Friday, 22 March 2019

बलिदान दिवस विशेष

भगत सिंह की फांसी रोकने के लिए बहुत कोशिश की थी सुभाषचंद्र बोस ने.. पर कोई था, जिसने नहीं दिया उनका साथ

बहुत कम लोग ही जानते होंगे ये पूरा इतिहास, शायद ही कोई जान पाया हो कि भगत सिंह के बलिदान की इच्छा के बाद भी बहुत ऐसे भी लोग थे जिन्होंने उनकी फांसी को रोकने के लिए हर संभव कोशिश की थी ..उनका नाम भी स्वर्णिम अक्षरों के योग्य था भारत के इतिहास में , पर उसी समय तमाम ऐसे भी थे जो नहीं चाहते थे कि वीर शिरोमणि भगत सिंह मुक्त हों.. वो वचनबद्ध थे अंग्रेजो के प्रति . जानिए वो सच्चा इतिहास जो महान सुभाषचंद्र बोस जी के प्रति आप के मन मे और अधिक श्रद्धा को बढ़ाएगा और नतमस्तक करेगा उस वीर के लिए जो चिंतित था एक अन्य वीर के लिए ..
सुभाष चंद्र बोस की पहली मुलाकात गांधी से 20 जुलाई 1921 को हुई थी। गांधी जी की सलाह पर वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए काम करने लगे। वे जब कलकत्ता महापालिका के प्रमुख अधिकारी बने तो उन्होंने कलकत्ता के रास्तों का अंग्रेजी नाम हटाकर भारतीय नाम पर कर दिया। भारत की आजादी के साथ-साथ उनका जुड़ाव सामाजिक कार्यों में भी बना रहा। बंगाल की भयंकर बाढ़ में घिरे लोगों को उन्होंने भोजन, वस्त्र और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का साहसपूर्ण काम किया था।
भगत सिंह को फांसी की सजा से रिहा कराने के लिए वे जेल से प्रयास कर रहे थे। उनकी रिहाई के लिए उन्होंने गांधी से बात की और कहा कि रिहाई के मुद्दे पर किया गया समझौता वे अंग्रेजों से तोड़ दें। इस समझौते के तहत जेल से भारतीय कैदियों के लिए रिहाई मांगी गई थी। गांधी ब्रिटिश सरकार को दिया गया वचन तोड़ने के लिए राजी नहीं हुए, जिसके बाद भगत सिंह को फांसी दे दी गई। इस घटना के बाद वे गांधी और कांग्रेस के काम करने के तरीके से बहुत नाराज हो गए थे।
अपने सार्वजनिक जीवन में सुभाष को कुल 11 बार कारावास की सजा दी गई थी। सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 को छह महीने का कारावास दिया गया था। 1941 में एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें कलकत्ता की अदालत में पेश होना था, तभी वे अपना घर छोड़कर चले गए और जर्मनी पहुंच गए। जर्मनी में उन्होंने हिटलर से मुलाकात की। अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के लिए उन्होंने आजाद हिन्द फौज का गठन किया और युवाओं को ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा भी दिया।

अभी तक फिलहाल तमाम पार्टियाँ और तमाम नेता इस मौके पर न जाने की बात कर रहे हैं

जानिये पाकिस्तान डे पर भारत की किस पार्टी के किस नेता को मिला है न्योता



इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान ने अपने देश के एक बड़े कार्यक्रम के लिए भारत के गिने चुने लोगों को बुलाया है . अभी तक फिलहाल तमाम पार्टियाँ और तमाम नेता इस मौके पर न जाने की बात कर रहे हैं लेकिन पाकिस्तान अपनी कोशिश जारी रखते हुए उनको बुलाने की हर सम्भव कोशिश कर रहा है जिनको वो अपना शुभचिंतक समझता है . इस बार पकिस्तान ने पाकिस्तान डे के लिए चुनाव है कांग्रेस पार्टी के एक ऐसे नेता को जो अब तक चर्चा में नही था .ज्ञात हो कि पाकिस्तान ने अपने ख़ास पर्व पाकिस्तान डे पर दिल्ली प्रदेश के यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष जैन-ए-आलम को बाकायदा अपने उच्चायोग के माध्यम से निमंत्रण भेजा है. पाकिस्तान में ये दिन आज ही अर्थात 23 मार्च को मनाया जाता है . ये कार्यक्रम दिल्ली में ही मनाया जाता है जिसको आयोजित पाकिस्तानी दूतावास करता है .
यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि इस से पहले भारत ने पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में कड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी नाकाम हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वो सीमा पर लगातार सीजफायर तोड़ रहा है। लेकिन अब सवाल ये बनता है कि आख़िरकार कांग्रेस के नेता जैन ए आलम का पाकिस्तान से ऐसा क्या रिश्ता है जो उनको न्योता दिया गया जबकि कई बड़े नामो को नहीं बुलाया गया .

Thursday, 21 March 2019

ED को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ शाह और अन्य से पूछताछ

ED को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ शाह और अन्य से पूछताछ 


की अनुमति दे दी. मामले में लश्करे तैयबा प्रमुख और 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की संलिप्तता थी
आतंक के वित्तपोषण मामले में एनआईए ने शाह, वताली और कपूर को गिरफ्तार किया था और वे सभी यहां तिहाड़ जेल में हैं.
आतंक के वित्तपोषण मामले में एनआईए ने शाह, वताली और कपूर को गिरफ्तार किया था और वे सभी यहां तिहाड़ जेल में हैं. एनआईए ने पूर्व में आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इसमें हिज्बुल मुजाहिद्दीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का भी नाम है. कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का आरोप है.
एजेंसी ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी सईद और सलाहुद्दीन के अलावा 10 अन्य पर आपराधिक साजिश और देशद्रोह के साथ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के सख्त प्रावधान के तहत आरोप लगाए हैं. एजेंसी ने हुर्रियत नेताओं पर सईद, सलाहुद्दीन और उनके पाकिस्तानी आकाओं से मिले निर्देश और मागदर्शन के तहत काम करने का आरोप लगाया है. उन पर हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू करने की साजिश रचने का भी आरोप है.

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने गुरुवार को पुलवामा आतंकी हमले को लेकर विवादित बयान दिया

रामगोपाल यादव का विवादित बयान, 'पुलवामा हमला वोट पाने के लिए की गई एक साजिश है'


यादव ने अपने बयान में कहा कि अगर केंद्र में सरकार बदली तो हमले के प्रकरण की जांच होगी और बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे.
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने गुरुवार को पुलवामा आतंकी हमले को लेकर विवादित बयान दिया. उन्होंने 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले को साजिश करार दिया ताकि वोट पाए जा सके. वहीं, सीएम योगी ने यादव के बयान पर पलटवार किया है.
यादव ने अपने बयान में कहा कि अगर केंद्र में सरकार बदली तो हमले के प्रकरण की जांच होगी और बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे. होली मिलन समारोह के अवसर पर यादव ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "अर्ध सैन्य बल सरकार से नाराज हैं. वोट के लिए जवान मार दिए गए. जम्मू और श्रीनगर के बीच हाईवे पर कोई चेकिंग नहीं थी. उन्हें (सीआरपीएफ के जवानों को) साधारण बस से भेजा गया. यह सब षड़यंत्र का हिस्सा था. मैं अभी इस पर और बात नहीं करना चाहूंगा लेकिन सरकार बदल गई तो इस पर जांच होगी और बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे."