Thursday, 20 December 2018

जो अंसारी पाकिस्तान की जेल से बाहर आया उस पर नजर है खुफिया एजेंसियों की… सवाल ये कि यही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं ?

जासूसी के मामलों में पकड़े गए कुछ अन्य भारतीय कैदियों के नाम व सजा
— गोपाल दास आरोप जासूसी, सजा हुई 24 वर्ष
— सुरजीत सिंह उर्फ मक्खन सिंह आरोप जासूसी, सजा हुई 22 वर्ष
— किरपाल सिंह आरोप जासूसी, पाकिस्तान की जेल में हुई मौत
— भानूदास काराले आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष
— रामराज आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष


हामिद अंसारी, ये पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी नहीं है बल्कि वो हामिद अंसारी है जो जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था तथा जिसे हाल ही में पाकिस्तान ने छोड़ा है. हामिद अंसारी पाकिस्तान से वापस हिंदुस्तान तो लौट आया है लेकिन जिस तरह से उसकी वापसी हुई है तथा पाकिस्तान से हामिद अंसारी पर दया दिखाई है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि जिस तरह से पाकिस्तान ने हामिद अंसारी पर दया दिखाई तथा उसको छोड़ दिया, वही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं दिखाई गई? सवाल ये भी है कि हामिद अंसारी की रिहाई के पीछे पाकिस्तान की कोई नापाक साजिश तो नहीं है ?
मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, पाकिस्तान से वापस आया हामिद निहाल अंसारी भारतीय सुरक्षा एजैंसियों के राडार पर रहने वाला है. इसका कारण ये है कि यह पहला मामला है जब पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में पकड़े गए किसी भारतीय कैदी को इतनी जल्द रिहा कर दिया है. इससे पहले जितने भी भारतीय कैदी जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में पकड़े गए हैं उनको लंबी सजाएं काटनी पड़ीं. यहां तक कि सरबजीत सिंह की तो पाकिस्तान की जेल में ह्त्या तक कर दी गई थी.  यही कारण है कि इस बात का शक एजैंसियों को रहेगा कि कहीं हामिद पाकिस्तान का मुखबिर न बन गया हो.
ज्ञात हो कि हामिद अंसारी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर था जिसका फेसबुक पर एक पाकिस्तान लड़की के साथ प्रेम हो गया था. हालाँकि ये पाकिस्तान का हनी ट्रैप था. उस तथाकथित पाकिस्तानी लड़की को मिलने के लिए हामिद गैरकानूनी ढंग से वर्ष 2012 में अफगानिस्तान के रास्ते पेशावर गया जहां उसको गर्लफ्रैंड की तरफ से बताए गए लॉज में जाना पड़ा लेकिन यहां पर गर्लफ्रैंड की बजाय पाकिस्तानी सुरक्षा एजैंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सुरक्षा एजेंसिया इस बात को लेकर चौकन्नी रहेंगी कि 2012 में गिरफ्तार अंसारी को 2018 में अर्थात 6 साल बाद पाकिस्तान ने छोड़ा है तो कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है, हामिद अंसारी को कहीं जासूस बनाकर तो नहीं भेजा गया?

Thursday, 13 December 2018

सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों

कमलनाथ की CM दावेदारी पर सिख विरोधी दंगों का साया, भाजपा और सिखों ने विरोध जताया
पहले से सीएम चुनने की मुश्किल में घिरी कांग्रेस की मुसीबत सिख नेताओं ने और भी बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में सीएम पद के लिए कमलनाथ का नाम लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि, इस नाम पर प्रदेश के बाहर से विरोध शुरू हो गया है।
दरअसल, सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों ने उनके सीएम बनने की राह में अड़चन पैदा कर दी हैं और पार्टी को एक बार फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में राहुल गांधी के लिए कमलनाथ के बारे में फैसला लेने आसान नहीं होने वाला है।
भाजपा ने पंजाब के सीएम का इस्तीफा मांगा
सिख विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली भाजपा से विरोध की आवाज उठने लगी है। भाजपा के दिल्ली प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा ने देर रात ट्वीट किया और लिखा, 'सुना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 1984 में हुए सिख नरसंहार के हत्यारे कमलनाथ को बतौर सीएम नियुक्त करना चाहते हैं। यह वही शख्स हैं, जिन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज (हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर जी का दाह संस्कार स्थल) में आग लगा दी थी। यह चीज एक बार फिर से दर्शाती है कांग्रेस सिख विरोधी पार्टी है।'
तजिंदर बग्गा (बाएं), एचएच फूलका (मध्य), कंवर संधू (दाएं)
एक अन्य ट्वीट में बग्गा ने कहा, 'जब राहुल गांधी ने 1984 के सिख हत्याकांड के जिम्मेदार कमलनाथ को पंजाब विधानसभा चुनाव का इंचार्ज बनाया था तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विरोध जताया था, जब तक की उन्हें हटा नहीं लिया गया। अगर राहुल गांधी सिखों के हत्यारे कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं तो कैप्टन अमरिंदर को विरोध जताया जताते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।'
पंजाब से भी उठे विरोध के स्वर
दिल्ली ही नहीं विरोध के स्वर पंजाब से उठते दिख रहे हैं। खरड़ से आम आदमी पार्टी की टिकट पर विधानसभा पहुंचे कंवर संधू और वरिष्ठ नेता एच एस फूलका ने कमलनाथ की दावेदारी पर ऐतराज जताया है। संधू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी को ये नहीं भूलना चाहिए कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कमलनाथ के बारे में क्या आम राय है।
फुलका ने कहा- कमलनाथ पर हैं दंगों के दाग
कुछ इसी तरह की बात सिख नेता और वकील एचएस फूलका ने कमलनाथ को लेकर कही। उन्होंने कहा कि भले ही कमलनाथ को 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर किसी आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा लेकिन अभी भी ऐसे गवाह हैं जो बताते हैं कि कमलनाथ राकबगंज के पास की भीड़ को उकसा रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी होने का दावा करती है। उसे ऐसे लोगों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
अकाली दल ने कहा- दंगों के आरोपितों को बचा रहा गांधी परिवार
उधर, अकाली दल ने भी कांग्रेस पर सिख दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने का आरोप लगाया है। पार्टी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, 'जब भी गांधी परिवार सत्ता में आता है तो ये लोग 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के जिम्मेदारों को बचाने का काम करते हैं। अब राहुल कमलनाथ को सीएम पद से नवाज रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी शायद ये संदेश देना चाहते हैं कि सिखों की हत्या में शामिल लोगों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है, वे उनके साथ हैं और उन्हें ईनाम भी देंगे।' सिरसा ने कहा कि अगर राहुल गांधी कमलनाथ को सीएम बनाते हैं तो उन्हें सिखों के गुस्से का सामना करना होगा।

Wednesday, 12 December 2018

श्रद्धालुओं को रेलवे ने दी बड़ी खुशखबरी, कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें

कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें
कुंभ मेला एक जनवरी से है। इसके मद्देनजर कानपुर सेंट्रल स्टेशन अलर्ट मोड पर रहेगा। देशभर से प्रयागराज के लिए आठ सौ स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसमें 622 मेला स्पेशल ट्रेनें अकेले उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद जोन की होंगी।
इन ट्रेनों की धुलाई और उन्हें खड़े करने की व्यवस्था कानपुर से फतेहपुर के बीच अलग-अलग स्टेशनों की लूप लाइनों और यार्ड में होेगी। एनसीआर ने रेलवे बोर्ड से 622 ट्रेनों केलिए 1400 कोच मांगे हैं। यह स्पेशल ट्रेनें 20 कोच की होंगी। रेलवे 13 जनवरी से छह मार्च तक यह व्यवस्थाएं जारी रखेगा।
डेमो पिक
न्यू वाशिंग लाइन में होगी सफाई
जीटी रोड स्थित न्यू अॉटोमेटिक वाशिंग लाइन में अॉटोमेटिक मशीनों से ट्रेनों के कोचों की सफाई होगी। इलाहाबाद और कानपुर में यह व्यवस्था रहेगी। इस रूट की ट्रेनों में बायो टॉयलेट वाले कोच होंगे। स्पेशल ट्रेनों की 70 रेक तैयार होंगी। नियमित ट्रेनों में भी 61 अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे।
कुंभ का सुखद एहसास
स्पेशल ट्रेनों को कुंभ मेले की थीम पर तैयार किया जा रहा है। कोचों पर विनायल रैपिंग की जा रही है। कुंभ, प्रयाग, संगम और प्रमुख इमारतों की तस्वीरों से श्रद्धालुओं को कुंभ मेले का सुखद एहसास होगा।
800 में 622 स्पेशल ट्रेनें उत्तर मध्य रेलवे चलाएगा। इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों के संचालन और उनके रखरखाव में कानपुर की प्रमुख भूमिका होगी। यहां धुलाई, सफाई और ट्रेनों को खड़ा करने की व्यवस्था होगी। कुंभ आने-जाने वालों के लिए कानपुर प्रमुख प्वाइंट होगा।

रोहिंग्याओं के लिए म्यांमार में घर बनवाए भारत की सरकार

कश्मीरी हिन्दू अब तक भटक रहे छत की तलाश में

भारत की वर्तमान सरकार ने वादा तो किया था कि वह सत्ता में आने पर कश्मीरी हिन्दुओं(पंडितों) की कश्मीर में पुनर्वापसी करायेगी, उनके लिए आवास उपलब्ध करायेगी. भाजपा की मोदी सरकार को सत्ता में आये साढ़े चार साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कश्मीरी हिन्दू छत पाने के लिए भटक रहे है. एकतरफ कश्मीरी हिन्दुओं को भाजपा की सरकार आवास उपलब्ध नहीं करा पाई लेकिन म्यांमार में रोहिंग्यओं के लिए भारत सरकार ने घर बनवाकर तैयार कर दिए हैं.
खबर के मुताबिक़, भारत ने मंगलवार को रखाइन राज्य में विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए पहले 50 घरों को म्यांमार को सौंप दिया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनके म्यांमार समकक्ष यू विन मिंट के बीच यहां प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद यह घर सौंपे गए. राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने वार्ता के बाद म्यांमार में न्यायाधीशों की और न्यायिक अधिकारिकों की क्षमता निर्माण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए. राष्ट्रपति का तीन दिवसीय पूर्वी पड़ोसी देश दौरा यहां राष्ट्रपति भवन में एक औपचारिक स्वागत के साथ शुरू हुआ.
बता दें कि भारत ने पिछले साल के अंत में रखाइन के लिए एक विकास कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विस्थापित व्यक्तियों के लौटने के लिए घर निर्माण में म्यांमार सरकार की सहायता करने की बात कही गई थी. इस विकास परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत ढाई सौ घर बनाने की योजना बनाई गई है. कोविंद के दौरे के साथ ही म्यांमार ने भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा की भी घोषणा की है. राष्ट्रपति भवन के बयान के मुताबिक, कोविंद ने वार्ता के दौरान कहा कि भारत, म्यांमार के साथ अपने संबंधों को विशेष प्राथमिकता देता है.
राष्ट्रपति भवन के बयान में कहा गया, “म्यांमार, भारत की एक्ट ईस्ट और पड़ोसी पहले नीतियों के लिए एक मुख्य साझेदार है.” बयान के मुताबिक, “राष्ट्रपति कोविंद ने म्यांमार को भारत से दक्षिणपूर्व एशिया व आसियान की ओर जाने के लिए ‘नेचुरल ब्रिज’ करार दिया.” कोविंद ने म्यांमार की विकास योजनाओं में भारत की भागीदारी पर गर्व जताते हुए म्यांमार से अधूरी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए समर्थन भी मांगा. भारत, म्यांमार और थाईलैंड को जोड़ने वाला एक त्रिपक्षीय राजमार्ग फिलहाल निर्माणाधीन है.
राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में म्यांमार की स्टेट काउंसेलर आंग सान सू की व दो अन्य नेताओं से भी मुलाकात की और विभिन्न द्विपक्षीय व बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की. बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति ने कहा कि भारत, म्यांमार में जारी सुधारों की दिल से प्रशंसा करता है.” उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि यह वक्त म्यांमार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसकी राष्ट्रीय शांति प्रक्रिया के प्रति भारत का पूर्ण समर्थन है.” कोविंद म्यांमार के अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान यांगून की भी यात्रा करेंगे. यह भारत के साथ जमीनी सीमा को साझा करने वाले देश का उनका पहला दौरा होगा.

Saturday, 8 December 2018

बुलंदशहर में बजरंग दल के साथ खड़ा था सिर्फ सुदर्शन न्यूज़

आखिर सामने आने लगा सच


बुलंदशहर हिंसा में मीडिया ट्रायल में मुख्य आरोपी बताये जा रहे बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. बुलंदशहर मामले को लेकर जब जब बजरंग दल तथा योगेश राज को सीधे आरोपी बताते हुए उनका मीडिया ट्रायल किया जा रहा था, उस समय सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ ही था जो बजरंग दल के साथ खड़ा हुआ था. ताजा जानकारी के मुताबिक़, एसआईटी और एसटीएफ की अब तक की जांच में बजरंगदल के जिला संयोजक योगेश राज के खिलाफ बुलंदशहर हिंसा के कोई सबूत नहीं पाए गए हैं. सभी वीडियो में वह सिर्फ पुलिस अधिकारियों से बातचीत और भीड़ को शांत करता दिख रहा है.
जांच अफसर मान रहे हैं कि योगेश राज भीड़ को उकसाने का दोषी जरूर हो सकता है, लेकिन हिंसा करने जैसे सुबूत उसके खिलाफ नहीं मिले हैं. माना जा रहा है कि ठोस सबूत हासिल नहीं होने की वजह से ही पुलिस अधिकारी उसकी गिरफ्तारी से बच रहे हैं. बता दें कि तीन नवंबर को गोकशी के बाद बुलंदशहर में हुई हिंसा में योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया गया है. सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में नामजद 27 लोगों की सूची में योगेश का नाम पहले नंबर पर है. मेरठ रेंज आईजी रामकुमार वर्मा के नेतृत्व में एसआईटी हिंसा की जांच कर रही है. वहीं एसटीएफ को नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी में लगाया है.
सूत्रों ने बताया, एसआईटी को इस केस में अब तक 50 से ज्यादा वीडियो प्राप्त हुई हैं. किसी भी वीडियो में योगेश राज द्वारा हिंसा करने जैसे सुबूत नहीं पाए गए हैं. सिर्फ चार-पांच वीडियो में वह दिख रहा है. एक वीडियो में स्याना सीओ सत्यप्रकाश शर्मा उसे शांत कर एक तरफ ले जाते हुए दिख रहे हैं. दूसरी वीडियो में योगेश राज भीड़ को शांत होने के लिए बोल रहा है. पथराव, आगजनी से जुड़ी किसी भी वीडियो में वह मौजूद नहीं पाया गया है. इन सब चीजों को देखते हुए पुलिस योगेश को गिरफ्तार नहीं कर रही है. हालांकि कहने को उसकी गिरफ्तारी में पूरे मेरठ जोन की पुलिस और एसटीएफ लगी हुई है. सूत्रों का दावा है कि योगेश को जल्द हिंसा के आरोपों से क्लीन चिट दी जा सकती है.