Friday, 25 May 2018

पाकिस्तानी मीडिया का दावा यदि सत्य हुआ तो ये होगी राष्ट्र से अब तक की सबसे बड़ी गद्दारी

क्या कभी पाकिस्तानी काला धन जमा करवाया गया भारत मे ? पाकिस्तानी मीडिया का दावा यदि सत्य हुआ तो ये होगी राष्ट्र से अब तक की सबसे बड़ी गद्दारी
जहां सारा भारत देश अपना पैसा स्विस बैंकों में जाने से चिंचित है वहीं सारा पाकिस्तान अब अपना पैसा भारत मे जमा होने से चिंतित है। ये दिलचस्प खुलासा किया है पाकिस्तान की मीडिया ने। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नवाज शरीफ ने भारत में 4.9 अरब डॉलर का कालाधन जमा किया हुआ है।एनएबी की विज्ञप्ति के हवाले से मालूम हुआ है कि ब्यूरो चेयरमैन जस्टिस (रि.) जावेद इकबाल ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। विदित हो कि पाकिस्तान की नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) ने इस मीडिया रिपोर्ट पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले की के आदेश जारी किये हैं। दिलचस्प: दावा ये है कि नवाज शरीफ ने काला धन भारतीय वित्त मंत्रालय में जमा करवाया है।ये उस समय की बात बताई जा रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था और राजनेताओं की भाषणबाज़ी से हर पल युद्ध के हालात लगते थे . मणिशंकर अय्यर के बार बार पाकिस्तान दौरे भी अब इस खुलासे के बाद आ रहे हैं सन्देह के घेरे में ..पाकिस्तान के प्रमुख समाचार माध्यम जियो टीवी ने भी ये खबर दी है।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस घटना का वर्ल्ड बैंक के माइग्रेशन एंड रेमिटेंस बुक 2016 में भी जिक्र है। न्यूज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये रकम भारतीय वित्त मंत्रालय में जमा करवाई गयी है। बतादें कि पाकिस्तान की शीर्ष अदालत शरीफ को अयोग्य घोषित कर चुकी है ओर वहीं सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पनामा पेपर्स मामले में फैसले के बाद नवाज शरीफ एनएबी में पहले ही भ्रष्टाचार के तीन मामलों में जांच में फंसा हुआ है। उधर शरीफ ने इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये सब राजनीति से प्रेरित षड्यंत्र है।

Saturday, 12 May 2018

पत्थर मारनेवालों का कोई धर्म नहीं होता

पत्थरबाज हमेशा भारतीय सेना काे क्याे अपना लक्ष्य बना रहे है ?, 


पत्थरबाजाें का धर्म नही हाेता एेसा कहकर महबूबा मुफ्ती अपने आप काे ही धाेका दे रही है ! अगर पत्थरबाजाें का धर्म नही है ताे महबूबा मुफ्ती इन सवालाें का जवाब दे . . . पत्थरबाज हमेशा भारतीय सेना काे क्याे अपना लक्ष्य बना रहे है ?, पत्थरबाजाें काे फंडिंग पाकिस्थान से क्याे हाे रही हैं ? पत्थरबाज कश्मीर की आजादी क्याें मांग रहे है ? पत्थरबाज भारत विराेधी नारे देकर पाकिस्तान का जयजयकार क्याे करते हैं ? क्या इन सवालाें का जवाब महबूबा मुफ्ती के पास है ? – 
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पथराव में २२ वर्षीय एक युवक की मौत को ‘मानवता की हत्या ’ करार दिया और कहा कि इस घटना ने उनके अंदर की मां को झकझोर दिया है ! मंगलवार को चेन्नई निवासी एस तिरुमणि के पिता से भेंट के बाद विचलित नजर आ रहीं महबूबा ने कहा कि जो लोग किसी को मारने के लिए पत्थर उठाते हैं, उनका कोई धर्म नहीं होता। मुफ्ती ने घाटी के हालात पर चर्चा के लिए राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक का आवाहन किया है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, मुख्यमंत्री बुधवार को श्रीनगर में एक सर्वदलीय बैठक बुला रही हैं जिसमें सांप्रत हालात पर चर्चा की जाएगी। बैठक दोपहर दो बजे शेरे-कश्मीर कांफ्रेंस सेंटर में आयोजित की गई है। घाटी में सोमवार को चेन्नई वासी एक २२ वर्षीय पर्यटक एस थिरुमनी की पत्थरबाजी के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना से व्यथित मुफ्ती ने इसे ‘मानवता की हत्या’ करार दिया था। उन्होंने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर में ऐसा कभी नहीं सुना गया था। इस घटना से आहत मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर अब कई दिनों तक टेलीविजन पर चर्चा और बहस होगी और ‘हम मानवता की हत्या चुपचाप देखते रहेंगे। यह ऐसी घटना है जिसके बारे में जम्मू-कश्मीर में अब तक सुना नहीं गया है !’ दो बेटियों की मां और राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री ने कहा, जिस प्रकार की शिक्षा हमारी अगली पीढ़ी को दी जा रही है, उससे मेरे अंदर की मां विचलित हो गई है। उन्होंने कहा, हम अपने बच्चों को कौन-सी शिक्षा दे रहे हैं कि पत्थर उठाएं और सडक पर जा रहे किसी व्यक्ति को मार दें ? यह वह नहीं है जिसकी हमारा इस्लाम हमें शिक्षा देता है। हमारा धर्म हमें अपने मेहमानों की देखभाल की शिक्षा देता है। ये लोग या लडके, जो किसी को मारने के लिए पत्थर उठाते हैं, उनका कोई धर्म नहीं है। उन्होंने अभिभावकों से सवाल किया कि वे अपने बच्चों को कहां धकेल रहे हैं ?

तिरुमणि और उसका परिवार सोमवार को गुलमर्ग से लौट रहा था । बडगाम में मगाम के समीप उनकी गाडी पथराव में फंस गई। एक पत्थर तिरुमणि की कनपटी में आ लगा। उसे सौरा आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा, क्या कोई कल्पना कर सकता है कि एक गरीब बाप ने अपने परिवार को कश्मीर लाने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च की थी और वह अब अपने बेटे के ताबूत के साथ लौट रहा है। क्या हम यही चाहते हैं ? जब उनसे पूछा गया कि क्या इस घटना का पर्यटन पर असर होगा तो उन्होंने कहा, मैं पर्यटन की बात नहीं कर सकती यह मानवता के बारे में मूल सवाल है। यह कश्मीरियत नहीं हो सकती ! उधर जम्मू-कश्मीर मे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पथराव में पर्यटक की मौत की घटना को दुखद बताया है। उमर ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला करते हुए पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार को विफल बताया। उमर ने ट्वीट में कहा, हमने वाहन पर पत्थर फेंक कर उसमें सवार पर्यटक की हत्या कर दी। हम प्रयास करें और इस तथ्य पर सिर जोडें कि हमने एक पर्यटक पर, एक मेहमान पर पथराव कर उसकी हत्या कर दी जबकि हम पत्थरबाजों और उनके तरीकों का महिमामंडन करते हैं !
स बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने महबूबा मुफ्ती से फोन पर बातचीत कर वहां से सूबे के १३० पर्यटकों की सुरक्षित घर वापसी में उनकी मदद मांगी है। मुख्यमंत्री की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्होंने जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बातचीत कर राज्य के १३० पर्यटकों की सुरक्षित घर वापसी में मदद मांगी है। पर्यटक थिरूमणि सेल्वम के निधन पर शोक प्रकट करते हुए पलानीस्वामी ने पीडित के निकटतम परिजन को तीन लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की !

कश्मीर में पर्यटक की मौत निंदनीय : सीतारमण

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि चेन्नई के रहनेवाले २२ वर्षीय एस थिरुमणि की पथराव के दौरान मौत अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है ! नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि यह घटना लापरवाही से हुई या जान-बूझकर इसे अंजाम दिया गया, लेकिन यह पूरी तरह निंदनीय है। यह पूछने पर कि घाटी में व्याप्त स्थिति से निपटने में सेना के कठिन रवैये से क्या आतंकवाद में वृद्धि हुई है ? मंत्री ने कहा सशस्त्र बलों को आतंकवादियों के साथ सख्ती बनाए रखनी होगी !

Friday, 11 May 2018

स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है...मैं इसे लेकर रहूंगा' का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नेता बाल गंगाधर तिलक के अपमान का मामला सामने आया है

राजस्थान के सिलेबस में बाल गंगाधर तिलक को बताया 'आतंकवाद का जनक'

.स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है...मैं इसे लेकर रहूंगा' का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नेता बाल गंगाधर तिलक के अपमान का मामला सामने आया है दरअसल राजस्थान के स्कूलों में कक्षा 8वीं में पढ़ाई जाने वाली अंग्रेजी की सामाजिक विज्ञान की किताब में उन्हें 'आतंक का जनक' (फादर ऑफ टेररिज्म) बताया गया है. सोशल मीडिया पर इसकी निंदा करते हुए लोग कह रहे हैं कि छात्रों को गलत शिक्षा दी जा रही है.

कांग्रेस ने की किताब हटाने की मांग

बाल गंगाधर तिलक को 'आतंक का जनक' (फादर ऑफ टेररिज्म) बताए जाने पर कांग्रेस ने पुस्तक को सिलेबस से हटाने की मांग की है. वहीं प्रकाशक ने इसे अनुवाद की गलती बताते हुए सुधार करने की बात कही है. आपको बता दें, जिस स्कूल में ये किताब पढ़ाई जा रही है वह राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं. राजस्थान राज्य पाठ्यक्रम बोर्ड किताबों को हिंदी में प्रकाशित करता है इसलिये बोर्ड से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के लिए मथुरा के एक प्रकाशक द्वारा प्रकाशित संदर्भ पुस्तक को इस्तेमाल में लाया जाता है.
ये लिखा किताब में

सामाजिक विज्ञान की इस किताब के पेज नंबर 267 पर 22वें चैप्टर में तिलक के बारे में लिखा गया है कि उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन का रास्ता दिखाया था, इसलिये उन्हें ‘आतंकवाद का जनक’ कहा जाता है. पुस्तक में तिलक के बारे में 18वीं और 19वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आंदोलन के बारे में लिखा गया है. पुस्तक में तिलक के हवाले से बताया गया है कि उनका मानना था कि ब्रिटिश अधिकारियों से प्रार्थना करने मात्र से कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता. शिवाजी और गणपति महोत्सवों के जरिये तिलक ने देश में अनूठे तरीके से जागरूकता फैलाने का कार्य किया.
अनुवादक के ओर से हुई गलती

मथुरा के प्रकाशक स्टूडेंट एडवाइजर पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी राजपाल सिंह ने बताया कि गलती पकड़ी जा चुकी है जिसे संशोधित प्रकाशन में सुधार दिया गया है. उन्होंने बताया कि यह गलती अनुवादक की ओर से की गई थी. वहीं गलती के सामने आने पर पिछले माह के अंक में सुधार कर दिया गया है. इसका पहला अंक पिछले वर्ष प्रकाशित किया गया था. इतिहासकारों ने तिलक जैसी महान राष्ट्रीय विभूतियों को अनुवादक की गलतियों के कारण इस तरह बताए जाने की निंदा की है.

इसी के साथ राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने इसे देश का अपमान बताया है. उन्होंने एक बयान देते हुए कहा 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षा के सिलेबस को जिस गलत स्वरूप में पेश किया जा रहा है, उससे स्वतंत्रता सेनानियों की गरिमा को ठेस पहुंच रही है'.

पायलट ने सरकार से मांग की है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के संदर्भ में जिस किताब में गलत तथ्य लिखे गये हैं उसे सिलेबस से हटाया जाए और पुस्तक पर रोक लगा दी जाए.