद अंसारी है जो जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था तथा जिसे हाल ही में पाकिस्तान ने छोड़ा है. हामिद अंसारी पाकिस्तान से वापस हिंदुस्तान तो लौट आया है लेकिन जिस तरह से उसकी वापसी हुई है तथा पाकिस्तान से हामिद अंसारी पर दया दिखाई है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि जिस तरह से पाकिस्तान ने हामिद अंसारी पर दया दिखाई तथा उसको छोड़ दिया, वही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं दिखाई गई? सवाल ये भी है कि हामिद अंसारी की रिहाई के पीछे पाकिस्तान की कोई नापाक साजिश तो नहीं है ?
मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, पाकिस्तान से वापस आया हामिद निहाल अंसारी भारतीय सुरक्षा एजैंसियों के राडार पर रहने वाला है. इसका कारण ये है कि यह पहला मामला है जब पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में पकड़े गए किसी भारतीय कैदी को इतनी जल्द रिहा कर दिया है. इससे पहले जितने भी भारतीय कैदी जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में पकड़े गए हैं उनको लंबी सजाएं काटनी पड़ीं. यहां तक कि सरबजीत सिंह की तो पाकिस्तान की जेल में ह्त्या तक कर दी गई थी.  यही कारण है कि इस बात का शक एजैंसियों को रहेगा कि कहीं हामिद पाकिस्तान का मुखबिर न बन गया हो.
ज्ञात हो कि हामिद अंसारी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर था जिसका फेसबुक पर एक पाकिस्तान लड़की के साथ प्रेम हो गया था. हालाँकि ये पाकिस्तान का हनी ट्रैप था. उस तथाकथित पाकिस्तानी लड़की को मिलने के लिए हामिद गैरकानूनी ढंग से वर्ष 2012 में अफगानिस्तान के रास्ते पेशावर गया जहां उसको गर्लफ्रैंड की तरफ से बताए गए लॉज में जाना पड़ा लेकिन यहां पर गर्लफ्रैंड की बजाय पाकिस्तानी सुरक्षा एजैंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सुरक्षा एजेंसिया इस बात को लेकर चौकन्नी रहेंगी कि 2012 में गिरफ्तार अंसारी को 2018 में अर्थात 6 साल बाद पाकिस्तान ने छोड़ा है तो कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है, हामिद अंसारी को कहीं जासूस बनाकर तो नहीं भेजा गया?

Thursday, 13 December 2018

सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों

कमलनाथ की CM दावेदारी पर सिख विरोधी दंगों का साया, भाजपा और सिखों ने विरोध जताया
पहले से सीएम चुनने की मुश्किल में घिरी कांग्रेस की मुसीबत सिख नेताओं ने और भी बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में सीएम पद के लिए कमलनाथ का नाम लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि, इस नाम पर प्रदेश के बाहर से विरोध शुरू हो गया है।
दरअसल, सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों ने उनके सीएम बनने की राह में अड़चन पैदा कर दी हैं और पार्टी को एक बार फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में राहुल गांधी के लिए कमलनाथ के बारे में फैसला लेने आसान नहीं होने वाला है।
भाजपा ने पंजाब के सीएम का इस्तीफा मांगा
सिख विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली भाजपा से विरोध की आवाज उठने लगी है। भाजपा के दिल्ली प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा ने देर रात ट्वीट किया और लिखा, 'सुना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 1984 में हुए सिख नरसंहार के हत्यारे कमलनाथ को बतौर सीएम नियुक्त करना चाहते हैं। यह वही शख्स हैं, जिन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज (हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर जी का दाह संस्कार स्थल) में आग लगा दी थी। यह चीज एक बार फिर से दर्शाती है कांग्रेस सिख विरोधी पार्टी है।'
तजिंदर बग्गा (बाएं), एचएच फूलका (मध्य), कंवर संधू (दाएं)
एक अन्य ट्वीट में बग्गा ने कहा, 'जब राहुल गांधी ने 1984 के सिख हत्याकांड के जिम्मेदार कमलनाथ को पंजाब विधानसभा चुनाव का इंचार्ज बनाया था तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विरोध जताया था, जब तक की उन्हें हटा नहीं लिया गया। अगर राहुल गांधी सिखों के हत्यारे कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं तो कैप्टन अमरिंदर को विरोध जताया जताते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।'
पंजाब से भी उठे विरोध के स्वर
दिल्ली ही नहीं विरोध के स्वर पंजाब से उठते दिख रहे हैं। खरड़ से आम आदमी पार्टी की टिकट पर विधानसभा पहुंचे कंवर संधू और वरिष्ठ नेता एच एस फूलका ने कमलनाथ की दावेदारी पर ऐतराज जताया है। संधू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी को ये नहीं भूलना चाहिए कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कमलनाथ के बारे में क्या आम राय है।
फुलका ने कहा- कमलनाथ पर हैं दंगों के दाग
कुछ इसी तरह की बात सिख नेता और वकील एचएस फूलका ने कमलनाथ को लेकर कही। उन्होंने कहा कि भले ही कमलनाथ को 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर किसी आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा लेकिन अभी भी ऐसे गवाह हैं जो बताते हैं कि कमलनाथ राकबगंज के पास की भीड़ को उकसा रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी होने का दावा करती है। उसे ऐसे लोगों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
अकाली दल ने कहा- दंगों के आरोपितों को बचा रहा गांधी परिवार
उधर, अकाली दल ने भी कांग्रेस पर सिख दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने का आरोप लगाया है। पार्टी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, 'जब भी गांधी परिवार सत्ता में आता है तो ये लोग 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के जिम्मेदारों को बचाने का काम करते हैं। अब राहुल कमलनाथ को सीएम पद से नवाज रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी शायद ये संदेश देना चाहते हैं कि सिखों की हत्या में शामिल लोगों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है, वे उनके साथ हैं और उन्हें ईनाम भी देंगे।' सिरसा ने कहा कि अगर राहुल गांधी कमलनाथ को सीएम बनाते हैं तो उन्हें सिखों के गुस्से का सामना करना होगा।

Wednesday, 12 December 2018

श्रद्धालुओं को रेलवे ने दी बड़ी खुशखबरी, कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें

कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें
कुंभ मेला एक जनवरी से है। इसके मद्देनजर कानपुर सेंट्रल स्टेशन अलर्ट मोड पर रहेगा। देशभर से प्रयागराज के लिए आठ सौ स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसमें 622 मेला स्पेशल ट्रेनें अकेले उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद जोन की होंगी।
इन ट्रेनों की धुलाई और उन्हें खड़े करने की व्यवस्था कानपुर से फतेहपुर के बीच अलग-अलग स्टेशनों की लूप लाइनों और यार्ड में होेगी। एनसीआर ने रेलवे बोर्ड से 622 ट्रेनों केलिए 1400 कोच मांगे हैं। यह स्पेशल ट्रेनें 20 कोच की होंगी। रेलवे 13 जनवरी से छह मार्च तक यह व्यवस्थाएं जारी रखेगा।
डेमो पिक
न्यू वाशिंग लाइन में होगी सफाई
जीटी रोड स्थित न्यू अॉटोमेटिक वाशिंग लाइन में अॉटोमेटिक मशीनों से ट्रेनों के कोचों की सफाई होगी। इलाहाबाद और कानपुर में यह व्यवस्था रहेगी। इस रूट की ट्रेनों में बायो टॉयलेट वाले कोच होंगे। स्पेशल ट्रेनों की 70 रेक तैयार होंगी। नियमित ट्रेनों में भी 61 अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे।
कुंभ का सुखद एहसास
स्पेशल ट्रेनों को कुंभ मेले की थीम पर तैयार किया जा रहा है। कोचों पर विनायल रैपिंग की जा रही है। कुंभ, प्रयाग, संगम और प्रमुख इमारतों की तस्वीरों से श्रद्धालुओं को कुंभ मेले का सुखद एहसास होगा।
800 में 622 स्पेशल ट्रेनें उत्तर मध्य रेलवे चलाएगा। इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों के संचालन और उनके रखरखाव में कानपुर की प्रमुख भूमिका होगी। यहां धुलाई, सफाई और ट्रेनों को खड़ा करने की व्यवस्था होगी। कुंभ आने-जाने वालों के लिए कानपुर प्रमुख प्वाइंट होगा।

रोहिंग्याओं के लिए म्यांमार में घर बनवाए भारत की सरकार

कश्मीरी हिन्दू अब तक भटक रहे छत की तलाश में

भारत की वर्तमान सरकार ने वादा तो किया था कि वह सत्ता में आने पर कश्मीरी हिन्दुओं(पंडितों) की कश्मीर में पुनर्वापसी करायेगी, उनके लिए आवास उपलब्ध करायेगी. भाजपा की मोदी सरकार को सत्ता में आये साढ़े चार साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कश्मीरी हिन्दू छत पाने के लिए भटक रहे है. एकतरफ कश्मीरी हिन्दुओं को भाजपा की सरकार आवास उपलब्ध नहीं करा पाई लेकिन म्यांमार में रोहिंग्यओं के लिए भारत सरकार ने घर बनवाकर तैयार कर दिए हैं.
खबर के मुताबिक़, भारत ने मंगलवार को रखाइन राज्य में विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए पहले 50 घरों को म्यांमार को सौंप दिया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनके म्यांमार समकक्ष यू विन मिंट के बीच यहां प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद यह घर सौंपे गए. राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने वार्ता के बाद म्यांमार में न्यायाधीशों की और न्यायिक अधिकारिकों की क्षमता निर्माण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए. राष्ट्रपति का तीन दिवसीय पूर्वी पड़ोसी देश दौरा यहां राष्ट्रपति भवन में एक औपचारिक स्वागत के साथ शुरू हुआ.
बता दें कि भारत ने पिछले साल के अंत में रखाइन के लिए एक विकास कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विस्थापित व्यक्तियों के लौटने के लिए घर निर्माण में म्यांमार सरकार की सहायता करने की बात कही गई थी. इस विकास परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत ढाई सौ घर बनाने की योजना बनाई गई है. कोविंद के दौरे के साथ ही म्यांमार ने भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा की भी घोषणा की है. राष्ट्रपति भवन के बयान के मुताबिक, कोविंद ने वार्ता के दौरान कहा कि भारत, म्यांमार के साथ अपने संबंधों को विशेष प्राथमिकता देता है.
राष्ट्रपति भवन के बयान में कहा गया, “म्यांमार, भारत की एक्ट ईस्ट और पड़ोसी पहले नीतियों के लिए एक मुख्य साझेदार है.” बयान के मुताबिक, “राष्ट्रपति कोविंद ने म्यांमार को भारत से दक्षिणपूर्व एशिया व आसियान की ओर जाने के लिए ‘नेचुरल ब्रिज’ करार दिया.” कोविंद ने म्यांमार की विकास योजनाओं में भारत की भागीदारी पर गर्व जताते हुए म्यांमार से अधूरी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए समर्थन भी मांगा. भारत, म्यांमार और थाईलैंड को जोड़ने वाला एक त्रिपक्षीय राजमार्ग फिलहाल निर्माणाधीन है.
राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में म्यांमार की स्टेट काउंसेलर आंग सान सू की व दो अन्य नेताओं से भी मुलाकात की और विभिन्न द्विपक्षीय व बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की. बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति ने कहा कि भारत, म्यांमार में जारी सुधारों की दिल से प्रशंसा करता है.” उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि यह वक्त म्यांमार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसकी राष्ट्रीय शांति प्रक्रिया के प्रति भारत का पूर्ण समर्थन है.” कोविंद म्यांमार के अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान यांगून की भी यात्रा करेंगे. यह भारत के साथ जमीनी सीमा को साझा करने वाले देश का उनका पहला दौरा होगा.

Saturday, 8 December 2018

बुलंदशहर में बजरंग दल के साथ खड़ा था सिर्फ सुदर्शन न्यूज़

आखिर सामने आने लगा सच


बुलंदशहर हिंसा में मीडिया ट्रायल में मुख्य आरोपी बताये जा रहे बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. बुलंदशहर मामले को लेकर जब जब बजरंग दल तथा योगेश राज को सीधे आरोपी बताते हुए उनका मीडिया ट्रायल किया जा रहा था, उस समय सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ ही था जो बजरंग दल के साथ खड़ा हुआ था. ताजा जानकारी के मुताबिक़, एसआईटी और एसटीएफ की अब तक की जांच में बजरंगदल के जिला संयोजक योगेश राज के खिलाफ बुलंदशहर हिंसा के कोई सबूत नहीं पाए गए हैं. सभी वीडियो में वह सिर्फ पुलिस अधिकारियों से बातचीत और भीड़ को शांत करता दिख रहा है.
जांच अफसर मान रहे हैं कि योगेश राज भीड़ को उकसाने का दोषी जरूर हो सकता है, लेकिन हिंसा करने जैसे सुबूत उसके खिलाफ नहीं मिले हैं. माना जा रहा है कि ठोस सबूत हासिल नहीं होने की वजह से ही पुलिस अधिकारी उसकी गिरफ्तारी से बच रहे हैं. बता दें कि तीन नवंबर को गोकशी के बाद बुलंदशहर में हुई हिंसा में योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया गया है. सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में नामजद 27 लोगों की सूची में योगेश का नाम पहले नंबर पर है. मेरठ रेंज आईजी रामकुमार वर्मा के नेतृत्व में एसआईटी हिंसा की जांच कर रही है. वहीं एसटीएफ को नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी में लगाया है.
सूत्रों ने बताया, एसआईटी को इस केस में अब तक 50 से ज्यादा वीडियो प्राप्त हुई हैं. किसी भी वीडियो में योगेश राज द्वारा हिंसा करने जैसे सुबूत नहीं पाए गए हैं. सिर्फ चार-पांच वीडियो में वह दिख रहा है. एक वीडियो में स्याना सीओ सत्यप्रकाश शर्मा उसे शांत कर एक तरफ ले जाते हुए दिख रहे हैं. दूसरी वीडियो में योगेश राज भीड़ को शांत होने के लिए बोल रहा है. पथराव, आगजनी से जुड़ी किसी भी वीडियो में वह मौजूद नहीं पाया गया है. इन सब चीजों को देखते हुए पुलिस योगेश को गिरफ्तार नहीं कर रही है. हालांकि कहने को उसकी गिरफ्तारी में पूरे मेरठ जोन की पुलिस और एसटीएफ लगी हुई है. सूत्रों का दावा है कि योगेश को जल्द हिंसा के आरोपों से क्लीन चिट दी जा सकती है.

Thursday, 29 November 2018

2019 में संगम नगरी इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले के शाही स्‍नान की तारीख का ऐलान हो चुका है।

यह शाही स्नान 14 जनवरी से शुरू होगा।

मुहूर्त और व्रत विधि

संगम नगरी इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले के शाही स्‍नान की तारीख का ऐलान हो चुका है। यदि आप भी अगले साल कुंभ मेले में स्‍नान करने की सोंच रहे हैं तो यहां जानें शाही स्नान की तारीख...
2019 कुंंभ मेले की शाही स्नान की तारीख-
14-15 जनवरी 2019: मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
21 जनवरी 2019: पौष पूर्णिमा
31 जनवरी 2019: पौष एकादशी स्नान
04 फरवरी 2019: मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान)
10 फरवरी 2019: बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
16 फरवरी 2019: माघी एकादशी
1 9 फरवरी 2019: माघी पूर्णिमा
04 मार्च 2019: महा शिवरात्री

Tuesday, 27 November 2018

अब कश्मीरी पंडितों ने उठाई मांग

करीब 15 सौ साल पुरानी उस शारदा पीठ की PoK में है.70 साल बीत चुके हैं वहां किसी हिंदू को जाने की इजाज़त नहीं मिली है.

कश्मीरी पंडित अपनी कुलदेवी तक पहुंचने के लिए लड़ रहे हैं लड़ाई*
आस्था के केंद्र इस मंदिर तक पहुंचना और एक बार फिर से यहां पूजा करना कश्मीरी पंडितों की जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद बन चुका है.अपनी कुलदेवी तक पहुंचने के लिए वो एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं.1947 यानी वो साल जब तक पाकिस्तान का कश्मीर के उस हिस्से पर (PoK) कब्जा नहीं था तब तक हर कश्मीरी पंडित कुलदेवी शारदा के दर्शन के लिए जाते थे. शारदा पीठ में जयकारे गूंजते थे लेकिन पाकिस्तान ने जैसे ही कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा किया उस मंदिर का संपर्क हिंदुओं से खत्म हो गया.हालात ये है कि अब शारदा पीठ सिर्फ नाम के लिए मंदिर है क्योंकि वो खंडहर में तब्दील हो चुका है.
क्या है शारदा पीठ का महत्व*
करीब 15 सौ साल पुरानी उस शारदा पीठ की PoK में है.70 साल बीत चुके हैं वहां किसी हिंदू को जाने की इजाज़त नहीं मिली है. अब तो वो इलाका आतंकियों के कब्जे में है.शारदा शक्तिपीठ प्राचीन काल से ही पूरे विश्व में हिंदुओं और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए शिक्षा का एक बड़ा केंद्र रहा है.यह पीठ नीलम और मधुमति नदी के संगम पर पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद से 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.आजादी के पहले अगस्त में यहां वार्षिक यात्रा आयोजित होती थी.दोनों देशों के बीच 2004 में हुए एक समझौते के तहत नियंत्रण रेखा के दोनों ओर की आबादी को आने-जाने में रियायत दी गई ताकि वह अपने रिश्तेदारों से भी मिल सके और माता के दर्शन भी कर सकें.इस दौरान सेव शारदा संगठन ने इस समझौते में शारदा पीठ की यात्रा को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा था. तभी से ये मांग उठती आ रही है.



Sunday, 4 November 2018

कांग्रेस अध्यक्ष दावा कर रहे “जीसस राज्य” लाने का.. रामराज्य को सांप्रदायिक बताने वाले बुद्धिजीवी खामोश

 कांग्रेस अध्यक्ष दावा कर रहे “जीसस राज्य” लाने का.. रामराज्य को सांप्रदायिक बताने वाले बुद्धिजीवी खामोश
तेलंगाना कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन एन. उत्तम कुमार रेड्डी 
ने ने गिरिजाघरों के पादरियों से वादा किया की उनको दो बैडरूम वाला घर दिया जायेगा, उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा, पांच लाख का हेल्थ और एक्सीडेंट बीमा और राज्य के सभी गिरिजाघरों को मुफ्त बिजली दी जाएगी. उनका कहना था कि इस समुदाय के विद्यार्थियों को स्व रोजगार के लिए क़र्ज़ के साथ 30,000 रुपये महीने का बेरोजगाज़री भत्ता, हॉस्टल और स्किल डेवलपमेंट की सुविधा अलग से दी जाएगी. नए गिरिजाघरों को बनाने के लिए भी उन्होंने ज़मीन देने का वादा किया साथ की उन पूजास्थलों की C.B.I. जांच की भी मांग की जहाँ पर जमीन विवाद चल रहा हैं. उन्होंने ईसाइयों की सामाजिक-आर्थिक दशा की जानकारी के लिए एक न्याययिक कमीशन बनाने का भी वादा किया. उन्होंने क्रिस्चियन फेडरेशन को कई सौ करोड़ का फण्ड देने का भी वादा किया.
जब कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या फिर कोई भी भाजपा नेता रामराज्य की बात करता है तो देश का तथाकथित सेक्यूलरिज्म खतरे में आ जाता है तथा तमाम बुद्धिजीवी रामराज्य की परिकल्पना को सांप्रदायिक बताने लगते हैं. भारतीय जनता पार्टी के तेलंगाना के गोशामहल से विधायक तथा फायरब्रांड हिन्दू राष्ट्रवादी नेता टाइगर राजा सिंह ने अपने ट्विटर पर एक लिंक साझा किया है जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ख़ास तथा तेलंगाना कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने दावा किया है कि अगर तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनती है तो वह तेलंगाना में जीसस राज्य लायेगी.

Tuesday, 25 September 2018

करोड़ रुपये कमाता है ये भारतीय कारोबारी

एक दिन में 300 करोड़ रुपये कमाता है ये भारतीय कारोबारी

उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने लगातार सातवीं बार 'बर्कले हुरुन -2018' में सबसे अमीर भारतीय के रूप में शीर्ष पर जगह बनाई है. इस लिस्ट के अनुसार अंबानी की हर दिन की कमाई में करोड़ों का इजाफा हुआ है. आइए जानते हैं अंबानी एक दिन में कितने रुपये कमाते हैं और उनकी कुल संपत्ति कितनी है...
इस सूची में दूसरे स्थान पर एस. पी. हिन्दुजा एंड फैमिली है, जिनकी अनुमानित संपत्ति 1,59,000 करोड़ रुपये है.
तीसरे स्थान पर आर्सलर मित्तल की एल. एन. मित्तल एंड फैमिली है, जिनकी अनुमानित संपत्ति 1,14,500 करोड़ रुपये है.

इनके बाद विप्रो के अजीम प्रेमजी का नाम है, जिनकी संपत्ति 96,100 करोड़ रुपये है.
सन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड के दिलीप संघवी की संपत्ति 89,700 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक के उदय कोटक की संपत्ति 78,600 करोड़ रुपये है. (दिलीप संघवी)
वहीं सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साइरस पूनावाला की संपत्ति 73,000 करोड़ रुपये, अडानी समूह के गौतम अडानी एंड फैमिली की संपत्ति 71,200 करोड़ रुपये और शापूर जी पालोनजी मिस्त्री के साइरस पी. मिस्त्री की संपत्ति 69,400 करोड़ रुपये है.

सालाना सूची में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाले अमीरों को शामिल किया जाता है. देश में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति रखनेवालों की संख्या साल 2017 में 617 थी, जो साल 2018 में बढ़कर 831 हो चुकी है. 







Tuesday, 11 September 2018

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश की मुश्किलें कम होने का नाम ही ले रही हैं

एक बड़े नेता का दावा- "अपनी माँ को चुडैल कहते हैं अखिलेश यादव"
अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए अमर सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के अवसान का सबसे बड़ा कारण है उत्तर प्रदेश जो राम का देश है. राम जिन्होंने अपनी सौतेली माता कैकई को मां कहा, सौतेले भाई भरत को भाई कहां और अपने पिता की आज्ञा पर वह वनवास गए, उस के विपरीत अखिलेश अपनी सौतेली मां साधना को जादूगरनी और चुड़ैल कहते हैं. सौतेले भाई प्रतीक को नहीं मानते, अपने बूढ़े बाप के कहने पर वनवास ना जाने के बजाए उन्हीं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. अब तो ऐसी नौबत आ गई कि वो कहावत चरितार्थ होने लगी है- रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा बेटा अखिलेश करेगा राज और बूढ़ा बाप मुलायम जंगल को जाएगा. अमर सिंह से जब पूछा गया कि आप पर समाजवादी पार्टी को तोड़ने का आरोप है, इसके जवाब में अमर सिंह ने कहा कि ना मैं उनके बाप से बात करता हूं ना उनके चाचा से बात करता हूं ना अखिलेश से बात करता हूं तो पार्टी कैसे तोडूंगा.आज समाजवादी पार्टी जिस अवसान की ओर जा रहे रही है उसका कारण खुद अखिलेश हैं जिन्होंने राम की धरती से आने बाद भी राम की परंपराओं का अपमान किया है. इसके अलावा अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी के कद्द्दावर नेता अमर सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना मुग़ल आक्रान्ता अलाउद्दीन खिलजी से की जो महिलाओं की इज्जत नहीं करता था तथा उसी तरह आज़म खान ने उनकी बेटियों को तेज़ाब से नहलाने की धमकी दी थी.

Saturday, 1 September 2018

सामने आ रहा सोना घोटाला.. जानिये कहाँ गया देश का सोना और किसने लूटा उसे बस कुछ साल पहले ?

कांग्रेस को अब तक की सबसे करारी हार मिली मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार तो चली गयी लेकिन घोटालों का जिन्न अभी तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा ह

मनमोहन सरकार में इतने घोटाले सामने आये कि घोटालों की आंधी में ही देश की जनता ने मनमोहन सरकार को ही उड़ा दिया. कांग्रेस को अब तक की सबसे करारी हार मिली मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार तो चली गयी लेकिन घोटालों का जिन्न अभी तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा है. जी हां.. इसी बीच एक और घोटाला सामने आया है, जिसका नाम है "सोना घोटाला"..इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि ये घोटाला भी मनमोहन सिंह की UPA2 सरकार के दौरान हुआ था.घोटाला मनमोहन सरकार के आख़िरी ७ दिनों में हुआ था. CBI ने यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल की गोल्ड इंपोर्ट स्कीम की जांच दोबारा शुरू कर दी है. CBI के हाथ कुछ नए सुराग भी लगे हैं. नए सुराग 80:20 गोल्ड इंपोर्ट स्कीम में घोटाले की ओर इशारा कर रहे हैं. खास बात यह है कि ये घोटाला 2 के कार्यकाल के आखिरी 7 दिनों का है. जिसमें उन्होंने कुछ ज्वेलरी कंपनियों की मांग को बिना जांच के फटाफट मान लिया था. इस मामल में तमिलनाडु के कुछ ज्वेलर्स की ओर से आवेदन किए गए थे. जानकारी के मुताबिक़, तमिलनाडु के 6 ज्वैलर्स ने 80:20 गोल्ड इंपोर्ट स्कीम की शर्तों में ढील देने की मांग करते हुए यूपीए सरकार को आवेदन दिए थे. इन आवेदनों की समीक्षा के बिना ही मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी हफ्ते में उनकी मांग को फटाफट मान लिया था. इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक, इस मामले की नए सिरे से CBI ने जांच शुरू की तो कुछ नए सुराग हाथ लगे. आखिरी 7 दिन की बात भी नए सुराग के तहत ही पता चली है. इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने रखा गया है. यह दूसरा मौका है, जब सीबीआई इस मामले में प्रिलिमिनरी इंक्वायरी शुरू कर चुकी है.यूपीए-2 सरकार को सभी छह आवेदन तमिलनाडु से दिए गए थे. आवेदन की भाषा, फॉर्मैट से लेकर की गई मांग सहित सबकुछ एक जैसा था. हालांकि, आवेदनों की तारीख अलग थी, लेकिन सभी फरवरी 2014 में दिए गए थे. आरबीआई ने आम चुनाव का नतीजा आने के बाद इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था. ये 6 कंपनियां उन 7 कंपनियों की पहली लिस्ट से अलग हैं. पहले की 7 कंपनियों में डायमंड ज्वेलर्स नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी की कंपनियां शामिल थीं. सूत्रों के मुताबिक, जांच में उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिन पर मई 2014 से पहले निर्णय लिए गए थे. जांच के दायरे में वह सभी लोग आ सकते हैं, जो 2 के आखिरी कुछ महीनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े थे. जांच अधिकारियों को शक है कि उन आवेदनों का इस्तेमाल गोल्ड इंपोर्ट स्कीम में बदलाव करने की जमीन तैयार करने के लिए किया गया था.यूपीए 2 के कई टॉप नेताओं और आरबीआई के अधिकारियों की भूमिका पर नजर है. एजेंसियों की नजर इस बात पर भी है कि क्या आरबीआई को नई सरकार बनने तक इंतजार करने को कहा गया था. 2016 में CAG रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस स्कीम से सरकारी खजाने को एक लाख करोड़ रुपए की चपत लगी. एनडीए सरकार ने नवंबर 2014 में यह स्कीम रद्द कर दी थी. सूत्रों के मुताबिक, इस स्कीम की सीबीआई की पिछली पीई 'सबूत न मिल पाने के कारण' फंस गई थी. हालांकि, एजेंसी को अब विश्वास है कि वह नए सबूतों की मदद से इसे रेगुलर केस में बदल लेगी. इस मामले में पिछले कुछ दिनों में विभिन्न एजेंसियों के बीच तीन उच्चस्तरीय बैठक हुई हैं. एजेंसियों की प्राथमिकता एक आपराधिक मामला बनाने की है.

अपने कड़वे प्रवचनों के जरिये शिराओं में बर्फ हो चुके रक्त को राष्ट्रभक्ति व धर्म अनुराग का लावा बनकर प्रवाहित कराने वाले जैन मुनि तरुण सागर जी हुए देवलोकवासी

कड़वे प्रवचन देने वाले प्रख्यात जैन मुनि तथा राष्ट्र संत तरुण सागर जी महाराज का आज निधन हो गया. रतलब है कि, 20 दिन पहले उन्हें पीलिया हुआ था. जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्होंने इलाज कराने से मना कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास जाने का निर्णय किया था. बताया जा रहा है कि वे संथारा प्रथा का पालन कर रहे थे और उन्होंने दवाइयां लेने से इंकार कर दिया था. जैन संप्रदाय के लोग संथारा प्रथा के तहत अन्न-जल छोड़ देते हैं, इसका लक्ष्य जीवन को ख़त्म करना होता है. जैन संप्रदाय की मान्यता के अनुसार इस तरह 'मोक्ष' प्राप्त किया जा सकता है. आज शनिवार देर रात करीब 3.30 बजे जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज ने 51 वर्ष की आयु में अपना शरीर छोड़ दिया तथा महाप्रयाण पर चले गये. जैन मुनि के निधन की खबर आने के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गयी है तथा न केवल जैन समाज अपितु सर्व समाज जैन मुनि के देवलोकगमन पर शोकाकुल है तथा उन्हें अपने अपने तरीके से अंतिम विदाई दे रहा है. निश्चित रूप से जैन मुनि एक सच्चे राष्ट्र संत थे जिन्होंने अपनी शब्द अग्नि से शिराओं में बर्फ बन चुके रक्त को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक दायित्व व धर्म अनुराग का लावा बनकर प्रवाहित कराया तथा लोगों में नई चेतना पैदा की.जैन मुनि तरुण सागर का असली नाम पवन कुमार जैन था. उनका जन्म 26 1967 को ग्राम गुहजी, जिला दमोह, राज्य मध्य प्रदेश में हुआ था. कहा जाता है कि उन्होंने 1981 में घर छोड़ दिया था. जिसके बाद उनकी शिक्षा दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई थी. तरुण सागर अपने कड़वे प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध थे. इसी वजह से उन्हें क्रांतिकारी संत भी कहा जाता था. जैन मुनि पर आधारित किताब कड़वे प्रवचन एक वक्त काफी प्रख्यात हुई थी. समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करके के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए हैं. जैन मुनि तरुण सागर को मध्यप्रदेश सरकार ने 6 फरवरी 2002 को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था. बता दें कि, भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में जैन-मुनि के भक्त रहते हैं. तरुण सागर जी की लोकप्रियता जैन समुदाय के बाहर भी थी. जितना सम्मान तरुण सागर जी को जैन समाज देता था उतना ही सम्मान उन्हें जैन समाज के बाहर से मिलता था. जैन मुनि के बारे में कहा जाता है कि उनके शब्दों में वो आग थी जो पूरी तरह से सुसुप्त हो चुकी इंसानी चेतना को भी क्रान्ति के धर्मपथ पर अग्रसर कर देती थी.

Friday, 6 July 2018

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू असुरक्षित !



बांग्लादेश में धर्मांधोंद्वारा हिन्दू सरकारी कर्मचारी चंदनकुमार घोष की हत्या 


ढाका : बांग्लादेश में जेसूर जिले के कोटवाली पुलिस थाना अधिकारक्षेत्र के बसेपरा में महंमद हसिबूर रेहमान एवं उसके अन्य ३ धर्मांध साथियों ने मिलकर हिन्दू सरकारी कर्मचारी चंदनकुमार घोष की हत्या की । बांग्लादेश का हिन्दू संगठन बांग्लादेश माईनॉरिटी वॉचद्वारा इस हत्या प्रकरण के अपराधियों के विरोध में कठोर कार्रवाई की मांग की गई है ।

१. चंदनकुमार घोष लेखापरीक्षक (ऑडिटर)के रूप में ढाका में सरकारी सेवा में कार्यरत थे । वे २० जून को साईकल रिक्शा में ढाका से बसेपरा गांव, अपने घर जा रहे थे । तब महंमद हसिबूर रेहमान एवं उसके ३ मुसलमान साथियों ने मिलकर सडक पर ही छुरा भोंपकर उनकी हत्या की और उनकी बटुआ एवं भ्रमणभाष लुट लिया ।

२. इस हत्या प्रकरण में महंमद हसिबूर रेहमान को बंदी बनाया गया है । उसे जेसूर न्यायदंडाधिकारी के सामने उपस्थित करनेपर उसने हत्या के अपराध की स्वीकृति दे दी है । पुलिसकर्मियों ने इस हत्या प्रकरण में उसके ३ अन्य सहयोगियों के सहभाग की भी पुष्टि की है ।

३. इस हत्या की जानकारी मिलते ही बांग्लादेश माईनॉरिटी वॉच के अध्यक्ष अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष ने कोटवाली पुलिस थाने में भेंट दे कर वहां के अधिकारियों के साथ चर्चा की एवं इस प्रकरण का अन्वेषण कर सभी अपराधियों को तुरंत बंदी बनाने की मांग की ।

४. अधिवक्ता श्री.रवींद्र घोष ने मृत चंदनकुमार घोष के परिवार से भेंट की । अधिवक्ता श्री. घोष ने इस दुखी परिवार को सांत्वना धनराशि देने की एवं मृत व्यक्ति की पत्नी और उनके बच्चों को सरकारी नौकरी देने की मांग की है !

Saturday, 23 June 2018

जानिए कौन हैं वो कश्मीर के 21 कलंक जिनके सर पर नाच रही है मौत ??

हिंदुस्तान का मणिमुकुट कहे जाने वाले कश्मीर की पावन भूमि को लहूलुहान करने वाले इस्लामिक आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना आख़िरी वार को तैयार है.
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगने के बाद भारतीय सेना आक्रामक मूड में तथा आतंकियों के सफाये के लिए प्रतिबद्ध है. अब जो खबर सामने आ रही है वो न सिर्फ आतंकी बल्कि इन आतंकियों के समर्थकों पर कहर बनकर गिरने वाली है. खबर के मुताबिक, कश्मीर में आपरेशन ऑल आउट के दूसरे चरण में सुरक्षाबलों निशाने पर 21 मोस्ट वांटेड आतंकी हैं. इनमें तीन पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल हैं.सुरक्षाबलों ने इनके सफाये के लिए पूरा एक्शन प्लान तैयार कर लिया है. हाल में तैयार की गई इस सूची में कुल 22 आतंकी शामिल थेजिनमें से एक आतंकी दाऊद अहमद सोफी को सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को मार गिराया है। यह आईएसजेके संगठन से जुड़ा था.आतंकियों की इस लिस्ट के बारे में जानकारी मिली हैं कि सुरक्षाबलों की इस सूची में शामिल मोस्ट वांटेड आतंकियों में सबसे ज्यादा 11 हिजबुल मुजाहिदीन के हैं. इनमें मोहम्मद अशरफ खानर्फ अशरफ मौलवी मूलत अनंतनाग का निवासी है तथा सितंबर 2016 में हिजबुल में भर्ती हुआ था. वह ए प्लस श्रेणी का आतंकी है. जबकि अल्ताफ मोहम्मद डार उर्फ अल्ताफ काचरू कुलगाम निवासी है तथा ए डबल प्लस श्रेणी का आतंकी है.वह 2006 से सक्रिय है तथा दक्षिण कश्मीर में हिजबुल का डिविजन कमांडर भी है. इसी प्रकार कुलगाम का आतंकी मोहम्मद अब्बास शेख, ए प्लस आतंकी है तथा 2015 में भर्ती हुआ था. उमर माजिद गनाई ए डबल प्लस श्रेणी, सैफुल्ला मीर (ए श्रेणी), जीनत उल इस्लाम, ए डबल प्लस श्रेणी, रियाज अहमद निक्कू (ए++), लतीफ अहमद डार उर्फ हारुन (ए) तथा उमर फैयाज लोन (ए) शामिल हैं. इन आतंकियों में मन्नान वाणी भी है जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का शोधकर्ता रह चुका है. कुपवाड़ा निवासी मनन इसी साल जनवरी में आतंकी संगठन में भर्ती हुआ था तथा वह बी श्रेणी का आतंकी है. जुनैद अशरफ बी श्रेणी का आतंकी है तथा वह तहरीक ए हुर्रियत के चैयरमैन का बेटा है. इसी साल मार्च में वह आतंकी बना था.सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इसके अलावा सूची में लश्कर ए तैय्यबा के कुल सात आतंकी शामिल हैं. इनमें अबु मुस्लिम पाकिस्तान से आया आतंकी है. उसे ए प्लस श्रेणी में रखा गया है तथा 2017 से वह घाटी में सक्रिय है. पाकिस्तान का दूसरा आतंकी अबु जरगाम उर्फ मोहम्मद भाई भी है. जो2015 से सक्रिय है तथा ए प्लस श्रेणी का आतंकी है. तीसरा पाकिस्तान आतंकी मोहम्मद नावेद (ए प्लस) है जो 2012 से सक्रिय है. लश्कर के अन्य आतंकियों में आजाद अहमद मलिक उर्फ दादा (ए), शकूर अहमद डार (ए प्लस), रियाज अहमद डार (ए) तथा शोपियां निवासी मुस्ताक अहमद मीर (ए डबल प्लस) शामिल हैं. इस लिस्ट में जैश ए मोहम्मद के दो आतंकी शामिल हैं. इनमें जाहिद अहमद वाणी तथा मुदासिर अहमद खान हैं. वाणी पुलवामा एवं मुदासिर अवन्तीपुर का निवासी है. पिछले एक सालों से ये सक्रिय हैं. एक अन्य आतंकी अंसार गजावत उल हिन्द (एजीएच) का है जिसका नाम जाकिर राशिद भट उर्फ जाकिर मूसा है. यह ए ++ श्रेणी का है तथा 2013 से सक्रिय है. सेना ने साफ़ कर दिया है सेना की पहली वरीयता में ये आतंकी शामिल हैं जिन्हें जल्द ही जहन्नुम पहुंचा दिया

Friday, 25 May 2018

पाकिस्तानी मीडिया का दावा यदि सत्य हुआ तो ये होगी राष्ट्र से अब तक की सबसे बड़ी गद्दारी

क्या कभी पाकिस्तानी काला धन जमा करवाया गया भारत मे ? पाकिस्तानी मीडिया का दावा यदि सत्य हुआ तो ये होगी राष्ट्र से अब तक की सबसे बड़ी गद्दारी
जहां सारा भारत देश अपना पैसा स्विस बैंकों में जाने से चिंचित है वहीं सारा पाकिस्तान अब अपना पैसा भारत मे जमा होने से चिंतित है। ये दिलचस्प खुलासा किया है पाकिस्तान की मीडिया ने। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नवाज शरीफ ने भारत में 4.9 अरब डॉलर का कालाधन जमा किया हुआ है।एनएबी की विज्ञप्ति के हवाले से मालूम हुआ है कि ब्यूरो चेयरमैन जस्टिस (रि.) जावेद इकबाल ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। विदित हो कि पाकिस्तान की नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) ने इस मीडिया रिपोर्ट पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले की के आदेश जारी किये हैं। दिलचस्प: दावा ये है कि नवाज शरीफ ने काला धन भारतीय वित्त मंत्रालय में जमा करवाया है।ये उस समय की बात बताई जा रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था और राजनेताओं की भाषणबाज़ी से हर पल युद्ध के हालात लगते थे . मणिशंकर अय्यर के बार बार पाकिस्तान दौरे भी अब इस खुलासे के बाद आ रहे हैं सन्देह के घेरे में ..पाकिस्तान के प्रमुख समाचार माध्यम जियो टीवी ने भी ये खबर दी है।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस घटना का वर्ल्ड बैंक के माइग्रेशन एंड रेमिटेंस बुक 2016 में भी जिक्र है। न्यूज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये रकम भारतीय वित्त मंत्रालय में जमा करवाई गयी है। बतादें कि पाकिस्तान की शीर्ष अदालत शरीफ को अयोग्य घोषित कर चुकी है ओर वहीं सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पनामा पेपर्स मामले में फैसले के बाद नवाज शरीफ एनएबी में पहले ही भ्रष्टाचार के तीन मामलों में जांच में फंसा हुआ है। उधर शरीफ ने इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये सब राजनीति से प्रेरित षड्यंत्र है।

Saturday, 12 May 2018

पत्थर मारनेवालों का कोई धर्म नहीं होता

पत्थरबाज हमेशा भारतीय सेना काे क्याे अपना लक्ष्य बना रहे है ?, 


पत्थरबाजाें का धर्म नही हाेता एेसा कहकर महबूबा मुफ्ती अपने आप काे ही धाेका दे रही है ! अगर पत्थरबाजाें का धर्म नही है ताे महबूबा मुफ्ती इन सवालाें का जवाब दे . . . पत्थरबाज हमेशा भारतीय सेना काे क्याे अपना लक्ष्य बना रहे है ?, पत्थरबाजाें काे फंडिंग पाकिस्थान से क्याे हाे रही हैं ? पत्थरबाज कश्मीर की आजादी क्याें मांग रहे है ? पत्थरबाज भारत विराेधी नारे देकर पाकिस्तान का जयजयकार क्याे करते हैं ? क्या इन सवालाें का जवाब महबूबा मुफ्ती के पास है ? – 
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पथराव में २२ वर्षीय एक युवक की मौत को ‘मानवता की हत्या ’ करार दिया और कहा कि इस घटना ने उनके अंदर की मां को झकझोर दिया है ! मंगलवार को चेन्नई निवासी एस तिरुमणि के पिता से भेंट के बाद विचलित नजर आ रहीं महबूबा ने कहा कि जो लोग किसी को मारने के लिए पत्थर उठाते हैं, उनका कोई धर्म नहीं होता। मुफ्ती ने घाटी के हालात पर चर्चा के लिए राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक का आवाहन किया है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, मुख्यमंत्री बुधवार को श्रीनगर में एक सर्वदलीय बैठक बुला रही हैं जिसमें सांप्रत हालात पर चर्चा की जाएगी। बैठक दोपहर दो बजे शेरे-कश्मीर कांफ्रेंस सेंटर में आयोजित की गई है। घाटी में सोमवार को चेन्नई वासी एक २२ वर्षीय पर्यटक एस थिरुमनी की पत्थरबाजी के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना से व्यथित मुफ्ती ने इसे ‘मानवता की हत्या’ करार दिया था। उन्होंने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर में ऐसा कभी नहीं सुना गया था। इस घटना से आहत मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर अब कई दिनों तक टेलीविजन पर चर्चा और बहस होगी और ‘हम मानवता की हत्या चुपचाप देखते रहेंगे। यह ऐसी घटना है जिसके बारे में जम्मू-कश्मीर में अब तक सुना नहीं गया है !’ दो बेटियों की मां और राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री ने कहा, जिस प्रकार की शिक्षा हमारी अगली पीढ़ी को दी जा रही है, उससे मेरे अंदर की मां विचलित हो गई है। उन्होंने कहा, हम अपने बच्चों को कौन-सी शिक्षा दे रहे हैं कि पत्थर उठाएं और सडक पर जा रहे किसी व्यक्ति को मार दें ? यह वह नहीं है जिसकी हमारा इस्लाम हमें शिक्षा देता है। हमारा धर्म हमें अपने मेहमानों की देखभाल की शिक्षा देता है। ये लोग या लडके, जो किसी को मारने के लिए पत्थर उठाते हैं, उनका कोई धर्म नहीं है। उन्होंने अभिभावकों से सवाल किया कि वे अपने बच्चों को कहां धकेल रहे हैं ?

तिरुमणि और उसका परिवार सोमवार को गुलमर्ग से लौट रहा था । बडगाम में मगाम के समीप उनकी गाडी पथराव में फंस गई। एक पत्थर तिरुमणि की कनपटी में आ लगा। उसे सौरा आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा, क्या कोई कल्पना कर सकता है कि एक गरीब बाप ने अपने परिवार को कश्मीर लाने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च की थी और वह अब अपने बेटे के ताबूत के साथ लौट रहा है। क्या हम यही चाहते हैं ? जब उनसे पूछा गया कि क्या इस घटना का पर्यटन पर असर होगा तो उन्होंने कहा, मैं पर्यटन की बात नहीं कर सकती यह मानवता के बारे में मूल सवाल है। यह कश्मीरियत नहीं हो सकती ! उधर जम्मू-कश्मीर मे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पथराव में पर्यटक की मौत की घटना को दुखद बताया है। उमर ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला करते हुए पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार को विफल बताया। उमर ने ट्वीट में कहा, हमने वाहन पर पत्थर फेंक कर उसमें सवार पर्यटक की हत्या कर दी। हम प्रयास करें और इस तथ्य पर सिर जोडें कि हमने एक पर्यटक पर, एक मेहमान पर पथराव कर उसकी हत्या कर दी जबकि हम पत्थरबाजों और उनके तरीकों का महिमामंडन करते हैं !
स बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने महबूबा मुफ्ती से फोन पर बातचीत कर वहां से सूबे के १३० पर्यटकों की सुरक्षित घर वापसी में उनकी मदद मांगी है। मुख्यमंत्री की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्होंने जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बातचीत कर राज्य के १३० पर्यटकों की सुरक्षित घर वापसी में मदद मांगी है। पर्यटक थिरूमणि सेल्वम के निधन पर शोक प्रकट करते हुए पलानीस्वामी ने पीडित के निकटतम परिजन को तीन लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की !

कश्मीर में पर्यटक की मौत निंदनीय : सीतारमण

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि चेन्नई के रहनेवाले २२ वर्षीय एस थिरुमणि की पथराव के दौरान मौत अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है ! नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि यह घटना लापरवाही से हुई या जान-बूझकर इसे अंजाम दिया गया, लेकिन यह पूरी तरह निंदनीय है। यह पूछने पर कि घाटी में व्याप्त स्थिति से निपटने में सेना के कठिन रवैये से क्या आतंकवाद में वृद्धि हुई है ? मंत्री ने कहा सशस्त्र बलों को आतंकवादियों के साथ सख्ती बनाए रखनी होगी !

Friday, 11 May 2018

स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है...मैं इसे लेकर रहूंगा' का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नेता बाल गंगाधर तिलक के अपमान का मामला सामने आया है

राजस्थान के सिलेबस में बाल गंगाधर तिलक को बताया 'आतंकवाद का जनक'

.स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है...मैं इसे लेकर रहूंगा' का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नेता बाल गंगाधर तिलक के अपमान का मामला सामने आया है दरअसल राजस्थान के स्कूलों में कक्षा 8वीं में पढ़ाई जाने वाली अंग्रेजी की सामाजिक विज्ञान की किताब में उन्हें 'आतंक का जनक' (फादर ऑफ टेररिज्म) बताया गया है. सोशल मीडिया पर इसकी निंदा करते हुए लोग कह रहे हैं कि छात्रों को गलत शिक्षा दी जा रही है.

कांग्रेस ने की किताब हटाने की मांग

बाल गंगाधर तिलक को 'आतंक का जनक' (फादर ऑफ टेररिज्म) बताए जाने पर कांग्रेस ने पुस्तक को सिलेबस से हटाने की मांग की है. वहीं प्रकाशक ने इसे अनुवाद की गलती बताते हुए सुधार करने की बात कही है. आपको बता दें, जिस स्कूल में ये किताब पढ़ाई जा रही है वह राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं. राजस्थान राज्य पाठ्यक्रम बोर्ड किताबों को हिंदी में प्रकाशित करता है इसलिये बोर्ड से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के लिए मथुरा के एक प्रकाशक द्वारा प्रकाशित संदर्भ पुस्तक को इस्तेमाल में लाया जाता है.
ये लिखा किताब में

सामाजिक विज्ञान की इस किताब के पेज नंबर 267 पर 22वें चैप्टर में तिलक के बारे में लिखा गया है कि उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन का रास्ता दिखाया था, इसलिये उन्हें ‘आतंकवाद का जनक’ कहा जाता है. पुस्तक में तिलक के बारे में 18वीं और 19वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आंदोलन के बारे में लिखा गया है. पुस्तक में तिलक के हवाले से बताया गया है कि उनका मानना था कि ब्रिटिश अधिकारियों से प्रार्थना करने मात्र से कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता. शिवाजी और गणपति महोत्सवों के जरिये तिलक ने देश में अनूठे तरीके से जागरूकता फैलाने का कार्य किया.
अनुवादक के ओर से हुई गलती

मथुरा के प्रकाशक स्टूडेंट एडवाइजर पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी राजपाल सिंह ने बताया कि गलती पकड़ी जा चुकी है जिसे संशोधित प्रकाशन में सुधार दिया गया है. उन्होंने बताया कि यह गलती अनुवादक की ओर से की गई थी. वहीं गलती के सामने आने पर पिछले माह के अंक में सुधार कर दिया गया है. इसका पहला अंक पिछले वर्ष प्रकाशित किया गया था. इतिहासकारों ने तिलक जैसी महान राष्ट्रीय विभूतियों को अनुवादक की गलतियों के कारण इस तरह बताए जाने की निंदा की है.

इसी के साथ राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने इसे देश का अपमान बताया है. उन्होंने एक बयान देते हुए कहा 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षा के सिलेबस को जिस गलत स्वरूप में पेश किया जा रहा है, उससे स्वतंत्रता सेनानियों की गरिमा को ठेस पहुंच रही है'.

पायलट ने सरकार से मांग की है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के संदर्भ में जिस किताब में गलत तथ्य लिखे गये हैं उसे सिलेबस से हटाया जाए और पुस्तक पर रोक लगा दी जाए.

Saturday, 14 April 2018

ATITHI DEVO BHAVA HIMACHAL PRADESH

15 अप्रैल - देवभूमि हिमांचल प्रदेश की स्थापना दिवस की समस्त राष्ट्रप्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं. जानिए हिमांचल के बारे में वो सच जो यकीनन आप नहीं जानते होंगे
निश्चित रूप से ये हर्ष और उल्लास का विषय है कि आज अर्थात 15 अप्रैल को देवभूमि माने जाने वाले और भारत मे देवी माँ के प्रमुख शक्तिपीठो के वास स्थल हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस है। भारत के लाखों बलिदानियों के बलिदान के बाद आज ही के दिन अर्थात 15 अप्रैल सन 1948 को 28 पहाड़ी रियासतों को एकीकृत करते हुए आपस मिलाकर नया प्रांत बनाया गया था जिसे हिमांचल प्रदेश कहा गया .. न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की सादगी अपितु वैदिक व पौराणिक पावन इतिहास समेटे हिमांचल प्रदेश में कई ऐसी बातें भी हैं, जिनकी वजह से हिमाचल पूरे देश में सबसे आगे है। इनमें से बहुत सी बातें प्रदेश की अच्छी राजनीति की वजह से संभव हो पाई है और उसका श्रेय भी प्रदेश की जनता और वहां का प्रशासन सम्भाल रहे कर्मवीरों को जाता है।


बीच मे कुछ मुद्दे आये जिसके चलते इस पावन प्रदेश की छवि को धूमिल करने के कुत्सित प्रयास हुए जिसका ज्यादातर दोष उस राजनीति को दिया जा सकता है जो मात्र वोट व सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है। बहरहाल, आज जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के बारे में कुछ ऐसी बातें, जो आपको ही नहीं बल्कि प्रत्येक भारतवंशी को हर हाल में मालूम होनी चाहिए।

Friday, 13 April 2018

भारत की धर्मनिरपेक्षता यकीनन दुनिया के लिए एक मिसाल हो सकती है

हज सब्सिडी पर रोक लगते ही दहाड़ उठा सेकुलर वकील वकील गौरव बंसल और लड़ गया मोदी सरकार से मुस्लिमों को हज सब्सिडी वापस दिलाने के लिए


भारत की धर्मनिरपेक्षता यकीनन दुनिया के लिए एक मिसाल हो सकती है . ये सेकुलर शब्द पहले भले ही भारत में कभी न रहा हो लेकिन वर्तमान समय में ये कईयों की आत्मा तक में बस गया है और उसको कायम रखने के लिए ख़ास तौर पर हिन्दू समाज हर कुर्बानी देने के लिए तैयार है . सहिष्णुता कि
अंतिम पराकाष्ठ पर खड़ा हिन्दू कश्मीर तक से भगाए जाने के बाद अपनी मूल थाती सेकुलरिज्म को साथ ले कर चल रहा है . ऐसे ही सेकुलरों में जम्मू में जिस मुकदमे में हिन्दू खुद को प्रताड़ित करने आ आरोप लगा रहे , हिन्दुओ के खिलाफ वही मुकदमा लड़ रही दीपिका हैं , भारत के वो तमाम तथाकथित फिल्म स्टार जो केवल हिन्दुओ के खिलाफ बोलते हैं , गुजरात दंगों में हिन्दुओ के खिलाफ छाती ठोंक कर खड़े हो गये बर्खास्त IPS संजीव भट्ट , मस्जिद बचाने के लिए हिन्दुओ पर गोलियां बरसा देने वाले मुलायम सिंह यादव आदि प्रमुख हैं . अब उन्ही में एक नया नाम जुड़ा है अधिवक्ता गौरव बंसल . एडवोकेट गौरव बंसल ने नई हज नीति में दिव्यांगों को हज के लिए अयोग्य ठहराने को असंवैधानिक बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी  ये एक वकील हैं जो पहले तो साधारण मुकदमों के लिए जाने जाते थे लेकिन जब से इन्होने सुना कि मोदी सरकार ने हज यात्रा में जाने वाले मुस्लिमों में दिव्यांगो का कोटा खत्म कर दिया है अब से इन्होने एक मिनट भी बिना देर गंवाए मोदी सरकार को सबक सिखाने की ठान ली और दायर कर दिया मोदी सरकार के खिलाफ अपनी तरफ से एक मुकदमा जिसमे इन्होने मोदी सरकार के दिव्यांग मुस्लिमों की हज सब्सिडी खत्म करने को चुनौती दे डाली गयी . इनकी याचिका पर मोदी सरकार के प्रतिनिधि को अदालत में हाजिर भी होना पडा और सफाई भी देनी पड़ी . गौरव बंसल नाम के इन धर्मनिरपेक्ष वकील के चलते ही मुस्लिमों में आशा जगी है अपनी सब्सिडी वापस पाने की और इन्होने अचानक ही संजीव भट्ट , तीस्ता सीतलवाड़ जैसा एक बड़ा नाम कमा लय है मुस्लिम समाज के बीच में .. गौरव बंसल की याचिका पर अभी अदालत का फैसला आना बाकी है लेकिन उसके पहले ही इन्होने अपनी एक अलग पहिचान एक बड़े सेकुलर के रूप में बना ली है .


Wednesday, 28 March 2018

पिछले तीन साल में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड लगभग 4 गुना तक बढ़ गया है

3 साल में चार गुना बढ़ी नौकरी छोड़ने वाले जवानों की संख्या, 14,587 ये है

पिछले तीन साल में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड लगभग 4 गुना तक बढ़ गया है. बेहतर करियर की चाह में पिछले 3 साल में 14,587 अधिकारियों और जवानों ने स्वैच्छा से अर्धसैनिक बलों की नौकरी छोड़ी है. 

सरकार रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर रही है, देश की सुरक्षा में तैनात जवानों को बेहतर सुविधाएं दिए जाने का दावा किया जा रहा है. लेकिन, नौकरी छोड़ने वाले जवानों की बढ़ती संख्या कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. पिछले तीन साल में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड लगभग 4 गुना तक बढ़ गया है. बेहतर करियर की चाह में पिछले 3 साल में 14,587 अधिकारियों और जवानों ने स्वैच्छा से अर्धसैनिक बलों की नौकरी छोड़ी है. यह आंकड़ा साल 2015 से 2017 का है.
गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल के 14,587 जवानों और अधिकारियों ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया है. जबकि 2015 में यह आंकड़ा 3425 ही था. 
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ों को बारीकी से देखा जाए तो सीआरपीएफ और बीएसएफ के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड सबसे ज्यादा है. 2015 में सीआरपीएफ के 1376 जवानों ने नौकरी छोड़ी, जबकि 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 5123 पर पहुंच गया. यही हाल बीएसएफ के जवानों का भी रहा. आंकड़े बताते हैं कि 2015 में 909 बीएसएफ जवानों ने नौकरी छोड़ी, वहीं 2017 में यह आंकड़ा 6400 को पार कर गया.
सुरक्षा के लिहाज से अहम हैं सीआरपीएफ और बीएसएफ
आपको बता दें कि इन दोनों ही फोर्सज (सीआरपीएफ और बीएसएफ) को बॉर्डर पर सुरक्षा के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत अहम माना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक बीएसफ पर बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में देश की सुरक्षा का जिम्मा होता है. 2015 से 2017 के बीच 7324 लोगों ने बीएसएफ की नौकरी छोड़ दी. दूसरी तरफ देश की आंतरिक सुरक्षा खास तौर पर नक्सल प्रभावित और जम्मू-कश्मीर इलाकों में सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के जवानों पर होता है. पिछले 3 साल में सीआरपीएफ के 6501 जवानों/अधिकारियों ने स्वैच्छा से रिटायरमेंट लिया.
ये हो सकता है कारण जवानों और अधिकारियों के नौकरी छोड़ने का ये सिलसिला 2024 तक जारी रहने वाला है. एक अधिकारी का कहना है कि बहुत से जवान और अधिकारी बेहतर करियर के लिए प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां तलाश रहे हैं. सिक्योरिटी एजेंसी और ऐसे दूसरे करियर विकल्प भी जॉब छोड़ने के कारणों में से एक हैं. 

Tuesday, 27 March 2018

विधायकों का वेतन तीन गुना किया गया

कर्ज में डूबे उत्तराखंड के मंत्रियों और विधायकों की बल्ले-बल्ले, दोगुनी हुई सैलरी



उत्तराखंड विधानसभा ने विधायकों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर विविध संशोधन विधेयक पास कर दिया है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक विविध संशोधन विधेयक के पास होने से प्रदेश के विधायकों की सैलरी करीब 100 फीसदी तक बढ़ जाएगी.
देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा ने विधायकों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर विविध संशोधन विधेयक पास कर दिया है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक विविध संशोधन विधेयक (मिसलेनियस अमेंडमेंट बिल) के पास होने के बाद प्रदेश के विधायकों की सैलरी करीब 100 फीसदी तक बढ़ जाएगी. इस विधेयक को राज्य सरकार ने शनिवार (24 मार्च) को ही सदन में पेश किया था, जिसे बजट सत्र के आखिरी दिन पास कर दिया गया. विधायक लंबे समय से वेतन भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे थे. विधायकों की मांग पर तदर्थ समिति (एडहॉक कमेटी) का गठन किया गया था. विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
विधायकों का वेतन तीन गुना किया गया
विधायकों के वेतन 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए किया गया है. मंत्रियों के वेतन 45 हजार रुपए से बढ़ाकर 90 हजार रुपए किया गया है. स्पीकर का वेतन 55,000 हजार रुपए से बढ़ाकर 1.10 लाख रुपए किया गया है. डिप्टी स्पीकर की सैलरी भी दोगुनी कर दी गई है. खास बात ये ही विधायकों की सैलरी के साथ जुड़े भत्ते भी दोगुना से तीन गुणा तक बढ़ा दिए गए हैं.
उत्तराखंड के 51 विधायक करोड़पति
रिपोर्ट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के मुताबिक उत्तराखंड के 69 में से 51 विधायक करोड़पति हैं. 51 करोड़पतियों में 10 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले 5, 5-10 करोड़ की संपत्ति वाले 5 और 1-5 करोड़ की संपत्ति वाले 17  विधायक हैं.


इससे पहले 2014 में विजय बहुगुणा सरकार ने विधायकों की सैलरी बढ़ाई थी
इस कमेटी ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट सदन में रखी थी. कैबिनेट की बैठक में भी वेतन भत्ते को बढ़ाने की मंजूरी मिल गई थी. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने विधानसभा में विविध संशोधन विधेयक (मिसलेनियस अमेंडमेंट बिल) पेश किया, जिसे सदन से मंजूरी मिल गई. वर्तमान में उत्तराखंड में विधायकों की सैलरी करीब 1.6 लाख रुपए हर महीने है. स्पीकर और मंत्रियों की सैलरी तो इससे कही ज्यादा है. जनवरी 2014 में विजय बहुगुणा सरकार ने विधायकों के वेतन भत्तों में जबरदस्त बढ़ोतरी की थी. एकबार फिर त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार विधायकों और मंत्रियों की सैलरी बढ़ाने जा रही है.
सैलरी के अलावा ये सुविधाएं भी
विधायकों को सैलरी के अलावा कई तरह की सुविधाएं भी मिलती हैं. जानकारी के मुताबिक एक विधायक को एक साल में तीन लाख कूपन (रेल और हवाई) की मिलती है. विधायकों और उनके परिवारों को क्लास वन ऑफिसर की तरह चिकित्सा सुविधा. इसके अलावा दो मोबाइल फोन, एक टेलीफोन और मकान निर्माण और वाहन क्रय के लिए 8-8 लाख लोन की भी सुविधा है.

Wednesday, 21 March 2018

आज ही क्रूर हत्यारे नादिरशाह ने अपनी बर्बर सेना को दिया था दिल्ली के पुरुषों के नरसंहार और नारियो के बलात्कार का आदेश

22 मार्च- आज ही क्रूर हत्यारे नादिरशाह ने अपनी बर्बर सेना को दिया था दिल्ली के पुरुषों के नरसंहार और नारियो के बलात्कार का आदेश


भले ही आज मोब लिंचिंग और तमाम अन्य घटनाओं का दुष्प्रचार कर के हिन्दू समाज को सोची समझी साजिश के साथ बदनाम किया जा रहा हो लेकिन इतिहास बताता है कि हत्यारे कौन हैं , कौन हैं लुटेरे , किस ने माना इस भूमि को अपना और किस ने किया इसको पराया .. इन तमाम सवालों के जवाब अब तक जनता को मिल भी गये होते लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से एक ही परिवार के आस पास रख कर एक ही प्रकार की बदनामी करते रहने वालों को ये समझ में नहीं आया कि उन्होंने भारत की संस्कृति की जड पर वार किया है और महिमामंडित किया है उन कातिलों को जिन्होंने बहाया है भारत में भारत वालों का ही खून .आज है 22 मार्च .. ये वो दिन है जिस दिन खुलेआम एक उस लुटेरे और हत्यारे ने अपनी सेना को हिन्दुओ के नरसंहार का आदेश दिया था जिसके खिलाफ लिखने में हमारे तमाम तथाकथित इतिहासकार और सेकुलर जमात के बुद्धिजीवी न जाने क्यों शर्म जैसी महसूस करते हैं . वो दिन था 22 मार्च 1739 जब हत्यारे और धर्मांध नादिर शाह ने अपनी सेना को दिल्ली मे जनसंहार की इजाजत दी.. इसके साथ नारियो का बलात्कार भी हुआ और चौराहों पर कत्ल भी .. ये बलात्कार और कत्लेआम 58 दिनों तक चलता रहा और नादिरशाह की हत्यारी फ़ौज में एक भी ऐसा बुद्धिजीवी और सेकुलर नहीं था जो कम से कम एक बार इस क्रूर को इस नरसंहार को रोकने के लिए कह दे .इस लुटेरे क्रूर हत्यारे ने दिल्ली में प्रवेश तो 20 मार्च को ही कर लिया था . 20 मार्च 17३८ को दिल्ली मेें प्रवेश कर नादिरशाह ने 20000 के करीब लोगों का कत्ल कर दिया गया जो केवल अपनी क्रूरता का खौफ जताने के मकसद से था ..उसके बर्बर सैनिक राजधानी में घुस पड़े और उन्होंने लूटमार का बाज़ार गर्म कर दिया। उसके कारण दिल्ली के हज़ारों नागरिक मारे गये और वहाँ भारी लूट की गई। इस लूट में नादिरशाह को बेशुमार दौलत मिली थी। उसे 20 करोड़ की बजाय 30 करोड़ रुपया नक़द मिला। उसके अतिरिक्त ढेरो जवाहरात, बेगमों के बहुमूल्य आभूषण, सोने-चाँदी के अगणित वर्तमान तथा अन्य वेश-क़ीमती वस्तुएँ उसे मिली थीं। इनके साथ ही साथ दिल्ली की लूट में उसे कोहिनूर हीरा और शाहजहाँ का 'तख्त-ए-ताऊस' (मयूर सिंहासन) भी मिला था। वह बहुमूल्य मयूर सिंहासन अब भी ईरान में है या नहीं, इसका ज्ञान किसी को नहीं है। 

नादिरशाह के हाथ पड़ने वाली शाही हरम की सुंदरी बेगमों के अतिरिक्त मुहम्मदशाह की पुत्री 'शहनाज बानू' भी थी, जिसका विवाह उसने अपने पुत्र 'नसरूल्ला ख़ाँ' के साथ कर दिया। नादिरशाह प्राय: दो महीने तक दिल्ली में लूटमार करता रहा था। उसके कारण दिल्ली उजाड़ और बर्बाद सी हो गई थी। जब वह यहाँ से जाने लगा, तब करोड़ो की संपदा के साथ ही साथ वह 1,000 हाथी, 7,000 घोड़े, 10,000 ऊँट, 100 खोजे, 130 लेखक, 200 संगतराश, 100 राज और 200 बढ़ई भी अपने साथ ले गया था। नादिरशाह 17३८ में ईरान वापस गया और 17४६ में उसकी मृत्यु हो गई। अय्याशी और कुकर्म के प्रतीक रहे इस क्रूर लुटेरे और आक्रान्ता को अपने जीवन का अधिकतर समय हरम तथा हिजड़ों में बिताने तथा उसके असंयत और विलासी आचरण के कारण रंगीला कहा गया। सवाल ये है कि 58 दिन तक चले इस महापाप रूपी इतिहास को क्यों नहीं बताते मोब लिंचिंग का प्रचार करने वाले ?