Tuesday, 25 September 2018

करोड़ रुपये कमाता है ये भारतीय कारोबारी

एक दिन में 300 करोड़ रुपये कमाता है ये भारतीय कारोबारी

उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने लगातार सातवीं बार 'बर्कले हुरुन -2018' में सबसे अमीर भारतीय के रूप में शीर्ष पर जगह बनाई है. इस लिस्ट के अनुसार अंबानी की हर दिन की कमाई में करोड़ों का इजाफा हुआ है. आइए जानते हैं अंबानी एक दिन में कितने रुपये कमाते हैं और उनकी कुल संपत्ति कितनी है...
इस सूची में दूसरे स्थान पर एस. पी. हिन्दुजा एंड फैमिली है, जिनकी अनुमानित संपत्ति 1,59,000 करोड़ रुपये है.
तीसरे स्थान पर आर्सलर मित्तल की एल. एन. मित्तल एंड फैमिली है, जिनकी अनुमानित संपत्ति 1,14,500 करोड़ रुपये है.

इनके बाद विप्रो के अजीम प्रेमजी का नाम है, जिनकी संपत्ति 96,100 करोड़ रुपये है.
सन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड के दिलीप संघवी की संपत्ति 89,700 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक के उदय कोटक की संपत्ति 78,600 करोड़ रुपये है. (दिलीप संघवी)
वहीं सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साइरस पूनावाला की संपत्ति 73,000 करोड़ रुपये, अडानी समूह के गौतम अडानी एंड फैमिली की संपत्ति 71,200 करोड़ रुपये और शापूर जी पालोनजी मिस्त्री के साइरस पी. मिस्त्री की संपत्ति 69,400 करोड़ रुपये है.

सालाना सूची में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाले अमीरों को शामिल किया जाता है. देश में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति रखनेवालों की संख्या साल 2017 में 617 थी, जो साल 2018 में बढ़कर 831 हो चुकी है. 







Tuesday, 11 September 2018

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश की मुश्किलें कम होने का नाम ही ले रही हैं

एक बड़े नेता का दावा- "अपनी माँ को चुडैल कहते हैं अखिलेश यादव"
अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए अमर सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के अवसान का सबसे बड़ा कारण है उत्तर प्रदेश जो राम का देश है. राम जिन्होंने अपनी सौतेली माता कैकई को मां कहा, सौतेले भाई भरत को भाई कहां और अपने पिता की आज्ञा पर वह वनवास गए, उस के विपरीत अखिलेश अपनी सौतेली मां साधना को जादूगरनी और चुड़ैल कहते हैं. सौतेले भाई प्रतीक को नहीं मानते, अपने बूढ़े बाप के कहने पर वनवास ना जाने के बजाए उन्हीं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. अब तो ऐसी नौबत आ गई कि वो कहावत चरितार्थ होने लगी है- रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा बेटा अखिलेश करेगा राज और बूढ़ा बाप मुलायम जंगल को जाएगा. अमर सिंह से जब पूछा गया कि आप पर समाजवादी पार्टी को तोड़ने का आरोप है, इसके जवाब में अमर सिंह ने कहा कि ना मैं उनके बाप से बात करता हूं ना उनके चाचा से बात करता हूं ना अखिलेश से बात करता हूं तो पार्टी कैसे तोडूंगा.आज समाजवादी पार्टी जिस अवसान की ओर जा रहे रही है उसका कारण खुद अखिलेश हैं जिन्होंने राम की धरती से आने बाद भी राम की परंपराओं का अपमान किया है. इसके अलावा अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी के कद्द्दावर नेता अमर सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना मुग़ल आक्रान्ता अलाउद्दीन खिलजी से की जो महिलाओं की इज्जत नहीं करता था तथा उसी तरह आज़म खान ने उनकी बेटियों को तेज़ाब से नहलाने की धमकी दी थी.

Saturday, 1 September 2018

सामने आ रहा सोना घोटाला.. जानिये कहाँ गया देश का सोना और किसने लूटा उसे बस कुछ साल पहले ?

कांग्रेस को अब तक की सबसे करारी हार मिली मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार तो चली गयी लेकिन घोटालों का जिन्न अभी तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा ह

मनमोहन सरकार में इतने घोटाले सामने आये कि घोटालों की आंधी में ही देश की जनता ने मनमोहन सरकार को ही उड़ा दिया. कांग्रेस को अब तक की सबसे करारी हार मिली मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार तो चली गयी लेकिन घोटालों का जिन्न अभी तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा है. जी हां.. इसी बीच एक और घोटाला सामने आया है, जिसका नाम है "सोना घोटाला"..इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि ये घोटाला भी मनमोहन सिंह की UPA2 सरकार के दौरान हुआ था.घोटाला मनमोहन सरकार के आख़िरी ७ दिनों में हुआ था. CBI ने यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल की गोल्ड इंपोर्ट स्कीम की जांच दोबारा शुरू कर दी है. CBI के हाथ कुछ नए सुराग भी लगे हैं. नए सुराग 80:20 गोल्ड इंपोर्ट स्कीम में घोटाले की ओर इशारा कर रहे हैं. खास बात यह है कि ये घोटाला 2 के कार्यकाल के आखिरी 7 दिनों का है. जिसमें उन्होंने कुछ ज्वेलरी कंपनियों की मांग को बिना जांच के फटाफट मान लिया था. इस मामल में तमिलनाडु के कुछ ज्वेलर्स की ओर से आवेदन किए गए थे. जानकारी के मुताबिक़, तमिलनाडु के 6 ज्वैलर्स ने 80:20 गोल्ड इंपोर्ट स्कीम की शर्तों में ढील देने की मांग करते हुए यूपीए सरकार को आवेदन दिए थे. इन आवेदनों की समीक्षा के बिना ही मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी हफ्ते में उनकी मांग को फटाफट मान लिया था. इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक, इस मामले की नए सिरे से CBI ने जांच शुरू की तो कुछ नए सुराग हाथ लगे. आखिरी 7 दिन की बात भी नए सुराग के तहत ही पता चली है. इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने रखा गया है. यह दूसरा मौका है, जब सीबीआई इस मामले में प्रिलिमिनरी इंक्वायरी शुरू कर चुकी है.यूपीए-2 सरकार को सभी छह आवेदन तमिलनाडु से दिए गए थे. आवेदन की भाषा, फॉर्मैट से लेकर की गई मांग सहित सबकुछ एक जैसा था. हालांकि, आवेदनों की तारीख अलग थी, लेकिन सभी फरवरी 2014 में दिए गए थे. आरबीआई ने आम चुनाव का नतीजा आने के बाद इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था. ये 6 कंपनियां उन 7 कंपनियों की पहली लिस्ट से अलग हैं. पहले की 7 कंपनियों में डायमंड ज्वेलर्स नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी की कंपनियां शामिल थीं. सूत्रों के मुताबिक, जांच में उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिन पर मई 2014 से पहले निर्णय लिए गए थे. जांच के दायरे में वह सभी लोग आ सकते हैं, जो 2 के आखिरी कुछ महीनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े थे. जांच अधिकारियों को शक है कि उन आवेदनों का इस्तेमाल गोल्ड इंपोर्ट स्कीम में बदलाव करने की जमीन तैयार करने के लिए किया गया था.यूपीए 2 के कई टॉप नेताओं और आरबीआई के अधिकारियों की भूमिका पर नजर है. एजेंसियों की नजर इस बात पर भी है कि क्या आरबीआई को नई सरकार बनने तक इंतजार करने को कहा गया था. 2016 में CAG रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस स्कीम से सरकारी खजाने को एक लाख करोड़ रुपए की चपत लगी. एनडीए सरकार ने नवंबर 2014 में यह स्कीम रद्द कर दी थी. सूत्रों के मुताबिक, इस स्कीम की सीबीआई की पिछली पीई 'सबूत न मिल पाने के कारण' फंस गई थी. हालांकि, एजेंसी को अब विश्वास है कि वह नए सबूतों की मदद से इसे रेगुलर केस में बदल लेगी. इस मामले में पिछले कुछ दिनों में विभिन्न एजेंसियों के बीच तीन उच्चस्तरीय बैठक हुई हैं. एजेंसियों की प्राथमिकता एक आपराधिक मामला बनाने की है.

अपने कड़वे प्रवचनों के जरिये शिराओं में बर्फ हो चुके रक्त को राष्ट्रभक्ति व धर्म अनुराग का लावा बनकर प्रवाहित कराने वाले जैन मुनि तरुण सागर जी हुए देवलोकवासी

कड़वे प्रवचन देने वाले प्रख्यात जैन मुनि तथा राष्ट्र संत तरुण सागर जी महाराज का आज निधन हो गया. रतलब है कि, 20 दिन पहले उन्हें पीलिया हुआ था. जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्होंने इलाज कराने से मना कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास जाने का निर्णय किया था. बताया जा रहा है कि वे संथारा प्रथा का पालन कर रहे थे और उन्होंने दवाइयां लेने से इंकार कर दिया था. जैन संप्रदाय के लोग संथारा प्रथा के तहत अन्न-जल छोड़ देते हैं, इसका लक्ष्य जीवन को ख़त्म करना होता है. जैन संप्रदाय की मान्यता के अनुसार इस तरह 'मोक्ष' प्राप्त किया जा सकता है. आज शनिवार देर रात करीब 3.30 बजे जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज ने 51 वर्ष की आयु में अपना शरीर छोड़ दिया तथा महाप्रयाण पर चले गये. जैन मुनि के निधन की खबर आने के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गयी है तथा न केवल जैन समाज अपितु सर्व समाज जैन मुनि के देवलोकगमन पर शोकाकुल है तथा उन्हें अपने अपने तरीके से अंतिम विदाई दे रहा है. निश्चित रूप से जैन मुनि एक सच्चे राष्ट्र संत थे जिन्होंने अपनी शब्द अग्नि से शिराओं में बर्फ बन चुके रक्त को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक दायित्व व धर्म अनुराग का लावा बनकर प्रवाहित कराया तथा लोगों में नई चेतना पैदा की.जैन मुनि तरुण सागर का असली नाम पवन कुमार जैन था. उनका जन्म 26 1967 को ग्राम गुहजी, जिला दमोह, राज्य मध्य प्रदेश में हुआ था. कहा जाता है कि उन्होंने 1981 में घर छोड़ दिया था. जिसके बाद उनकी शिक्षा दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई थी. तरुण सागर अपने कड़वे प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध थे. इसी वजह से उन्हें क्रांतिकारी संत भी कहा जाता था. जैन मुनि पर आधारित किताब कड़वे प्रवचन एक वक्त काफी प्रख्यात हुई थी. समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करके के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए हैं. जैन मुनि तरुण सागर को मध्यप्रदेश सरकार ने 6 फरवरी 2002 को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था. बता दें कि, भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में जैन-मुनि के भक्त रहते हैं. तरुण सागर जी की लोकप्रियता जैन समुदाय के बाहर भी थी. जितना सम्मान तरुण सागर जी को जैन समाज देता था उतना ही सम्मान उन्हें जैन समाज के बाहर से मिलता था. जैन मुनि के बारे में कहा जाता है कि उनके शब्दों में वो आग थी जो पूरी तरह से सुसुप्त हो चुकी इंसानी चेतना को भी क्रान्ति के धर्मपथ पर अग्रसर कर देती थी.