Wednesday, 28 February 2018

पूज्य कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी का 83 वर्ष की आयु में आज सुबह देहावसान हो गया है

कांची कामकोटि के परमपूज्य शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी ..अंतिम सांस तक लड़े विधर्म के प्रचारकों से
हिंदुओं में सबसे पूज्य कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी का 83 वर्ष की आयु में आज सुबह देहावसान हो गया है. जगद्गुरु के निधन की खबर के बाद हिन्दू समाज में शोक की लहर दौड़ गयी है. सांस लेने परेशानी होने के कारण जगद्गुरु को कांची के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां आज  बुधवार की सुबह वह देवलोकवासी हो गए. जगद्गुरु शंकराचार्य को सनातन हिन्दू धर्म में सबसे पूज्य माना जाता है। जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को हुआ था तथा 22 मार्च1954 में वह कांची मठ के 69वें शंकराचार्य बने थे.जगद्गुरु शंकराचार्य के पावन सान्निध्य में कांची मठ ने धर्म, मानवत तथा समाजसेवा के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण कार्य किये हैं. जयेंद्र सरस्वती जी ने अटल बिहारी बाजपेयी जी की सरकार के समय राम मंदिर आंदोलन का हल निकालने में भी अपनी तरफ से काफी प्रयास किया था.

हिंदुओं के धर्मगुरु जगद्गुरु शंकरचार्य जयेंद्र सरस्वती जी दक्षिण भारत में एक वो नाम थे जिन्होंने ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ कार्य किया. एक तरफ जहां दक्षिण भारत में ईसाई मिशनरियां लोगों का धर्मांतरण करा रही रहीं थी वहीं पूज्य शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी इन मिशनरियों के खिलाफ सनातन धर्म की रक्षार्थ संघर्ष रहे थे तथा धर्मांतरण के विरोध में दीवार बनकर खड़े हो गए. इसी कारण ईसाई मिशनरियां अपने मिशन में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाईं. जिसके बाद एक सोची समझी साजिश के तहत हत्या के झूठे आरोप मेंमें तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के आदेश पर 11 नवम्बर 2004 को दीपावली पूर्व सन्ध्या को त्रिकाल सन्ध्या करते समय गिरफ्तार किया गया था. उस समय जगद्गुरु ने कहा था कि अगर मुझे कुछ हुआ तो पूरा देश हिल उठेगा लेकिन मैं एक संत हूँ, उन्होंने हिंदुओं से शांति बनाए रखने की अपील की तथा पुलिस के साथ अदालत में पेश हुए जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. बाद में अदालत ने पूज्य जगद्गुरु को आरोप मुक्त कर त्रिकाल सन्ध्या करते समय गिरफ्तार किया गया था. उस समय जगद्गुरु ने कहा था कि अगर मुझे कुछ हुआ तो पूरा देश हिल उठेगा लेकिन मैं एक संत हूँ, उन्होंने हिंदुओं से शांति बनाए रखने की अपील की तथा पुलिस के साथ अदालत में पेश हुए जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. बाद में अदालत ने पूज्य जगद्गुरु को आरोप मुक्त कर



Saturday, 24 February 2018

धर्मशास्त्र और नीतिशास्त्रों में कहा गया है कि कर्म के बगैर गति नहीं।

कर्म की किताब रखो साफ




1.नित्य कर्म (दैनिक कार्य), 
2.नैमित्य कर्म (नियमशील कार्य),
 3.काम्य कर्म (किसी मकसद से किया हुआ कार्य), 
4.निश्काम्य कर्म (बिना किसी स्वार्थ के किया हुआ कार्य),
 5.संचित कर्म (प्रारब्ध से सहेजे हुए कर्म) और 
6.निषिद्ध कर्म (नहीं करने योग्य कर्म)।
सनातन धर्म भाग्यवादियों का धर्म नहीं है। वेद, उपनिषद और गीता- तीनों ही कर्म कोकर्तव्य मानते हुए इसके महत्व को बताते हैं। यही पुरुषार्थ है, जो व्यक्ति भाग्य, ज्योतिष या भगवान भरोसे है उसको भी कर्म किए बगैर छुटकारा नहीं मिलने वाला। धर्मशास्त्र और नीतिशास्त्रों में कहा गया है कि कर्म के बगैर गति नहीं।
जो लोग भाग्यशाली हैं उन्हें भी कर्म करना होता है यदि वे भाग्य के भरोसे कर्म नहीं करते तो भाग्य भी उनका साथ छोड़ देता है और जो लोग कर्मवादी है या जिनका भाग्य सोया हुआ है उन्हें तो हर हालत में कर्म करना ही चाहिए अन्यथा वे दुर्गति को प्राप्त होते हैं। कुल मिलाकर सनातन धर्म भाग्य प्रधान धर्म न हो कर कर्म प्रधान धर्म है।
 
कुछ नहीं करना भी एक प्रकार का करना है। साँस लेना और छोड़ना भी कर्म है। कर्म के बगैर एक क्षण भी रहा नहीं जा सकता। कर्म से ही भविष्य तय होता है, भाग्य तय होता है। सनातन धर्म में कर्म का बहुत महत्व है। कर्म किए बगैर गति नहीं। कर्म और कर्तव्य से जो व्यक्ति मुँह मोड़ता है वह अधोगति को प्राप्त होता है।
 
श्रेष्ठ और निरंतर कर्म किए जाने या सही दिशा में सक्रिय बने रहने से ही पुरुषार्थ फलित होता है। इसीलिए कहते हैं कि काल करे सो आज कर। वेदों में कहा गया है कि समय तुमको बदले इससे पूर्व तुम ही स्वयं को बदल लो- यही कर्म का मूल सिद्धांत है। अन्यथा फिर तुम्हें प्रकृति या दूसरों के अनुसार ही जीवन जीना होगा।
 
धर्म शास्त्रों में मुख्‍यत: छह तरह के कर्म का उल्लेख मिलता है- 1.नित्य कर्म (दैनिक कार्य), 2.नैमित्य कर्म (नियमशील कार्य), 3.काम्य कर्म (किसी मकसद से किया हुआ कार्य), 4.निश्काम्य कर्म (बिना किसी स्वार्थ के किया हुआ कार्य), 5.संचित कर्म (प्रारब्ध से सहेजे हुए कर्म) और 6.निषिद्ध कर्म (नहीं करने योग्य कर्म)।
 
जिस तरह से चोर को मदद करने के जुर्म में साथी को भी सजा होती है ठीक उसी तरह काम्य कर्म और संचित कर्म में हमें अपनों के किए हुए कार्य का भी फल भोगना पड़ता है और इसीलिए कहा जाता है कि अच्छे लोगों का साथ करो ताकि कर्म की किताब साफ रहे।- अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

Thursday, 22 February 2018

राजस्थान में एक ऐसा किला है जिसके बारे में इतिहासकार लिखते है कि इस किले के राजा के पास पारस पत्थर था, जिसकी मदद से वह लोहे को स्वर्ण में बदल लिया करता था|

इस किले का राजा पारस पत्थर से लोहे को बदलता था सोने में



राजस्थान में एक ऐसा किला है जिसके बारे में इतिहासकार लिखते है कि इस किले के राजा के पास पारस पत्थर था, जिसकी मदद से वह लोहे को स्वर्ण में बदल लिया करता था| यही कारण था कि यह राजा अपनी प्रजा से कर के रूप में नकद रुपया ना लेकर लोहा लिया करता था और उसे स्वर्ण में बदल लेता था| स्वर्ण को सुरक्षित रखने के लिए किले के गर्भ में अनेकों तलघर बने है, जहाँ स्वर्ण रूपी खजाना रखा जाता था| रियासत के अंतिम चरण में इस किले में खुदाई की गई थी, पर खुदाई में क्या मिला ? इस तथ्य पर आज भी प्रश्नचिन्ह है| हाँ खुदाई में पत्थर के गोल चाक निकले वे आज भी वहीं रखें है|
जी हाँ ! हम बात कर रहे है करौली मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूर माँसलपुर तहसील के भोजपुर गांव के पूर्व में सागर की पार पर बने तिमनगढ़ किले की| इस किले को श्रीकृष्ण के वंशज यदुवंशी राजा तिमनपाल ने बनवाया था| सन 1048 में बना यह किला समुद्रतल से 1309 फिट की उंचाई पर बना है| इस किले में सोने के खजाने का इतिहास खंगालने वाले “करौली राज्य का इतिहास” पुस्तक के लेखक दामोदर लाल गर्ग को एक ताम्रपत्र मिला था, जिसमें कुल 15 लाइनें लिखी है, जिसमें महाराजा हरिपाल के शासन में बाला किले के अन्दर खजाना गाड़ने की बात लिखी हुई है|
किले में 80 से ज्यादा प्राचीरें है| मुख्यद्वार को जगनपोल के नाम से जाना जाता है| धन व मूर्तियाँ निकालने के लिए असामाजिक तत्वों द्वारा खंडहर बना दिए इस किले में ननद-भौजाई के जुड़वां कुँए, राजगिरि बाजार, फर्शबंदी की सड़क, तेल कुआँ-चाक, आमखास प्रासाद, मंदिर, घुड़साल व किलेदारों के रहने के आवास बने है| शिल्प का इस किले में भंडार था, जो इस किले को खँडहर में तब्दील होने का कारण बना|
अपने समय इस क्षेत्र का सत्ता का महत्त्वपूर्ण केंद्र रहा यह किला भी मोहम्मद गौरी की नजर से नहीं बच सका और सन 1196 में गौरी ने इस किले पर अधिकार कर लिया| मुस्लिम इतिहासकार हसन निजामी ने लिखा है- “अब तक संसार के किसी शासक ने इसे नहीं जीता, जिसे हमारे बादशाह ने चारों ओर से घेर लिया| किले का राजा कुंवरपाल जिसे अपनी सेना पर गर्व व दुर्ग की दृढ़ता पर पूर्ण विश्वास था, ने शत्रु की सेना की संख्या देखते हुए आत्मसमर्पण पर मजबूर हुआ और किले पर मुसलमानों का अधिकार हो गया, हालाँकि बाद में उसके वंशजों ने कुछ वर्ष बाद किले पर दुबारा कब्ज़ा कर लिया|
अगले लेख में आपको बताया जायेगा कि राजा तिमनपाल के हाथ पारस पत्थर कैसे आया था|  यहाँ के लोगों का यह भी मानना है कि आज भी क़िले के पास स्थित सागर झील में पारस पत्थर है, जिसके स्पर्श से कोई भी चीज़ सोने की हो सकती है| 

इसका पालन करने वाला जीवन में हमेशा सुखी और शक्तिशाली बना रहता है। दस यम के बाद जानें दस नियम।

हिन्दू धर्म की आचरण संहिता


हिन्दू धर्म में आचरण के सख्त नियम हैं जिनका उसके अनुयायी को प्रतिदिन जीवन में पालन करना चाहिए। इस आचरण संहिता में मुख्यत: दस यम या प्रतिबंध हैं और दस नियम हैं। यह सनातन हिन्दू धर्म का नैतिक अनुशासन है। इसका पालन करने वाला जीवन में हमेशा सुखी और शक्तिशाली बना रहता है। दस यम के बाद जानें दस नियम।
 
1.ह्री- पश्चात्ताप को ही ह्री कहते हैं। अपने बुरे कर्मों के प्रति पश्चाताप होना जरूरी है। यदि आपमें पश्चाताप की भावना नहीं है तो आप अपनी बुराइयों को बढ़ा रहे हैं। विनम्र रहना एवं अपने द्वारा की गई भूल एवं अनुपयुक्त व्यवहार के प्रति असहमति एवं शर्म जाहिर करना जरूरी है, इसका यह मतलब कतई नहीं की हम पश्चाताप के बोझ तले दबकर फ्रेस्ट्रेशन में चले जाएं।
 
इसका लाभ- पश्चाताप हमें अवसाद और तनाव से बचाता है तथा हममें फिर से नैतिक होने का बल पैदा करता है। मंदिर, माता-पिता या स्वयं के समक्ष खड़े होकर भूल को स्वीकारने से मन और शरीर हल्का हो जाता है।
 
2.संतोष- प्रभु ने हमारे निमित्त जितना भी दिया है, उसमें संतोष रखना और कृतज्ञता से जीवन जीना ही संतोष है। जो आपके पास है उसका सदुपयोग करना और जो अपके पास नहीं है, उसका शोक नहीं करना ही संतोष है। अर्थात जो है उसी से संतुष्ट और सुखी रहकर उसका आनंद लेना।
 
इसका लाभ- यदि आप दूसरों के पास जो है उसे देखर और उसके पाने की लालसा में रहेंगे तो सदा दुखी ही रहेगें बल्कि होना यह चाहिए कि हमारे पास जो है उसके होने का सुख कैसे मनाएं या उसका सदुपयोग कैसे करें यह सोचे इससे जीवन में सुख बढ़ेगा।
 
4.दान- आपके पास जो भी है वह ईश्वर और इस कुदरत की देन है। यदि आप यह समझते हैं कि यह तो मेरे प्रयासों से हुआ है तो आपमें घमंड का संचार होगा। आपके पास जो भी है उसमें से कुछ हिस्सा सोच समझकर दान करें। ईश्वर की देन और परिश्रम के फल के हिस्से को व्यर्थ न जाने दें। इसे आप मंदिर, धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं में दान कर सकते हैं या किसी गरीब के लिए दान करें।
 
इसका लाभ- दान किसे करें और दान का महत्व क्या है यह जरूर जानें। दान पुण्य करने से मन की ग्रंथियां खुलती है और मन में संतोष, सुख और संतुलन का संचार होता है। मृत्युकाल में शरीर आसानी से छुट जाता है।
 
4.आस्तिकता- वेदों में आस्था रखने वाले को आस्तिक कहते हैं। माता-पिता, गुरु और ईश्वर में निष्ठा एवं विश्वास रखना भी आस्तिकता है।
 
इसका लाभ- आस्तिकता से मन और मस्तिष्क में जहां समारात्मकता बढ़ती हैं वहीं हमारी हर तरह की मांग की पूर्ति भी होती है। अस्तित्व या ईश्वर से जो भी मांगा जाता है वह तुरंत ही मिलता है। अस्तित्व के प्रति आस्था रखना जरूरी है।
 
5.ईश्वर प्रार्थना- बहुत से लोग पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन सनातन हिन्दू धर्म में ईश्वर या देवी-देवता के लिए संध्यावंदन करने का निर्देश है। संध्यावंदन में प्रार्थना, स्तुति या ध्यान किया जाता है वह भी प्रात: या शाम को सूर्यास्त के तुरंत बाद। 
 
इसका लाभ- पांच या सात मिनट आंख बंद कर ईश्वर या देवी देवता का ध्यान करने से व्यक्ति ईथर माध्यम से जुड़कर उक्त शक्ति से जुड़ जाता है। पांच या सात मिनट के बाद ही प्रार्थना का वक्त शुरू होता है। फिर यह आप पर निर्भर है कि कब तक आप उक्त शक्ति का ध्यान करते हैं। इस ध्यान या प्रार्थना से सांसार की सभी समस्याओं का हल मिल जाता है।
 
6.सिद्धांत श्रवण- निरंतर वेद, उपनिषद या गीता का श्रवण करना। वेद का सार उपनिषद और उपनिषद का सार गीता है। मन एवं बुद्धि को पवित्र तथा समारात्मक बनाने के लिए साधु-संतों एवं ज्ञानीजनों की संगत में वेदों का अध्ययन एक शक्तिशाली माध्यम है।
 
इसका लाभ- जीस तरह शरीर के लिए पौ‍ष्टिक आहार की जरूरत होती है उसी तरह दिमाग के लिए समारात्मक बात, किताब और दृष्य की आवश्यकता होती है। आध्यात्मिक वातावरण से हमें यह सब हासिल होता है। यदि आप इसका महत्व नहीं जानते हैं तो आपके जीवन में हमेशा नकारात्मक ही होता रहता है।
 
7.मति- हमारे धर्मग्रंथ और धर्म गुरुओं द्वारा सिखाई गई नित्य साधना का पालन करना। एक प्रामाणिक गुरु के मार्गदर्शन से पुरुषार्थ करके अपनी इच्छा शक्ति एवं बुद्धि को आध्यात्मिक बनाना।
 
इसका लाभ- संसार में रहें या संन्यास में निरंतर अच्छी बातों का अनुसरण करना जरूरी है तभी जीवन को सुंदर बनाकर शांति, सुख और समृद्धि से रहा जा सकता है। इसके सबसे पहले अपनी बुद्धि को पुरुषार्थ द्वारा आध्यात्मिक बनाना जरूरी है।
 
8.व्रत- अतिभोजन, मांस एवं नशीली पदार्थों का सेवन नहीं करना, अवैध यौन संबंध, जुए आदि से बचकर रहना- ये सामान्यत: व्रत के लिए जरूरी है। इसका गंभीरता से पालन चाहिए अन्यथा एक दिन सारी आध्यात्मिक या सांसारिक कमाई पानी में बह जाती है। यह बहुत जरूरी है कि हम विवाह, एक धार्मिक परंपरा के प्रति निष्ठा, शाकाहार एवं ब्रह्मचर्य जैसे व्रतों का सख्त पालन करें।
 
इसका लाभ- व्रत से नैतिक बल मिलता है तो आत्मविश्वास तथा दृढ़ता बढ़ती है। जीवन में सफलता अर्जित करने के लिए व्रतवान बनना जरूरी है। व्रत से जहां शरीर स्वस्थ बना रहता है वही मन और बुद्धि भी शक्तिशाली बनते हैं।
 
9.जप- जब दिमाग या मन में असंख्य विचारों की भरमार होने लगती है तब जप से इस भरमार को भगाया जा सकता है। अपने किसी इष्ट का नाम या प्रभु स्मरण करना ही जप है। यही प्रार्थना भी है और यही ध्यान भी है।
 
इसका लाभ- हजारों विचार को भगाने के लिए मात्र एक मंत्र ही निरंतर जपने से सभी हजारों विचार धीरे-धीरे लुप्त हो जाते हैं। हम रोज स्नान करके अपने आपको स्वच्छ रखते हैं, उसी जप से मन की सफाई हो जाती है। इसे मन में झाडू लगना भी कहा जाता।
 
10.तप- मन का संतुलन बनाए रखना ही तप है। व्रत जब कठीन बन जाता है तो तप का रूप धारण कर लेता है। निरंतर किसी कार्य के पीछे पड़े रहना भी तप है। निरंतर अभ्यास करना भी तप है। त्याग करना भी तप है। सभी इंद्रियों को कंट्रोल में रखकर अपने अनुसार चलापा भी तप है।
 
उत्साह एवं प्रसन्नता से व्रत रखना, पूजा करना, पवित्र स्थलों की यात्रा करना। विलासप्रियता एवं फिजूलखर्ची न चाहकर सादगी से जीवन जीना। इंद्रियों के संतोष के लिए अपने आप को अंधाधुंध समर्पित न करना भी तप है।
 
इसका लाभ- जीवन में कैसी भी दुष्कर परिस्थिति आपके सामने प्रस्तुत हो, तब भी आप दिमागी संतुलन नहीं खो सकते, यदि आप तप के महत्व को समझते हैं तो। अनुशासन एवं परिपक्वता से सभी तरह की परिस्थिति पर विजय प्रा‍प्त की जा सकती है।
 
अंत: जो व्यक्ति यम और नियम का पालन करता है वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल होने की ताकत रखता है। यह यम और नियम सभी धर्मों का सार है।

Wednesday, 21 February 2018

अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद को लेकर एक नया दस्तावेज़ सामने आया है।

अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद को लेकर एक नया दस्तावेज़ सामने आया है।

जिससे अयोध्या मंदिर निर्माण के कार्य में लगे लोगों को अपनी जीत पर बड़ा भरोसा हो गया है।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी तथा राजशाही व्यवस्था के समय आनरेरी मजिस्ट्रेट रहे रायसाहब रास बिहारी लाल के पुत्र अनूप कुमार श्रीवास्तव ने एक दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजा है। अनूप कुमार श्रीवास्तव के अनुसार उन्हें अपने बाबा के दस्तावेजों से एक ऐसा अभिलेख मिला है, जो राम मंदिर के जीर्णोद्धार से संबंधित है।
बाबर द्वारा अपने सेनापति को फारसी भाषा में लिखे गए इस फरमान में उल्लेख है कि अयोधया की उस इमारत का जीर्णोद्धार कराया जाए जो हिंदुओं के अवतार के (जन्म) लेने की जगह है। दावा किया गया है कि इस आदेश के बाद ही 935 हिजरी में मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया।
अनूप श्रीवास्तव ने इस ऐतिहासिक दस्तावेज की एक प्रति महंत नृत्य गोपाल दास को भी भेजी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी यह ऐतिहासिक दस्तावेज भेजकर इसे सुप्रीम कोर्ट के विवाद में चल रहे दस्तावेजों में शामिल करने का अनुरोध किया गया है। इस फरमान के मिलने से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों में एक नई आशा जगी है, अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जो फैसला मिलेगा, वह उनके हक में होगा।

Tuesday, 20 February 2018

सात फेराें के दौरान लिए सात वचन,

शादी के वक्त क्यों दिए जाते हैं एक-दूसरे को सात वचन, जानिए इनका महत्व




हिंदू धर्म में विवाह काे लेकर कई रस्में हैं, इन रस्माें में सबसे अह्म शादी के वक्त लिए हुए सात फेराें के दौरान लिए सात वचन, जिन्हें पूरी उम्र वर वधु काे निभाने पड़ते हैं। यह वचन अग्नि और ध्रुव तारा को साक्षी मानकर लिए जाते हैं। आप ने शादी की रस्म देखते हुए कई बार ये वचन सुने होगें, लेकिन क्या आप संस्कृत में बोले जाने वाले इन वचनों का व्यवहारिक अर्थ जानते हैं। शायद नहीं, अाज हम अापकाे इनका वचनाें का अर्थ बताएंगे। जाे इस प्रकार हैं-
पहला वचन- तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!
अर्थ- इस वचन में कन्या वर से कहती है कि वो कभी भी तीर्थ यात्रा पर जाएं तो मुझे साथ लेकर जाएं। आप कोई भी व्रत और धर्म कार्य करें तो आज ही की तरह अपने साथ मुझे स्थान दें। यदि आप इसे मानते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।
दूसरा वचन- पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!
अर्थ- दूसरे वचन में कन्या वर से कहती है कि वो जिस तरह अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं। ठीक उसी तरह मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें। ताकि हमारी गृहस्थी में किसी भी प्रकार का आपसी विवाद ना आ सके। अगर आप मुझे ये वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।

तीसरा वचन- जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात,

वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!
अर्थ- तीसरे वचन में कन्या वर से कहती है कि आप मुझे वचन दें, कि जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा साथ देंगे। अगर आप मुझे साथ देने का वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।
चौथा वचन- कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!
अर्थ- चौथे वचन में कन्या वर से कहती है कि अभी तक आप घर-परिवार की चिंता से पूरी तरह से मुक्त थे, लेकिन अब विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की सभी समस्याओं का दायित्व आपके कंधों पर आएगा। अगर आप इस भार को मेरे साथ उठाने का वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।
पांचवा वचन- स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!
अर्थ- इस वचन में कन्या वर से कहती है कि शादी के बाद अपने घर के कार्यों, लेन-देन और अन्य खर्च करते समय अगर आप मेरी भी सलाह लेंगे तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।
छठा वचन- न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत,
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!
अर्थ- इस वचन में कन्या वर के कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों या अन्य स्त्रियों के बीच बैठूं तो आप वहां किसी भी कारणवश मेरा अपमान नहीं करेंगे। इसके साथ ही यदि आप जुआ या किसी भी बुरे काम से खुद को दूर रखते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।
सातवां वचन- परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!
अर्थ- इस आखिरी वचन में कन्या वर से कहती है कि वह पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगे और पति-पत्नी के आपसी प्रेम के बीच किसी को भागीदार ना बनाने का वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।

Sunday, 18 February 2018

हैरानी की बात ये है कि लंबे समय तक विक्रम कोठारी को बैंक करोड़ों रुपये देते रहे. किसी ने कोठारी के बारे में पुख्ता जांच ही नहीं की. आरोप है कि ये पैसा कोठारी ने देश विदेश की कुछ कम्पनियों और प्रॉपर्टी की खरीद में लगाया है.

एक और खुलासा: रोटोमैक के मालिक ने बैंकों को लगाई 3000 करोड़ की चपत

 पंजाब नेशनल बैंक के करीब ग्यारह हजार करोड़ डूबने के बाद भी राष्ट्रीयकृत बैंकों ने अभी कोई सबक नहीं लिया है. उत्तर प्रदेश के बिजनेस हब माने जानेवाले कानपुर शहर में एक ऐसा ही मामला हाथ से निकल जाने के इंतजार में है. कानपुर के व्यापारी विक्रम कोठारी पर आरोप है कि उनपर पांच राष्ट्रीय बैंकों की करीब 3००० करोड़ की देनदारी है और कोठारी ने इस उधारी का कोई भी पैसा नहीं वापस किया. इसके बावजूद ना सिर्फ कोठारी खुलेआम घूम रहे हैं बल्कि उनके बिजनेस भी बदस्तूर चल रहे हैं.
मुंबई के नीरव मोदी से थोड़ा अलग विक्रम कोठारी पर आरोप है कि इन्होंने बैंक के आला अधिकारियों के साथ मिली भगत करके अपनी सम्पत्तियों की कीमत ज्यादा दिखाकर उनपर करोड़ों का लोन लिया और फिर उन्हें चुकता करने से मुकर गये. विक्रम कोठारी रोटोमैक पेंस के मालिक हैं और कानपुर के पॉश तिलक नगर इलाके मे आलीशान बंगले मे रहते हैं.
विक्रम कोठारी ने 2012  में अपनी कंपनी रोटोमैक के नाम पर सबसे पहले इलाहबाद बैंक से 375 करोड़ का लोन लिया था. इसके बाद यूनियन बैंक से 432 करोड़ का लोन लिया. इतना ही नहीं विक्रम कोठारी ने इंडियन ओवरसीज बैंक से 1400 करोड़, बैंक ऑफ इण्डिया से लगभग 1300 करोड़ और बैंक ऑफ बड़ौदा से 600 करोड़ रुपये का लोन लिया, लेकिन किसी बैंक का लोन चुकता नहीं किया. आरोप है कि बैंक अधिकारियों की मिली भगत से विक्रम कोठारी बैंको का लगभग तीन हजार करोड़ रुपया दबा कर बैठ गए. उनकी रोटोमैक कम्पनी पर भी ताला लग गया. बैंकों ने विक्रम कोठारी के सभी लोन के सभी खातों को एनपीए घोषित कर दिया. यूनियन बैंक के मैनेजर पीके अवस्थी उन्होंने बताया कि हमारी बैंक का 482 करोड़ रुपये विक्रम कोठारी पर बाकी हैं. हमारा यह लोन उन्होंने 2012 में लिया था. अब उनका खाता एनपीए हो गया है.  उनसे वसूली को हम लोग प्रयास कर रहे हैं.  वैसे उनके ऊपर कानपुर की चार बैंको का लगभग तीन हजार करोड़ के लगभग लोन बकाया है, जो एनपीए हो गया है.
इस घोटाले पर जब बैंकों की आंख खुली तो उन्होंने अपने मुख्य कार्यालयों में जानकारी देकर मामले से पल्ला झाल लिया. लम्बा बक्त बीतने के बाद भी अभी तक बैंको ने कोई ऐसा ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे कि कोठारी पर शिकंजा कसा जा सके. सूत्रों के मुताबिक लोन के कुछ मामले मीडियेशन में जरूर चल रहे हैं,  जिसके चलते बैंक ने कोठारी की जमीने अटैच की हैं और सौ करोड़ रुपये के लोन की रिकवरी की है. विक्रम कोठारी के ऊपर लोन की एवज में जाहिर रूप से इतनी सम्पत्ति नहीं है कि जिससे पूरा लोन चुकता हो सके. जाहिर है एक बार फिर बैंक अधिकारियों और जालसाजों के गठजोड़ से करोड़ों रुपये डूबनेवाले हैं.
हैरानी की बात ये है कि लंबे समय तक विक्रम कोठारी को बैंक करोड़ों रुपये देते रहे. किसी ने कोठारी के बारे में पुख्ता जांच ही नहीं की. आरोप है कि ये पैसा कोठारी ने देश विदेश की कुछ कम्पनियों और प्रॉपर्टी की खरीद में लगाया है.

Saturday, 17 February 2018

इस घोटाले की नौबत ही नहीं आती. इस घोटाले में 7 बड़ी गलतियां सामने दिखी हैं.

PNB घोटाला: बैंकों की वे 7 बड़ी गलतियां जो पकड़ लेते तो बच जाते हजारों करोड़


पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले ने पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस नीरव मोदी फ्रॉड का जिम्मा एक दूसरे पर फोड़ने पर टिके हुए हैं. लेकिन इसके बावजूद जिन बातों पर ध्यान नहीं जा रहा है, वह हैं कुछ सामान्य गलतियां जो इस फ्रॉड के दौरान हुईं. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाता तो शायद इस घोटाले की नौबत ही नहीं आती. इस घोटाले में 7 बड़ी गलतियां सामने दिखी हैं.
1. जब लेटर ऑफ अंडरटेकिंग को जारी किया जाता है, तो हमेशा ही उस बैंक को भेजा जाता है जो उस प्रक्रिया की भूमिका में प्रमुख है. इस केस में 2010 से लगातार कई बार LoU जारी किए गए थे, लेकिन सवाल यह है कि हर बार इनको विदेशी ब्रांच से भी मंजूरी कौन दे रहा था.
2. LoU जारी होने के बाद दो बैंकों के बीच में संधि की प्रक्रिया होती है जो लोन देने की प्रक्रिया की जांच करती है. सवाल है कि क्या इस केस में इस प्रकार की कोई प्रक्रिया का पालन किया गया था. क्योंकि अगर किया जाता तो नीरव मोदी के सभी बैंक अकाउंट्स और पिछले रिकॉर्ड की जांच होती.
3. अगर लोन चुकाने में तय समय से 2 साल से अधिक का समय बीत जाता है, तो बैंक की तरफ से ऑडिट किया जाता है. ऐसे में क्या किसी भी बैंक ऑडिटर ने इस प्रकार की चिंता की तरफ ध्यान नहीं दिया.
4. जब भी LoU जारी होता है, तो वह लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरता है. यानी जूनियर लेवल से लेकर बड़े लेवल तक प्रक्रिया की जांच होती है. लेकिन इस केस में बार-बार छोटे लेवल के अधिकारियों का नाम आ रहा है, ऐसे में क्या इस प्रक्रिया पालन भी नहीं हो पाया.
5. एलओयू के बाद बैंक खातों की ब्रांच और हेड ऑफिस लेवल पर इंटरनल जांच लगातार जारी रहती है. इसी प्रकार की जांच आरबीआई लेवल पर भी होती है. अगर इस मामले में लगातार गड़बड़ी दिखाई दे रही थी, तो क्या किसी भी लेवल की जांच में ऐसा नहीं पाया गया.
6. चीफ विजिलेंस ऑफिसर जो भी जांच करता है वह बैंक के एमडी को नहीं बल्कि सीधा चीफ विजिलेंस कमिश्नर को रिपोर्ट करता है. अगर कोई गड़बड़ी होती है तो वो सीधा चीफ विजिलेंस कमिश्नर की नज़र में आती है. लेकिन अगर ये घोटाला 7 साल से चल रहा था, तो क्या किसी भी अफसर ने कोई गड़बड़ी महसूस ही नहीं की.
punjab an हर बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में एक आरबीआई का अफसर जरूर शामिल रहता है. ऐसा इसलिए किया जाता है कि बैंक की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके. लेकिन लगता है कि इस केस में ऐसा नहीं हुआ है, ना तो पीएनबी और ना ही आरबीआई के लेवल पर किसी को इस घोटाले की भनक पड़ी.

Friday, 16 February 2018

मान्यता है कि फुलैरा दूज के दिन सच्चे मन से भगवान कृष्ण और राधा की पूजा-अर्चना करने से जीवन में प्रेम और आनंद की कभी कमी नहीं होती

कल है कृष्ण-राधा का विशेष दिन, इस प्रकार पूजा करने से जीवन में कभी नहीं होगी प्रेम की कमी

हिंदू धर्म में राधा-कृष्ण की जोड़ी प्रेम की मिसाल मानी जाती है। राधा और कृष्ण के प्रेम की कई कथाएं प्रचलित हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाने आदि में राधा-कृष्ण के कई मंदिर बने हैं। इन मंदिरों में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां फाल्गुन मास में एक विशेष दिन को राधा-कृष्ण के प्रेम-दिवस के रूप में मनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन कान्हा और राधा रानी की पूजा करने से प्रेम की प्राप्ति होती है?


मान्यता है कि द्वापर युग में फाल्गुन ही वो माह था जब कृष्ण-राधा का प्रेम चरम पर था। इसी महीने में गोपियों ने दोनों के प्रेम को सहर्ष स्वीकार कर उनपर फूलों की वर्षा की थी। गोकुल की गोपिकाओं ने कृष्ण-राधा के प्रेम पर मोहित होकर फूलों की होली खेली थी। यही वजह है कि इस दिन को यहां विशेष रूप से “फुलैरा दूज” के रूप में मनाया जाता है।
कब मनाई जाती है फुलैरा दूज?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय को “फुलैरा दूज” पर्व मनाया जाता है। इस साल यह 17 फरवरी को मनाई जाएगी जो इस दिन (17 फरवरी को) सुबह 3 बजकर 56 मिनट पर शुरु होगा और अगले दिन यानि 18 फरवरी शाम 4 बजकर 50 मिनट तक चलेगा।
फुलैरा दूज का महत्व
मान्यता है कि फुलैरा दूज के दिन सच्चे मन से भगवान कृष्ण और राधा की पूजा-अर्चना करने से जीवन में प्रेम और आनंद की कभी कमी नहीं होती। प्रेमी जोड़ों को एक-दूसरे का साथ मिलता है। भगवान कृष्ण और देवी राधा भक्तों के जीवन को प्रेम और खुशियों से भर देते हैं।

मनाने का तरीका
यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं। यह बसंत पंचमी के बाद और होली के पहले पड़ता है इसलिए होली की तरह इस दिन भी लोग एक दूसरे के साथ फूलों की होली खेलते हैं और होली का त्यौहार आने तक हर दिन घर को फूलों से सजाते हैं। कह सकते हैं इसी दिन से एक प्रकार से होली की शुरुआत हो जाती है।
मथुरा, वृंदावन में ‘फुलैरा दूज’ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की पूजा करने वाले भक्त इस दिन उनपर जितने फूल बरसाते हैं कान्हा उन भक्तों पर उससे कहीं अधिक प्रेम लुटाते हैं। इस दिन फूलों से सजे कन्हैया लाल को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त मथुरा वृंदावन के मदिरों में आते हैं।
पूजा करने से मिलेगा फल
ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं के अनुसार ‘फुलैरा दूज’ को फाल्गुन माह का सबसे शुभ दिन माना जाता है। अगर आप कोई भी नया काम करने का सोच रहे हैं तो इस दिन बिना सोचे-विचारे उस काम को कर सकते हैं, आपको सफलता मिलेगी।
वैवाहिक जीवन को मधुर बनाने तथा नए प्रेम-संबंध शुरु करने के लिए यह एक शुभ दिन माना जाता है। जिनकी कुंडली में प्रेम का अभाव है उन्हें इस दिन कृष्ण-राधा की पूजा जरूर करनी चाहिए।
विवाह के लिए अति उत्तम दिन
फुलैरा दूज को विवाह के लिए उत्तम दिन माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन विवाह के लिए किसी भी मुहूर्त की जरूरत नहीं होती। ब्रजमंडल में फुलैरा दूज के दिन सबसे ज्यादा विवाह होते हैं।

क्या करें इस दिन?
घर में फूलों की रंगोली बनाएं।
श्रीकृष्ण और राधा की मूर्ति को फूलों से सजाएं।
पूजा करते वक्त मुरली वाले कान्हा को मीठे पकवान का भोग लगाएं।
मीठे पकवानों को भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में बांटें।

Thursday, 15 February 2018

11 हजार करोड़ का घोटाला कि बैंक को भनक तक नहीं लगी?

PNB स्‍कैम: ऐसे हुआ 

पंजाब नेशनल बैंक(पीएनबी) 
में 11, 360 करोड़ रुपये के घोटाले के सामने आने के बाद सरकार समेत जांच एजेंसियों के होश उड़ गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर बैंक की नाक के नीचे से कैसे इतना बड़ा घोटाला हो गया और पता नहीं चला? यह सभी सवाल उठ रहे हैं कि ऑडिट की नजर से यह कैसे बच गया? इन सवालों के जवाब के लिए पूरे मामले की परत दर परत तक जाने की जरूरत है. इसके साथ ही मीडिया रिपोर्टों में अभी तक इस खेल में दो बैंक कर्मियों की मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी के साथ मिलीभगत सामने आ रही है. इनमें से एक पूर्व डिप्‍टी मैनेजर और दूसरा क्‍लर्क है. इस पूरी साठगांठ को समझने के लिए पूरे बैंकिंग सिस्‍टम को समझने की जरूरत है.
1. पीएनबी घोटाले के केंद्र बिंदु में सहमति पत्र यानी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) है. यह पत्र एक तरह से बैंक की तरफ से गारंटी होती है. दरअसल यदि कोई बाहर से सामान आयात करता है तो निर्यातक को विदेश में पैसे चुकाने होते हैं. इसके लिए कई बार आयातक कुछ समय के लिए बैंक से उधार लेता है.
2. इसके लिए बैंक आयातकर्ता के लिए विदेश में मौजूद किसी बैंक को एलओयू देता है. इसमें लिखा होता है कि अमुक काम के लिए आप एक निश्चित पेमेंट कर दीजिए. इसमें बैंक वादा करता है कि आप (विदेशी बैंक) निश्चित अवधि के लिए यह पैसे दे दीजिए और वह निर्धारित अवधि के भीतर ब्‍याज के साथ उस पैसे को लौटा देगा.
16 करोड़ रुपये में नेकलेस बेचकर चर्चा में आए थे नीरव मोदी
3. आमतौर पर होता यह है कि बैंक को व्‍यवसायी तय समय पर पैसे ब्‍यास समेत वापस कर देता है और बैंक आगे विदेशी बैंक को इसकी पेमेंट कर देता है.
4. यहीं पर पूरा खेल हुआ. मुंबई की बैंक की एक कॉरपोरेट ब्रांच के दो कर्मचारियों ने नीरव मोदी के लिए फर्जी एलओयू जारी किए. बैंक का इससे कोई लेना-देना नहीं था.
5. दरअसल एलओयू के लिए एक स्विफ्ट सिस्‍टम होता है. इन कर्मचारियों के पास इसका कंट्रोल था. यह एक अंतरराष्‍ट्रीय कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम होता है तो दुनिया भर के बैंको को आपस में जोड़ता है.
6. इसी स्विफ्ट सिस्‍टम के तहत एलओयू के लिए कोड भेजे जाते हैं. इस सिस्‍टम के जरिये ही एलओयू संदेशों का आदान-प्रदान होता है. इस कारण जब किसी विदेशी बैंक को स्विफ्ट सिस्‍टम के तहत एलओयू कोड मिलते हैं तो वह उनको आधिकारिक और सटीक मानता है और व्‍यवसायी को पैसे उधार के रूप में दे देता है.
7. पीएनबी की उस ब्रांच में इस काम को करने वाले थे- एक क्‍लर्क जो डाटा फीड करता था और दूसरा वह अधिकारी जो इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि करता था. इस मामले में इन लोगों ने फर्जी एलओयू बनाकर भेज दिया.
8. दरअसल इस मामले में ऐसा लगता है कि स्विफ्ट सिस्‍टम, कोर बैंकिंग से जुड़ा नहीं था. ऐसा इसलिए क्‍योंकि कोर बैंकिंग से जुड़ी बैंलेंसशीट रोज ब्रांच मैनेजर के पास पहुंचती है तो उसको पता लग जाता है कि पिछले दिन बैंक ने कहां कर्ज देने की मंजूरी दी.
9. चूंकि फर्जी संदेश भेजे गए. उनको भेजने के बाद डिलीट कर दिया और कोर बैंकिंग में कोई एंट्री नहीं हुई. इस वजह से किसी को कुछ पता नहीं चला.
10. 2011 से यह खेल इसलिए चलता रहा क्‍योंकि एक कर्ज को खत्‍म करने के लिए समय से पहले ही दूसरा बड़ा कर्ज ले लिया जाता रहा. उससे पुराने कर्ज को अदा किया जाता रहा. इससे किसी को पता नहीं चला. इस बीच पिछले साल वह बैंक अधिकारी रिटायर हो गया. उसके रिटायर होने के बाद जब नए एलओयू के लिए नीरव मोदी की कंपनी ने संपर्क साधा तो नए अधिकारी ने जब इसके लिए जमानत राशि मांगी तो उसको बताया गया कि इससे पहले उन्‍होंने कभी कुछ दिया नहीं. यहीं से गड़बड़ के संकेत मिले. उसके बाद जब एक विदेशी बैंक ने समय पूरा होने के बाद पीएनबी से एलओयू के आधार पर पैसे मांगे तो पीएनबी ने कहा कि उसने तो कभी ऐसे लोन के लिए कहा ही नहीं. इसके बाद बैंक ने जांच एजेंसियों के पास शिकायत की. इनकी जांच के बाद अब सारे मामले खुल रहे हैं.

माल्या के बाद दूसरे सबसे बड़े डिफॉल्टर

इस हीरा कारोबारी ने दिया था PNB को सबसे बड़ा झटका


नीरव मोदी इन दिनों चर्चा में है. दरअसल, पीएनबी में हुए 11 हजार करोड़ के फ्रॉड ने सबको हिला कर रख दिया है. शेयर बाजार से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक इस महाघोटले से सकते में हैं. वहीं, सबसे खास बात ये है कि इस घोटाले से बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं. क्योंकि, फ्रॉड को देखकर लगता है कि बैंक ने रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस को फोलो नहीं किया. आरबीआई गाइडलाइंस के बावजूद पीएनबी ने इतना बड़ा लोन कैसे दिया? आपको बता दें यह पहली बार नहीं है जब पीएनबी को इतना बड़ा झटका लगा है. पांच साल पहले भी ऐसा ही एक घोटाले का बैंक शिकार हो चुका है. अब सवाल ये है कि पहले भी हीरा कारोबारी के झांसे में आकर पीएनबी को करोड़ों का नुकसान हुआ था. ऐसे में बैंक दोबारा कैसे झटका खा सकता है.
जतिन मेहता भी दे चुके हैं धोखा
विनसम डायमंड एंड ज्वैलरी लिमिटेड ग्रुप के जतिन मेहता भी हीरा कारोबार से जुड़े थे. पांच साल पहले उनके ग्रुप ने भी भारतीय बैंकों को कुछ इसी तरह धोखा देकर करोड़ों का फ्रॉड किया था. हालांकि, उस वक्त का मामला और बड़ा था, क्योंकि उस वक्त के इस हीरा कारोबारी ने कईं बैंकों का पैसा नहीं चुकाया था. उस वक्त भी सबसे ज्यादा नुकसान पीएनबी को हुआ था.
माल्या के बाद दूसरे सबसे बड़े डिफॉल्टर
जतिन मेहता को विजय माल्या के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा डिफॉल्टर घोषित किया गया. दरअसल, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की अंडरटेकिंग पर बैंकों ने विनसम ग्रुप को 7000 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था. इसमें भी पीएनबी ने सबसे ज्यादा 1800 करोड़ का कर्ज दिया था.
14 बैंकों से लिजा कर्ज
विनसम डायमंड ग्रुप ने 2011 में 14 बैंकों से 3420 करोड़ रुपए का कर्ज लिया. 2012 की पहली तिमाही तक इस कर्ज की सीमा को बढ़कर 4617 करोड़ रुपए कर दिया गया. यह सारा पैसा ग्रुप की तीन कंपनियों को दिया गया. विनसम डायमंड को 4366 करोड़ रुपए का कर्ज दिया गया. फोरएवर प्रिशियस डायमंड को 1932 करोड़ रुपए का कर्ज दिया गया. वहीं, सूरज डायमंड्स को 283 करोड़ का कर्ज दिया गया था.
बैंकों ने लिया था पेमेंट का जिम्मा
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक, 2011 में बैंकों ने विनसम डायमंड को लेटर्स ऑफ क्रेडिट जारी किया था. एसबीएलसी इंटरनेशनल बुलियन बैंक्स को यह लेटर जारी किया गया था. दरअसल, एसबीएलसी इंटरनेशनल बुलियन बैंक ही विनसम ग्रुप को सोने की सप्लाई करती थी. .
क्या था लेटर ऑफ क्रेडिट
बैंकों की ओर से विनसम को दिए गए लेटर्स ऑफ क्रेडिट का मतलब था कि अगर ग्रुप एसबीएलसी इंटरनेशनल बुलियन बैंक्स को सोने का भुगतान नहीं करती तो बैंक उसकी पेमेंट करेंगे. बैंकों ने उसे कर्ज दिया. विनसम ग्रुप ने पैसा नहीं चुकाया. रीपेमेंट का दबाव लगातार बढ़ा
विनसम ने नहीं चुकाया कर्ज
विनसम ग्रुप के क्लाइंट्स को बड़ा नुकसान हुआ. इसके बाद विनसम ने बैंकों को पेमेंट करने से इनकार कर दिया. उसने तर्क दिया की क्लाइंट को नुकसान होने की वजह से वह रीपेमेंट नहीं कर पाएगी. तभी बैंकों को बड़ा झटका लगा.
नीरव मोदी वाले ही थे हालात
नीरव मोदी मामले में भी हालात पांच साल पहले वाले ही हैं. पीएनबी ने सीबीआई को जो तर्क दिया है वो भी वैसा ही है जैसा विनसम ग्रुप के समय पर था. उस घोटाले के बाद से जतिन मेहता का परिवार कभी भारत नहीं लौटा. खबरों की मानें तो मेहता परिवार सिंगापुर में सेटल है और परिवार के कुछ सदस्य दुबई में हैं. जतिन मेहता पर 7 हजार करोड़ लेकर फरार होने का आरोप है और 2012 से उनकी कोई खबर नहीं है.
पनामा पेपर्स में भी नाम
पनामा पेपर्स ने भी अपनी लिस्ट में जतिन मेहता का नाम शामिल किया था. उसके मुताबिक, जतिन मेहता ने बैंकों से लिए कर्ज का इस्तेमाल बहामास में किया, जहां उन्होंने कई जगह निवेश किया. खबरों के मुताबिक, मेहता परिवार ने 2012 में भारत छोड़ा और उसके बाद सिंगापुर, दुबई में रहे, लेकिन 2016 में मेहता परिवार फिर चर्चा में आया जब यह बात सामने आई कि जतिन मेहता ने सेंट किट्स एंड नेविस की नागरिकता ली. बता दें कि सेंट किट्स और नेविस के साथ भारत का कोई प्रत्यर्पण समझौता भी नहीं है.

30 अन्य बैंकों की जांच में पता चलेगी फर्जीवाड़े की सही रकम

और बढ़ सकती है फर्जीवाड़े की रकम, 30 बैंकों की जांच में पता चलेगा असली घोटाला

देश में भूचाल लाने वाले पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले के मास्टरमाइंड नीरव मोदी ने सरकारी व्यवस्था की खामियों का जमकर फायदा उठाया. बैंक के ही दो अधिकारियों की मिलीभगत से 150 फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी कराए गए जिसकी मदद से 11360 करोड़ रुपये का यह फर्जीवाड़ा किया गया.
30 अन्य बैंकों की जांच में पता चलेगी फर्जीवाड़े की सही रकम
इधर पीएनबी ने देश के 30 अन्य बैंकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें ये कहा गया है कि वे फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के सहारे किए गए इस घोटाले की मॉडस ऑपरेंडी की पड़ताल कर रही है. जैसे-जैसे वे इसकी तह में जा रहे हैं, वैसे-वैसे कई खामियां पता चल रही हैं. पत्र में कहा गया है कि इसके बारे में सभी बैंकों को बताया जाएगा, ताकि वे भी अपने यहां ऐसे किसी भी संदिग्ध लेन-देन की जांच कर सके. ऐसे घोटाले की सही रकम का अंदाजा पीएनबी समेत 30 अन्य बैंकों की जांच के बाद ही पता चल सकेगा.
बिना एंट्री करे जारी किए फर्जी 150 LoU
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक के डिप्टी मैनेजर रहे गोकुलनाथ शेट्टी ने नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग दिया. गोकुलनाथ शेट्टी ने अपने दूसरे साथी अफसर मनोज खरात के साथ मिलकर ये फर्जीवाड़ा किया. इन शातिरों ने पकड़ में आने से बचने के लिए बैंक के दस्तावेजों में नीरव की कोई एंट्री ही नहीं की गई.
इन चार बैंकों की विदेश ब्रांच से निकाले पैसे
नीरव मोदी ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों (LoU) का भरपूर फायदा उठाते हुए हांगकांग में इलाहाबाद बैंक की ब्रांच से 2000 से 2200 करोड़, यूनियन बैंक से 2000 से 2300 करोड़, एक्सिस बैंक से लगभग 2000 करोड़ और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 960 करोड़ रुपये लिए.
क्या होता है LoU
लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) एक तरह से बैंक गारंटी होती है. यह आयात के लिए ओवरसीज भुगतान करने के लिए जारी किया जाता है. LoU जारी करने वाला बैंक गारंटर बन जाता है और वह अपने क्लाइंट के लोन पर प्रिंसिपल अमाउंट और उस पर लगने वाले ब्याज को बिना शर्त भुगतान करना स्वीकार करता है.
SWIFT का भी उठाया फायदा
इतनी भारी-भरकम राशि के लेन-देन के लिए पीएनबी के कर्मचारियों ने 'SWIFT' का भी दुरुपयोग किया. रोजाना की बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को प्रॉसेस करने वाले कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) को ये कर्मचारी चकमा दे गए. इसके जरिये उन्होंने LoUs पर दी जाने वाली गारंटी को जरूरी मंजूरी के बिना ही पास कर लिया और इसी के आधार पर भारतीय बैंकों की विदेश में स्थिजत ब्रांचेस ने कर्ज दिया.
SWIFT क्या है?
जब भी किसी बैंक की तरफ से LoU जारी किया जाता है. इसके बाद क्रेडिट ट्रांसफर की जानकारी विदेश में स्थियत बैंक को दी जाती है. यह जानकारी SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) व्यवस्था के जरिये दी जाती है. यह एक अहम जानकारी होती है, जिसके जरिये बैंक अपनी सहमति और गारंटी देता है. दरअसल, 'स्विफ्ट' से जुड़े मैसेज पीएनबी के पिनैकल सॉफ्टवेयर सिस्टम में तत्काल ट्रैक नहीं होते हैं क्योंकि ये बैंक के CBS में एंट्री किए बिना जारी किए जाते हैं. इसी का फायदा पीएनबी के दो कर्मचारियों ने उठाया और करोड़ों का लेन-देन किया. इस महाघोटाले को करीब 150 LoU के जरिए अंजाम दिया गया.
नीरव और उसके करीबी एक-एक कर हुए फरार
नीरव मोदी एक जनवरी को ही देश छोड़कर स्विट्जरलैंड चला गया है. नीरव का भाई निशाल बेल्जियम का नागरिक है. वह भी एक जनवरी को भारत छोड़ गया. हालांकि वे दोनों साथ गए थे या अलग अलग इसकी जांच अभी की जानी है. नीरव की पत्नी और अमेरिकी नागरिक एमी छह जनवरी को यहां से निकली. उसके चाचा तथा गीतांजलि जूलरी के प्रवर्तक मेहुल चौकसी चार जनवरी को देश छोड़कर चले गए. अब तक नीरव के मुंबई व सूरत समेत कई शहरों में 20 स्थानों पर तलाशी ली गई है.
29 जनवरी को ही PNB ने की थी शिकायत
पीएनबी ने 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बारे में 29 जनवरी को सीबीआई को शिकायत की थी. सीबीआई ने नीरव, उसकी पत्नी, भाई व पार्टनर चौकसी के खिलाफ 31 जनवरी को ही मामला दर्ज किया था. बैंक ने पहली शिकायत के पखवाड़े भर में ही सीबीआई से संपर्क कर कहा कि यह मामला 11,400 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का है. अब इस सवाल की भी पड़ताल की जा रही है कि पीएनबी ने सीबीआई को शिकायत में सारी जानकारी न देकर यह किस्तों में देने का फैसला क्यों किया?

ग्रहण जब लगते हैं तो पृथ्वी के प्राणियों में कुछ हलचल सी होती है

सूर्यग्रहण 16 फरवरी को लगेगा, राशियों पर भी पड़ेगा प्रभाव
ग्रहण जब लगते हैं तो पृथ्वी के प्राणियों में कुछ हलचल सी होती है। 
ग्रहण के दौरान पक्षी अपने घोसलों की ओर लौटना शुरू हो जाते हैं। लगभग 15 दिन पहले साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था अब दूसरा ग्रहण जो सूर्य ग्रहण होगा, लगेगा। यह सूर्य ग्रहण आंशिक होगा, जो कि भारत में दिखाई नहीं देगा। विश्व के अन्य देशों में यह दिखाई देगा। वर्ष 2018 में कुल तीन बार सूर्य ग्रहण लगेंगे। और ये तीनों ही आंशिक रूप से होंगे। ये तीनों सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका के एरिया में दिखाई पड़ेंगे। 16 फरवरी को साल का पहला सूर्यग्रहण पड़ेगा। इससे पहले पिछले महीने की 31 जनवरी को चंद्रग्रहण हुआ था। जो पूरे भारत में दिखाई दिया था। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण 12 बजकर 25 मिनट से शुरू होगा लेकिन भारत में यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा। ग्रहण का मोक्ष सुबह 4 बजे होगा। 
यह सूर्य ग्रहण दक्षिण जार्जिया, प्रशांत महासागर, चिली, ब्राजील  और अंटार्कटिका आदि देशों में दिखाई देगा। जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
इस सूर्य ग्रहण के कारण 16 फरवरी के बाद कुछ राशियों पर इसका नकारात्मक असर रहेगा जबकि कुछ राशियों की खुलेगी किस्मत।
मेष-सूर्य ग्रहण के कारण मेष राशि वालों का कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ेगा, इनकम बढ़ेगी तथा व्यवसाय में उत्तम लाभ होगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के साथ ही रुके हुए कामों में पूर्ण होंगे तथा सफलता मिलने की उम्मीद है।
वृष-कार्य क्षेत्र में व्यस्त रहेंगे। जिसकी वजह से नौकरी में सम्मान बना रहेगा। व्यवसाय में विस्तार होगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। 16 फरवरी के बाद वृष राशि वालों के लिए धन कमाने के कई मौके मिलेंगे। इस दौरान आपको थोड़ी परेशानी और थोड़ी बेचैनी हो सकती हैं। परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के मामले में चिंता और परेशानी हो सकती है।
मिथुन-न्नति और लाभ की संभावना कम है। प्रेम संबंधों में तकरार हो सकती है। पढ़ाई में मन कम ही लगेगा। पारिवारिक विवाद से बचें। विरोधी शांत रहेंगे। व्यावसायिक लाभ सामान्य रहेगा। स्वास्थ्य नरम रहेगा। हालांकि आने वाले समय में कुछ परेशानियां बढ़ सकती है।
 कर्क- यह समय जीवन में थोड़ा कष्टकारी रहेगा। धन हानि और मानहानि भी हो सकती है। यह ग्रहण 16 फरवरी के बाद शुभ समाचार मिल सकेगा। करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे। व्यवसाय में धन लाभ बढ़ेगा। मित्र से भेंट होगी जिसकी वजह से किसी नए प्रोजेक्ट पर आगे बढऩे की संभावना रहेगी।
सिंह-किसी से साझेदारी है तो संभलकर रहें। जीवन साथी को कष्ट हो सकता है। वैवाहिक जीवन में भी उथल-पुथल आ सकती है, सावधानी रखें। भू संपत्ति का अटका कार्य बनेगा। व्यय पर नियंत्रण रखें। व्यवसाय में लाभ कम होगा। स्वास्थ्य नरम रहेगा। कानूनी विवाद में  उलझ सकते हैं। 16 फरवरी के बाद किसी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं इसलिए सावधानी बरतें।
कन्या- विरोधियों और शत्रु का नाश होगा। हर जगह से अच्छी खबर और सफलता प्राप्त होने से खुशी मिलेगी। कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण आने वाला समय अनुकूल रहेगा। कार्य क्षेत्र में विस्तार संभव है। अटके धन की प्राप्ति होगी। व्यवसाय में लाभ बढ़ेगा। घर में खुशी होगी। विदेशी की यात्रा कर सकते हैं।
तुला- ग्रहण के बाद आपका मन विचलित हो सकता है। मानसिक तनाव बढ़ सकता है। पैसों के मामले में नुकसान उठाना पड़ सकता है। सावधानी बरतें।
वृश्चिक- मन अशांत रहेगा। कानूनी परेशानी से मुक्ति मिलेगी। व्यवसाय में सुधार आएगा। धर्म में श्रद्धा बढ़ेगी।
धनु- इच्छाशक्ति में वृद्धि होगी। छोटी यात्रा का योग बनेगा, यात्रा मंगलमय रहेगी। पारिवारिक संबंधों में सुधार बनेगा।अजनबी से सचेत रहें। व्यावसायिक निर्णय सोच समझकर लें। घर में शांति रहेगी।मकर-कार्यक्षेत्र में नया पदभार मिल सकता है। भू संपत्ति से लाभ के अवसर मिलेंगे। व्यावसायिक लाभ बढ़ेगा।
मकर-मानसिक तनाव बढऩे से परेशानी हो सकती है। आमदनी की तुलना में खर्च ज्यादा होगा। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ सकती है।
कुंभ-भोग विलास के साधनों पर व्यय होगा। नौकरी में मन लगेगा। व्यवसाय में धन लाभ होगा। धैर्य बनाए रखें।
मीन-उत्साह में वृद्धि होगी। नौकरी में उन्नति के अवसर मिलेंगे।व्यवसाय में लाभ होगा।संतान पक्ष से चिंता रहेगी।
कार्यक्षेत्र में नया पदभार मिल सकता है। भू संपत्ति से लाभ के अवसर मिलेंगे। व्यावसायिक लाभ बढ़ेगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान शास्त्रों में निर्देश दिए गए हैं जिन्हें मानव को पालन करना चाहिए